एनसीईआरटी नौ कक्षा की नई पुस्तक में प्राचीन भारतीय गणितीय परंपराओं और ऐतिहासिक संदर्भों को पाठ्यक्रम से जोड़ा गया
- नौवीं की नई पुस्तक 'गणित मंजरी' में भारतीय गणितीय विरासत पर विशेष जोर

नई दिल्ली, एजेंसी। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की कक्षा नौ की नई पुस्तक 'गणित मंजरी' में प्राचीन भारतीय गणितीय परंपराओं और ऐतिहासिक संदर्भों को पाठ्यक्रम से जोड़ा गया है। इसमें बौधायन, भास्कर, आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे महान भारतीय विद्वानों के सिद्धांतों पर जोर दिया गया है। यह संशोधन राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के तहत किया गया है। 2026-27 सत्र से लागू नई पुस्तक में संख्या पद्धति, पूर्णांक और अपरिमेय संख्याओं जैसे विषयों को केवल परिभाषाओं तक सीमित न रखकर उन्हें प्राचीन ग्रंथों और विद्वानों से जोड़ा गया है। निर्देशांक वाले अध्याय में प्राचीन गणितज्ञ बौधायन के ज्यामितीय सिद्धांतों और 'बौधायन-पाइथागोरस प्रमेय' का उल्लेख करते हुए समन्वय ज्यामिति की नींव से जोड़ा गया है।
साथ ही, बास्कर के सिद्धांतों में उज्जयिनी को प्राचीन समय में केंद्रीय देशांतर रेखा के रूप में दर्शाया गया है। पुस्तक में ऋग्वेद को दशमलव आधारित संख्या प्रणाली की पृष्ठभूमि तैयार करने वाला बताया गया है।पुस्तक में ब्रह्मगुप्त को शून्य और ऋणात्मक संख्याओं के औपचारिक उपयोग का श्रेय दिया गया है, जबकि आर्यभट्ट के 'पाई' के सन्निकटन को गणितीय अनुमान की प्रारंभिक समझ के रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसके अलावा संगमग्राम के माधव को अनंत श्रेणियों के सिद्धांत और अपरिमेय संख्याओं की अवधारणा के विकास से जोड़ा गया है। इसी तरह से शहरी नियोजन और सड़कों के सुनियोजित निर्माण के लिए सिंधु-सरस्वती सभ्यता का उदाहरण दिया गया है।
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