भोजशाला विवाद : एएसआई रिपोर्ट पर आपत्तियों के लिए दो हफ्तों की मोहलत
मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद विवाद में सभी पक्षकारों को आपत्तियां और सुझाव पेश करने के लिए दो हफ्तों की मोहलत दी है। हिंदू इसे वाग्देवी का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे कमाल मौला मस्जिद बताते हैं। अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।

इंदौर, एजेंसी। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने धार के भोजशाला मंदिर-कमाल मौला मस्जिद परिसर को लेकर जारी विवाद के मामले में सोमवार को सभी पक्षकारों को अपनी आपत्तियां, राय, सुझाव और सिफारिशें पेश करने के लिए दो हफ्तों की मोहलत दी। भोजशाला को हिंदू समुदाय वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानता है, जबकि मुस्लिम पक्ष 11वीं सदी के इस स्मारक को कमाल मौला मस्जिद बताता है। यह परिसर भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित है। सुप्रीम कोर्ट ने 22 जनवरी को हाईकोर्ट को निर्देश दिया था कि वह विवादित परिसर के बारे में एएसआई द्वारा सीलबंद लिफाफे में सौंपी गई वैज्ञानिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट खोले।
हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति विजय कुमार शुक्ला और न्यायमूर्ति आलोक अवस्थी ने अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए पाया कि यह रिपोर्ट पहले ही खोली जा चुकी है और इसकी प्रति पक्षकारों को भी दी जा चुकी है। इसके बाद पीठ ने पक्षकारों को इस रिपोर्ट पर आपत्तियां, अभिमत, सुझाव और सिफारिशें पेश करने के लिए दो हफ्ते की मोहलत दी है। मामले में अगली सुनवाई 16 मार्च को होगी।
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