अफगानिस्तान तनाव से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डगमगाई
पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर युद्ध के चलते पाकिस्तान को मिलने वाली आईएमएफ फंडिंग की अगली किस्त संकट में है। आईएमएफ की टीम पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति की समीक्षा कर रही है। युद्ध और बढ़ते सैन्य खर्च ने आर्थिक सुधारों को लागू करना कठिन बना दिया है, जिससे निवेश और महंगाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।

नई दिल्ली, एजेंसी। पाकिस्तान और अफगानिस्तान की सीमा पर चल रहे युद्ध के कारण पाकिस्तान को मिलने वाली आईएमएफ फंडिंग की अगली किस्त खतरे में पड़ गई है। एक मीडिया रिपोर्ट में यह बात कही गई है। आईएमएफ की एक टीम इस समय पाकिस्तान के दौरे पर है और वह देश की अर्थव्यवस्था की तीसरी समीक्षा कर रही है। इस समीक्षा के बाद ही अगली फंडिंग जारी होगी। टीम यह देख रही है कि पाकिस्तान सरकार की ओर से लिए जा रहे आर्थिक फैसले उन शर्तों के अनुसार हैं या नहीं, जो आईएमएफ ने तय की हैं, ताकि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था सुधर सके और वह कर्ज चुका सके।
अफगानिस्तान के साथ चल रहा युद्ध और बढ़ता सैन्य खर्च इन शर्तों को पूरा करना मुश्किल बना रहा है। इससे देश में निवेश का माहौल खराब हुआ है और महंगाई भी बढ़ गई है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान जैसे देश के लिए आईएमएफ से मदद पाने के कुछ जरूरी नियम होते हैं, जैसे आर्थिक सुधारों को जारी रखना, संरचनात्मक बदलाव करना और वित्तीय अनुशासन बनाए रखना। किसी बड़ी सीमा पर युद्ध होना इन सभी चीजों पर नकारात्मक असर डालता है और उन आर्थिक आंकड़ों को बिगाड़ देता है, जिनकी आईएमएफ सबसे ज्यादा जांच करता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर आईएमएफ का कार्यक्रम रुक जाता है तो निवेशकों का भरोसा भी कम हो सकता है, जो पिछले एक साल में काफी बेहतर हुआ था।
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