दिल्ली के 77 नालों से गाद निकालने का काम अधूरा
नई दिल्ली में, मानसून से पहले 77 प्रमुख नालों की सफाई का काम 77% अधूरा है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने एनजीटी में बताया कि 13 मार्च 2026 तक केवल 23.04% सफाई हुई है। जलभराव का खतरा बढ़ सकता है, जबकि विभाग ने समय पर सफाई का भरोसा दिया है।

नई दिल्ली। राजधानी में मानसून से पहले नालों की सफाई का काम पिछड़ा हुआ है। हालात यह है कि शहर के 77 प्रमुख नालों में से गाद निकालने का काम करीब तीन-चौथाई अभी भी अधूरा पड़ा है। इससे आने वाले महीनों में जलभराव का खतरा बढ़ सकता है। सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग की ओर से राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) में दाखिल ताजा स्थिति रिपोर्ट ने विभाग की सुस्त चाल को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के मुताबिक, 13 मार्च 2026 तक नालों से गाद निकालने का काम महज 23.04 फीसदी ही पूरा हो सका है। आंकड़ों को देखें तो विभाग ने 31 मई तक कुल 28,57,464 मीट्रिक टन गाद निकालने का लक्ष्य तय किया है, लेकिन अब तक सिर्फ 6,58,496 मीट्रिक टन गाद ही निकाली जा सकी है।
इसका सीधा अर्थ यह है कि विभाग के सामने अब अगले दो महीनों में लगभग 22 लाख मीट्रिक टन गाद निकालने (77 फीसदी) की चुनौती है।जटिल इलाकों में दी जा रही प्राथमिकताइन 77 नालों को राजधानी की जल निकासी व्यवस्था की जीवनरेखा माना जाता है। यदि समय रहते इनकी पूरी गहराई तक सफाई नहीं हो पाती है, तो मानसून के दौरान पानी की निकासी बाधित होना तय है। इसका सीधा असर सड़कों पर जलभराव और ट्रैफिक जाम के रूप में सामने आ सकता है। विभाग ने ट्रिब्यूनल को भरोसा दिलाया है कि तय समय सीमा के भीतर सफाई पूरी कर ली जाएगी, लेकिन जमीनी स्तर पर मौजूद चुनौतियां इस दावे पर सवाल खड़े कर रही हैं। हालांकि, विभाग का कहना है कि जलभराव के लिहाज से संवेदनशील और जटिल इलाकों के नालों को प्राथमिकता दी जा रही है और फील्ड इंजीनियर लगातार निगरानी कर रहे हैं।प्रमुख नालों में गाद की स्थितिनाले का नाम कुल गाद (मीट्रिक टन) निकाली गई गाद (मीट्रिक टन)नजफगढ़ ड्रेन (19) 826570 173030पालम लिंक ड्रेन 9752 4000बिजवासन ड्रेन 20016 0शाहदरा ड्रेन 9000 3200बारापुला ड्रेन 40000 1920नोटः निकाली गई गाद का आंकड़ा 13 मार्च 2026 तक का है।---------पीडब्ल्यूडी के नालों में भी जमा है गादएनजीटी में दाखिल पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी में सड़कों के किनारे बने करीब 2,129 किलोमीटर लंबे नालों की सफाई का काम युद्धस्तर पर चल रहा है। विभाग ने यह भी बताया कि पहले चरण का कार्य पूरा हो चुका है और दूसरे चरण के तहत 15 मार्च 2026 तक सफाई पूरी करने का लक्ष्य रखा गया। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया कि अब तक करीब 2.68 लाख मीट्रिक टन गाद निकाली जा चुकी है और मानसून के दौरान जलभराव से निपटने के व्यापक इंतजाम किए गए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। नालों में गंदगी, कचरा व गाद जमा है। कई नालों के किनारे ही गाद के ढेर लगे हैं।
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