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एआई इंपैक्ट समिट : भारतीय लड़कियों के लिए बनाया जाएगा एआई चैटबॉट

भारत और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने ग्रामीण लड़कियों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए 5.3 मिलियन पाउंड की लागत से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित चैटबॉट तैयार करने की परियोजना का ऐलान किया है। यह चैटबॉट तनाव, चिंता और उदासी को समझेगा और मानसिक स्वास्थ्य सहायता प्रदान करेगा।

Wed, 18 Feb 2026 08:32 PMNewswrap हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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एआई इंपैक्ट समिट : भारतीय लड़कियों के लिए बनाया जाएगा एआई चैटबॉट

- भारत और ब्रिटेन के शोधकर्ता मिलकर करेंगे इस परियोजना पर काम नई दिल्ली, एजेंसी। भारत की ग्रामीण लड़कियों की मानसिक स्वास्थ्य की देखरेख के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से एक चैटबॉट तैयार किया जाएगा। इसके लिए भारत और ब्रिटेन के शोधकर्ताओं ने मिलकर 5.3 मिलियन पाउंड की लागत वाली एक परियोजना का ऐलान किया। इस अंतरराष्ट्रीय शोध को नई दिल्ली में जारी एआई इंपैक्ट समिट में पेश किया गया, जिसमें टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज, लंदन का इंपीरियल कॉलेज, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी और मिलान फाउंडेशन जैसे संस्थान शामिल हैं। यह टूल ‘वाइसा’ नाम के डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगा, जो पहले से ही दुनिया के कई स्वास्थ्य कार्यक्रम और राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा के साथ काम करता है।

किया जाएगा सुधार पहले चरण में वैज्ञानिक यह समझेंगे कि ग्रामीण लड़कियों को मानसिक स्वास्थ्य सहायता पाने में कौन सी रुकावटें आती हैं। इसके अनुसार, एआई कार्यक्रम में बदलाव किया जाएगा और जांच होगी। इंपीरियल कॉलेज के प्रोफेसर साइरी कोस्टेलो ने कहा, ‘हमारा काम यह सुनिश्चित करना है कि यह एआई टूल असली आंकड़ों के आधार पर सही तरीके से नतीजे दें।’ नए चैटबॉट का काम - लड़कियों से चैट करके उनके तनाव, चिंता और उदासी को समझेगा। - आसान भाषा में सलाह और मानसिक सहारा देगा। - जरूरत होने पर सही डॉक्टर या स्वास्थ्य सेवा तक पहुंचने का रास्ता बताएगा। भारत में 25 करोड़ से ज्यादा बच्चे-किशोर आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, भारत में 10–19 साल के 25 करोड़ से ज्यादा बच्चे-किशोर हैं, जो दुनिया के अन्य देशों की तुलना में सबसे ज्यादा हैं। आधे मानसिक रोग 14 साल से पहले शुरू हो जाते हैं। लड़कियों के मामले में समाज, परिवार और तकनीक की कमी जैसी वजहों से इलाज पाना मुश्किल होता है। इस रिसर्च को वेलकम संस्था फंड कर रही है।

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