राजधानी में नाबालिग बन रहे नए क्रिमिनल, NCRB के डेटा में किस नंबर पर है दिल्ली?
पिछले साल पूरे भारत में नाबालिगों के किए 31,365 अपराध दर्ज हैं। राज्यों में, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 3,970 मामले दर्ज हुए, जिसके बाद मध्य प्रदेश (3,619), तमिलनाडु (2,999) और राजस्थान (2,596) का स्थान रहा।

दिल्ली को लेकर आई राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट डराने वाली है। यहां नाबालिग अब नए क्रिमिनल बनकर उभर रहे हैं। आंकड़ों से पता चला है कि जनसंख्या कम होने के बावजूद, नाबालिगों (माइनर्स) की ओर से किए गए अपराधों के मामले में दिल्ली अब देश में पांचवें स्थान पर आ गया है। वहीं मेट्रो शहरों से तुलना करें तो ये टॉप पर है। इसने उत्तर प्रदेश, बिहार और हरियाणा जैसे अधिक आबादी वाले राज्यों को भी पीछे छोड़ दिया है। NCRB ने यह भी बताया कि राजधानी के नाबालिग अब तेजी से संगठित अपराधों (organised crime) की ओर मुड़ रहे हैं।
➤राष्ट्रीय रैंकिंग में उछाल: साल 2022 में दिल्ली इस लिस्ट में छठे स्थान पर था, लेकिन 2023 में यह पाँचवें स्थान पर पहुंच गया।
➤मेट्रो शहरों में प्रथम: साल 2023 में, देश के 19 मेट्रो शहरों में किशोर अपराधों की संख्या में दिल्ली सबसे ऊपर रहा।
➤अपराध दर में शीर्ष पर: NCRB के आंकड़ों के अनुसार, किशोर अपराध की दर (प्रति लाख बच्चों पर अपराध) के मामले में दिल्ली 41.1% के साथ पूरे देश में शीर्ष पर है।
➤कुल मामलों में मामूली गिरावट: हालांकि, दिल्ली में कुल किशोर अपराधों की संख्या में मामूली कमी आई है— यह 2021 में 2,618 और 2022 में 2,336 से घटकर 2023 में 2,278 हो गई है।
पिछले साल पूरे भारत में नाबालिगों के किए 31,365 अपराध दर्ज हैं। राज्यों में, महाराष्ट्र में सबसे ज्यादा 3,970 मामले दर्ज हुए, जिसके बाद मध्य प्रदेश (3,619), तमिलनाडु (2,999) और राजस्थान (2,596) का स्थान रहा। NCRB के आंकड़ों से पता चलता है कि दिल्ली के नाबालिग इन अपराधों में शामिल थे:
➤हत्या: 102 मामले
➤हत्या का प्रयास: 147 मामले
➤चोट पहुंचाने के मामले: 298 मामले
➤चोरी: 903 मामले
➤लूटपाट (Robbery): 210 मामले
➤बलात्कार (Rape): 50 मामले
आंकड़ों के अनुसार, चोरी और लूटपाट अभी भी सबसे आम अपराध हैं, लेकिन दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि अब अपराध का पैटर्न (तरीका) बदल रहा है। एक वरिष्ठ दिल्ली पुलिस अधिकारी ने कहा, "पिछले तीन सालों में शहर में नाबालिगों के अपराध बहुत चिंताजनक हो गए हैं। पहले वे असंगठित तरीके से काम करते थे, और ज्यादातर चोरी और लूटपाट तक ही सीमित थे। लेकिन अब हम देख रहे हैं कि नाबालिग गिरोह बना रहे हैं और उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण दिल्ली में सक्रिय बड़े आपराधिक नेटवर्क के साथ मिलकर अपराध कर रहे हैं।"
साल 2023 में कुल 4,098 किशोरों को पकड़ा गया था। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों से पता चला है कि इन किशोरों की शिक्षा का स्तर कुछ इस प्रकार था:
| शिक्षा का स्तर | किशोरों की संख्या |
|---|---|
| पूरी तरह से अनपढ़ (कभी स्कूल नहीं गए) | 381 |
| प्राइमरी स्तर तक पढ़े (जल्दी स्कूल छोड़ा) | 995 |
| कक्षा 10 तक पढ़े (सबसे बड़ा समूह) | 1,432 |
| कक्षा 12 तक पढ़े | 246 |
| उच्च माध्यमिक (Higher Secondary) से आगे की पढ़ाई की | 44 |
अधिकारी ने कहा, "यह आंकड़ा रोचक है क्योंकि यह इस धारणा को तोड़ता है कि सभी अपराधी अनपढ़ होते हैं। वास्तव में, अधिकांश ने कक्षा 10 तक पढ़ाई की है और उसके बाद स्कूल छोड़ दिया।" NCRB के आंकड़ों से यह भी सामने आया कि पकड़े गए 2,640 किशोर अपने माता-पिता के साथ रहते थे, 334 अभिभावकों के साथ और केवल 124 बेघर थे।
अधिकारी ने आगे बताया, "ये आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ माता-पिता की उपस्थिति ही बच्चों को अपराध से नहीं रोकती। उत्तर-पूर्व और दक्षिण दिल्ली के कुछ हिस्सों में, अपराध में शामिल कई नाबालिग ऐसे परिवारों से आते हैं जहां माता-पिता साथ रहते हैं, लेकिन माताओं को घरेलू हिंसा का सामना करना पड़ता है—यह एक ऐसा माहौल है जिसे बच्चे बड़े होते हुए देखते हैं।" उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया पर बिना निगरानी की गतिविधि (Unmonitored social media activity) उन्हें आपराधिक प्रभावों की ओर धकेलती है।




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