कंबोडिया-चीन के ठगों को 2100 ई-सिम भेजने वाला मास्टरमाइंड गिरफ्तार, ऐसे होती थी ठगी
गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लोन ऐप के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है।

गुरुग्राम पुलिस की साइबर अपराध शाखा ने डिजिटल अरेस्ट और फर्जी लोन ऐप के जरिए करोड़ों की ठगी करने वाले एक अंतरराष्ट्रीय सिंडिकेट का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने इस मामले में गिरोह के मुख्य सदस्य 28 वर्षीय रजत को पश्चिम बंगाल से गिरफ्तार किया है। आरोपी भारतीय सिम कार्डों को ई-सिम (e-SIM) में बदलकर कंबोडिया और चीन में बैठे साइबर अपराधियों को सप्लाई करता था।
इस मामले की शुरुआत 28 अक्तूबर 2025 को हुई थी, जब एक व्यक्ति ने शिकायत दर्ज कराई कि खुद को NIA अधिकारी बताने वाले एक जालसाज ने वीडियो कॉल के जरिए उसे डराया। ठगों ने उसे डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर उसके बैंक खाते से लाखों रुपये ट्रांसफर करवा लिए थे। सहायक पुलिस आयुक्त (साइबर अपराध) प्रियांशु दीवान के नेतृत्व में निरीक्षक संदीप कुमार की टीम ने तकनीकी जांच के बाद आरोपी रजत को जिला अलीपुरद्वार, पश्चिम बंगाल से काबू किया। आरोपी रजत को 3 दिन की पुलिस रिमांड के बाद न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस अब कंबोडिया में बैठे मुख्य आकाओं और इस मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है।
ऐसे काम करता था सिंडिकेट
पुलिस पूछताछ में आरोपी रजत ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। आरोपी राजस्थान के अजमेर से फर्जी तरीके से खरीदे गए सिम कार्ड मंगवाता था। रजत एप्पल आईफोन के जरिए भौतिक सिम कार्ड को ई-सिम में बदलता था और टेलीग्राम के माध्यम से कंबोडिया में बैठे ठगों को QR कोड भेज देता था। प्रत्येक ई-सिम के बदले उसे 22 USDT (क्रिप्टो करेंसी) मिलते थे। उसने अब तक लगभग 2100 सिम कार्ड विदेश भेजे हैं। आरोपी ठगों के लिए एप्पल ऐप स्टोर और गूगल प्ले स्टोर पर फर्जी लोन ऐप रजिस्टर्ड करवाता था, जिसके लिए उसे 3000 रुपये प्रति ऐप मिलते थे।
बरामदगी और अब तक की गिरफ्तारियां
पुलिस ने आरोपी के पास से भारी मात्रा में इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए हैं। इनमें 87 जियो सिम कार्ड,42 मोबाइल फोन,एक लैपटॉप बरामद किया गया। इस हाई-टेक धोखाधड़ी के मामले में गुरुग्राम पुलिस अब तक कुल 08 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है, जो उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के निवासी हैं।
डिजिटल अरेस्ट से कैसे बचें
पुलिस ने जनता को चेतावनी दी है कि कोई भी सरकारी एजेंसी (CBI, ED, NIA या पुलिस) वीडियो कॉल के जरिए किसी को 'डिजिटल अरेस्ट' नहीं करती है। अनजान वीडियो कॉल पर निजी जानकारी साझा न करें। किसी भी संदिग्ध लोन ऐप को डाउनलोड करने से बचें।
अगर आप साइबर ठगी का शिकार होते हैं, तो तुरंत 1930 पर कॉल करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें।
रिपोर्ट- गौरव चौधरी




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