गली में खेल रही बच्ची चीखी तो भाग गया हैवान, कोर्ट में बोला- मदद कर रहा था; पोल खुलने पर हुई जेल
मामला अदालत पहुंचा, तो उसने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा- वह बच्ची को गिरने से बचा रहा था। लेकिन उसकी पोल खुल गई। यौन उत्पीड़न का मामला सही साबित हुआ और उसे 5 साल की जेल हुई।

राजधानी दिल्ली में बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे, तभी हैवान बनकर एक आदमी आया और बच्चों को गंदी नजर से देखने लगा। देखते ही देखते उसने 11 साल की बच्ची को हवस का शिकार बनाया। मामला अदालत पहुंचा, तो उसने अपनी सफाई पेश करते हुए कहा- वह बच्ची को गिरने से बचा रहा था। लेकिन उसकी पोल खुल गई। यौन उत्पीड़न का मामला सही साबित हुआ। अदालत ने गहरी चिंता जताते हुए कहा- हम एक समाज के रूप में अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह विफल हो रहे हैं। जानें दोषी के सलाखों के पीछे जाने की दास्तां।
बच्ची चीखी तो भाग गया हैवान…
घटना तीन अप्रैल 2026 की रात निहाल विहार इलाके की है। अभियोजन के मुताबिक, पीड़िता अपने भाई और सहेली के साथ अपने घर के बाहर खेल रही थी। तभी दोषी ने उसे अपनी हवस का शिकार बनाया। बच्ची के शोर मचाने पर आरोपी वहां से भाग गया। बच्ची ने तुरंत घर जाकर अपनी दादी को घटना बताई। कानूनी लड़ाई में घर के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज सबसे निर्णायक साबित हुई।
कोर्ट में दी सफाई- ‘मदद कर रहा था’
सुनवाई के दौरान आरोपी के वकील ने दलील दी कि बारिश के कारण जमीन गीली होने की वजह से बच्ची फिसल रही थी और आरोपी ने उसे गिरने से बचाने के लिए हाथ लगाया था। हालांकि, अदालत ने इस तर्क को सिरे से खारिज कर दिया। अदालत ने गौर किया कि सीसीटीवी फुटेज में बच्ची के फिसलने का कोई संकेत नहीं था, बल्कि आरोपी की हरकत जानबूझकर की गई यौन प्रताड़ना थी।
अदालत में ऐसे खुली पोल, फिर हुई जेल
अदालत ने आदेश में फुटेज का जिक्र करते हुए कहा कि शुरुआत में बच्चे खेलते हुए हंसते नजर आते हैं, जो किसी के चेहरे पर मुस्कान ला सकता है, लेकिन अगले ही पल आरोपी बच्ची पर यौन इरादे से हमला करता है और वही दृश्य दर्द एवं आक्रोश में बदल जाता है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि मौखिक गवाह भले ही अपने बयानों से बदल सकते हैं, लेकिन डिजिटल साक्ष्य विश्वसनीय होते हैं। एफएसएल रिपोर्ट ने भी पुष्टि की कि सीसीटीवी फुटेज के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई थी।
बच्चों को सुरक्षित माहौल देने में फेल हो रहा समाज
राजधानी में बच्चों की सुरक्षा को लेकर अदालत ने गहरी चिंता जाहिर की है। तीस हजारी अदालत ने 11 साल की बच्ची से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी को सजा सुनाते हुए कहा कि आज हालात ऐसे हो गए हैं कि बच्चे अपने घर के बाहर भी सुरक्षित नहीं हैं। यह दर्शाता है कि हम एक समाज के रूप में अपनी आने वाली पीढ़ी को सुरक्षित माहौल देने में पूरी तरह विफल हो रहे हैं।
5 साल के कठोर कारावास की सजा
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश बबीता पुनिया की अदालत ने मामले में पॉक्सो अधिनियम की धारा दस और बीएनएस की धारा 74 के तहत दोषी ठहराए गए धर्मेंद्र को पांच साल के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। अदालत ने आदेश में कहा कि यह केवल एक बच्ची के खिलाफ अपराध नहीं, बल्कि बचपन की गरिमा और समाज के मूल्यों पर गंभीर हमला है।
14 दिन के भीतर आया फैसला
अदालत ने त्वरित न्याय की मिसाल पेश करते हुए जांच अधिकारी सब-इंस्पेक्टर पूजा चंदेल द्वारा 24 अप्रैल को आरोपपत्र दाखिल किए जाने के महज 14 दिन के भीतर सजा पर फैसला सुनाया है। पीड़िता के पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए अदालत ने तीन लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश भी दिया।
बीवी-बच्चों का हवाला देकर मांगी नरमी, लेकिन…
सुनवाई के दौरान दोषी ने खुद को पहली बार अपराध करने वाला बताते हुए अपनी कम उम्र, पत्नी और दो छोटे बच्चों की जिम्मेदारी का हवाला देकर सजा में नरमी की मांग की थी। हालांकि, अदालत ने इसे खारिज करते हुए कहा कि अपराध करते समय उसे अपने परिवार की जिम्मेदारियों का एहसास होना चाहिए था। इसलिए अब यह तर्क राहत का आधार नहीं बन सकता। अदालत ने माना कि दोषी और मासूम पीड़िता की उम्र में 14 साल का बड़ा अंतर इस अपराध को और भी गंभीर बना देता है।




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