तीन साल की बच्ची को प्राइवेट पार्ट छूने के लिए किया मजबूर, दिल्ली HC ने कहा- गंभीर अपराध
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि यदि कोई शख्स गलत इरादे से किसी नाबालिग बच्चे को अपने प्राइवेट पार्ट को छूने के लिए मजबूर करता है, तो यह 'पॉक्सो एक्ट' (POCSO Act) के तहत गंभीर यौन हमला माना जाएगा।

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में साफ किया है कि यदि कोई शख्स गलत इरादे से किसी नाबालिग बच्चे को अपने प्राइवेट पार्ट को छूने के लिए मजबूर करता है, तो यह 'पॉक्सो एक्ट' (POCSO Act) के तहत गंभीर यौन हमला माना जाएगा। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा ने यह फैसला एक शख्स की सजा को बरकरार रखते हुए सुनाया, जिस पर तीन साल की बच्ची के साथ यौन शोषण करने का आरोप था। कोर्ट ने कहा कि छोटे बच्चे के साथ ऐसी हरकत करना पॉक्सो एक्ट की धारा 10 के तहत एक गंभीर अपराध है।
बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, यह मामला साल 2022 का है, जब एक तीन साल की बच्ची ने अपनी मां को बताया कि उनके घर में रहने वाले एक किराएदार ने उसे अपने निजी अंग दिखाए और उसे छूने पर मजबूर किया। इसके बाद मां ने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी। निचली अदालत ने पहले ही आरोपी को दोषी मानते हुए सात साल की जेल की सजा सुनाई थी, जिसे आरोपी ने हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। आरोपी का तर्क था कि बच्ची के बयानों में बदलाव आया है, इसलिए उस पर भरोसा नहीं किया जा सकता।
आरोपी ने तर्क दिया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान, बच्ची ने पहले कहा था कि उसने उसे अनुचित तरीके से छुआ था, लेकिन बाद में उसने अपने बयान को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करते हुए दावा किया कि उसने अपना प्राइवेट पार्ट अंदर डाला था। याचिकाकर्ता ने तर्क दिया कि इस तरह की विसंगतियों के कारण बच्ची के बयान अविश्वसनीय हो जाते हैं।
अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया और कहा कि नाबालिग की कम उम्र को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी पाया कि बच्ची द्वारा बताई गई बातों के संबंध में मां की गवाही आरोपी के खिलाफ पीड़ित बच्ची के आरोपों का समर्थन करती है। इसके अलावा, पुलिस को दिए गए एक बयान में भी बच्ची ने बताया था कि आरोपी ने उसके प्राइवेट पार्ट को अपने लिंग से छुआ था।




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