kissa dilli ka Delhi Lallimal Ki Haveli A 200-Year-Old Marvel with a Natural AC System किस्सा दिल्ली का: बेहद खास है दिल्ली की 'लल्लीमल की हवेली', 200 साल पुराना AC सिस्टम है यहां!, Ncr Hindi News - Hindustan
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किस्सा दिल्ली का: बेहद खास है दिल्ली की 'लल्लीमल की हवेली', 200 साल पुराना AC सिस्टम है यहां!

Kissa Dilli Ka Part-2: 'किस्सा दिल्ली का' सीरीज के पार्ट-2 में आज हम पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में स्थित 'लल्लीमल की हवेली' की कहानी बता रहे हैं। ये हवेली करीब 200 साल पुरानी है।

Sat, 2 Aug 2025 11:56 AMAnubhav Shakya लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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किस्सा दिल्ली का: बेहद खास है दिल्ली की 'लल्लीमल की हवेली', 200 साल पुराना AC सिस्टम है यहां!

राजधानी दिल्ली की गलियों में कई ऐसी इमारते हैं, जो बेहद खास और रोचक इतिहास समेटे हुए हैं। इन्हीं में से एक है 'लल्लीमल की हवेली'। पुरानी दिल्ली की तंग गलियों में बसी लल्लीमल की हवेली सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि इतिहास का एक जीवंत पन्ना है। चांदनी चौक के सीताराम बाजार में स्थित यह हवेली 200 साल पुरानी है और अपने अनूठे वास्तुशिल्प और पुराने AC सिस्टम के लिए जानी जाती है।

किसके नाम पर है हवेली का नाम?

लाला लल्लीमल 19वीं सदी के एक मशहूर व्यापारी थे, जिनका हार्डवेयर का कारोबार दिल्ली से लेकर कराची तक फैला था। उनकी समृद्धि का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने इस हवेली के निर्माण में विदेशों से सामग्री मंगवाई थी। लंदन से आई टीन की चादरें और नायाब पत्थर आज भी इस हवेली की दीवारों पर गर्व से खड़े हैं। लल्लीमल का परिवार दिल्ली के बड़े कारोबारियों में शुमार था और यह हवेली उनकी समृद्धि का प्रतीक थी।

200 साल पुराना AC सिस्टम

लल्लीमल की हवेली की सबसे खास बात है इसका प्राकृतिक शीतलन तंत्र, जो आज के आधुनिक एयर कंडीशनरों से पहले का एक अनोखा उदाहरण है। हवेली की मोटी दीवारें, ऊंची छतें, और रणनीतिक रूप से बनाए गए रोशनदान हवा के प्रवाह को इस तरह नियंत्रित करते हैं कि गर्मियों में भी अंदर का तापमान संतुलित रहता है। दीवारों में चूने और खास तरह के पलस्तर का उपयोग किया गया, जो नमी को नियंत्रित करता है और गर्मी को बाहर रखता है। यह प्रणाली न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि 200 साल बाद भी प्रभावी है।

बेहद खास है नक्काशी

हवेली का आकार भले ही विशाल न हो, लेकिन इसकी वास्तुकला हर किसी को आकर्षित करती है। प्रवेश द्वार पर बारीक नक्काशी, जटिल जालियां और पुराने जमाने के लकड़ी के दरवाजे मुगल और राजपूत शैली का मिश्रण दर्शाते हैं। हवेली की दीवारें कराची के व्यापारिक रिश्तों की कहानी भी बयां करती हैं, क्योंकि वहां से मंगाए गए पत्थरों का इस्तेमाल निर्माण में हुआ था। आज भी ये दीवारें उसी मजबूती के साथ खड़ी हैं, जैसे दो सदी पहले थीं।

समय के साथ कई बदलाव

लल्लीमल की हवेली ने समय की कई मार झेली है। पुरानी दिल्ली की कई हवेलियां जर्जर हो चुकी हैं, लेकिन यह हवेली अपने मूल स्वरूप को काफी हद तक बरकरार रखे हुए है। इसके रखरखाव में उन कारीगरों की मदद ली गई, जो पारंपरिक निर्माण तकनीकों के जानकार हैं। हवेली की टीन की चादरें और पत्थर आज भी उसी तरह चमकते हैं, जैसे पहले दिन। हालांकि, शहरीकरण और आधुनिकता की दौड़ में इस हवेली को संरक्षित रखना एक बड़ी चुनौती है।

आज भी जीवंत है लल्लीमल की कहानी

लल्लीमल की हवेली सिर्फ एक इमारत नहीं, बल्कि पुरानी दिल्ली की सांस्कृतिक धरोहर का हिस्सा है। यह हवेली उन गुमनाम कहानियों को जीवित रखती है, जो चांदनी चौक की गलियों में बिखरी पड़ी हैं। अगर आप पुरानी दिल्ली की सैर पर हैं, तो सीताराम बाजार की इस हवेली को जरूर देखें। यह न केवल इतिहास की सैर कराएगी, बल्कि आपको उस दौर की इंजीनियरिंग और समृद्धि का भी गवाह बनाएगी।

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