JNU की छवि बिगाड़ने का प्रयास; स्टूडेंट पर सख्ती से भड़का टीचर्स एसोसिएशन
जेएनयू परिसर में पीएम मोदी और गृह मंत्री शाह के खिलाफ आपत्तिजनक नारेबाजी पर दिल्ली पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। वहीं जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के कदम को जेएनयू को बदनाम करने की साजिश बताया है।

जेएनयू परिसर में प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाए जाने की घटना को लेकर दिल्ली पुलिस ने FIR दर्ज कर ली है। जेएनयू प्रशासन की ओर से इस बारे में लेटर लिखा गया था। जेएनयू प्रशासन का कहना है कि किसी भी गैरकानूनी आचरण या राष्ट्रविरोधी गतिविधि को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आरोपी स्टूडेंट्स के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। आरोपी छात्रों पर सख्ती को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन के कदम पर JNU टीचर्स एसोसिएशन ने कड़ा ऐतराज जताया है।
यह कदम लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करने जैसा
JNU टीचर्स एसोसिएशन ने नारेबाजी करने वाले छात्रों पर कार्रवाई के बाद बयान जारी किया है। इस बयान में जेएनयू टीचर्स एसोसिएशन ने छात्रों पर FIR को बेतुका करार देते हुए आरोप लगाया है कि यह जेएनयू को बदनाम करने की एक बड़ी कोशिश का हिस्सा है। यह कदम पिछली कंट्रोवर्सी जैसा ही है। इसका मकसद विरोध को दबाना और जेएनयू के लोकतांत्रिक मूल्यों को कमजोर करना है।
2020 के कृत्य की यादें ताजा
टीचर्स बाॅडी का कहना है कि JNU प्रशासन और दिल्ली पुलिस वही हैं जो छह साल पहले हिंसा के साफ तौर पर आपराधिक कृत्य को रोकने में नाकाम रहे थे। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस के बीच हालिया कम्युनिकेशन साफ तौर पर 2020 के कृत्य की यादें ताजा करता है। इसमें जानबूझ कर यूनिवर्सिटी को बदनाम करने और उसकी छवि खराब करने के लिए हालात बनाए गए थे।इसमें मीडिया के कुछ हिस्सों ने भी अभियान चलाया था।
लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करना
टीचर्स एसोसिएशन ने कहा है कि साल 2020 की तरह इस बार भी सच्चाई को नजरअंदाज कर दिया गया है। इस ड्रामे का मकसद सभी विरोध प्रदर्शनों को दबाना और यूनिवर्सिटी के लोकतांत्रिक मूल्यों को खत्म करना है जो एक सार्वजनिक संस्थान के तौर पर इसकी सफलता की नींव रहे हैं।
देश विरोधी गतिविधि बर्दाश्त नहीं- विश्वविद्यालय प्रशासन
टीचर्स बॉडी का यह बयान ऐसे वक्त में सामने आया है जब एक दिन पहले ही जेएनयू प्रशासन ने नारेबाजी की निंदा करते हुए कहा था कि यूनिवर्सिटी को नफरत की प्रयोगशाला में बदलने की इजाजत नहीं दी जा सकती है। अभिव्यक्ति की आजादी एक मौलिक अधिकार है लेकिन गैर-कानूनी हरकत या देश विरोधी गतिविधि बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन ने यह भी कहा था कि आरोपी छात्रों को सस्पेंड किया जा सकता है या उनको यूनिवर्सिटी से ही निकाला जा सकता है।
2020 को क्या हुआ था?
उल्लेखनीय है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय परिसर में 5 जनवरी 2020 को भीषण हिंसा हुई थी। इस हिंसा नकाबपोश भीड़ ने लाठियों और लोहे की छड़ों से लैस होकर तीन हॉस्टलों में घुसकर छात्रों पर हमला किया था। करीब दो घंटे तक चले इस हंगामे में हमलावरों ने खिड़कियां, फर्नीचर और छात्रों का सामान तोड़ दिए थे। इसमें कई छात्र घायल हो गए थे। अब जेएनयू एकबार फिर चर्चा में है। हाल ही में जेएनयू में हुई नारेबाजी की घटना चर्चा का विषय बन गई है।




साइन इन