ईरान-इजरायल की जंग से 4000 KM दूर गाजियाबाद-नोएडा में क्यों टेंशन, किन पर ज्यादा असर
इजरायल-अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों से छिड़े ईरान के युद्ध का असर करीब 4000 किलोमीटर (हवा में दूरी) यूपी के गाजियाबाद और नोएडा में भी शुरू हो गया है। युद्ध का दायरा बढ़ने से नोएडा-गाजियाबाद के उद्यमियों को चिंता सताने लगी है।

इजरायल-अमेरिका और अन्य खाड़ी देशों से छिड़े ईरान के युद्ध का असर करीब 4000 किलोमीटर (हवा में दूरी) यूपी के गाजियाबाद और नोएडा में भी शुरू हो गया है। युद्ध का दायरा बढ़ने से नोएडा-गाजियाबाद के उद्यमियों को चिंता सताने लगी है। उद्यमियों का कहना है कि युद्ध लंबा खिंचने से निर्यात पर असर पड़ेगा। साथ ही आयात होने वाले पेट्रोलियम पदार्थों की कीमत में भी उछाल आएगा। वहीं, कई निर्यातकों के ऑर्डर बीच में अटक गए हैं।
गाजियाबाद औद्योगिक नगरी है, जिसमें 28 औद्योगिक क्षेत्र है। यहां सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग (एमएसएमई) की छोटी-बड़ी एक लाख से औद्योगिक इकाइयां जिला उद्योग केंद्र में पंजीकृत हैं। जबकि इसमें 45 हजार से अधिक मैन्यूफैक्चरिंग इकाइयां संचालित हैं। जनपद इंजीनियरिंग सामान के निर्माण के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां सालाना करीब 22 हजार करोड़ रुपये का निर्यात होता है। निर्यातक बताते हैं कि मध्य पूर्वी देशों से एक हजार से लेकर 1,500 करोड़ से अधिक का निर्यात होता है। इसके अलावा वहां से पेट्रोलियम पदार्थों का आयात किया जाता है। यदि इसी तरह युद्ध जारी रहा और मध्य पूर्व के देशों में इसका विस्तार होता रहा, तो कारोबार पूरी तरह प्रभावित होगा।
उत्पादों की कीमत बढ़ने की चिंता
विश्व के देशों में जंग छिड़ने से नोएडा के उद्यमी और व्यापारियों की दिक्कतें बढ़ने लगी हैं। उन्हें निर्यात प्रभावित होने के कच्चे माल के दाम बढ़ने की चिंता सताने लगी है। नोएडा के उद्यमी ईरान में कपड़े, ऑटो पाटर्स और लेदर आदि उत्पादों का निर्यात करते हैं।अब उन्हें ईरान का अमेरिका और इजराल से युद्ध होने के बाद कारोबार पूरी तरह प्रभावित होने का डर सताने लगा है। फेस-दो के उद्यमी राजीव गोयल ने बताया कि ईरान के साथ भारत के घनिष्ठ संबंध हैं। दोनों देशों के बीच अच्छा कारोबार होता आ रहा है। जिले से भी हर महीने करोड़ों रुपये के परिधान का निर्यात किया जाता है। अब एकाएक ईरान पर हमला होने से निर्यात फंस गया है। यह भी डर सता रहा है कि पूर्व में दिए गए ऑर्डर का भुगतान होगा या नहीं। वहीं, कारोबारी रमेश गोयल ने बताया कि सूखे मेवे का सबसे ज्यादा आयात ईरान से होता है।
किन कंपनियों पर होगा ज्यादा असर
उद्यमी दीपक शर्मा बताते हैं कि गाजियाबाद से इंजीनियरिंग और मशीनरी गुड्स का निर्यात होता है। इसके अलावा परिधान, रेडीमेड गारमेंट, टेक्सटाइल, हर्बल, ऑटोमोबाइल स्पेयर पार्ट्स, दवाइयां, मसीनरी पार्ट्स, लिफ्ट और फर्निशिंग शामिल है। फोर्जिंग इकाइयों द्वारा रोल, गियर, शाफ्ट आदि का भी निर्यात होता है। आईआईए के मंडल अध्यक्ष राकेश अनेजा ने कहा कि यदि युद्ध लंबा चला तो गाजियाबाद से होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। इससे उद्यमियों को नुकसान हो सकता है। आईआईए के राष्ट्रीय सचिव प्रदीप कुमार गुप्ता ने कहा कि युद्ध से उद्यमियों को चिंता सता रही है। इसका दायरा मध्य पूर्वी देशों में बढ़ रहा है। ऐसे में गाजियाबाद के कारोबारियों पर भी असर पड़ेगा।
कुरियर से भेजे बिल दुबई में अटके
गाजियाबाद के एक व्यापारी के मुताबिक उनकी मशीनरी के पार्ट मिडिल ईस्ट के देशों में भेजे गए हैं। सामान के बिल कोरियर कंपनी से भेजे गए हैं। कुरियर कंपनी का पैकेट दुबई में फंस गया है। हवाई अड्डे बंद होने से उनके उनके बिना बीच में अटके हैं। अब उनका माल पहले पहुंच जाएगा और बिल बाद में। बगैर बिल के कंपनी माल नहीं ले पाएगी और उनके भुगतना भी फंस गया है। मशीनरी की कीमत करोड़ों रुपये में हैं।
मालिक से मजदूर तक सब होंगे प्रभावित
जानकारों के मुताबिक यदि युद्ध लंबा चला तो भारत पर इसका बड़ा असर होगा। गाजियाबाद और नोएडा जैसे शहरों में औद्योगिक इकायों के मालिकों से लेकर मजदूर तक प्रभावित होंगे। यदि मांग में कमी आई तो उत्पादन घटाना होगा और ऐसा होने पर बहुत से अस्थायी श्रमिकों-मजदूरों के रोजगार पर भी संकट पैदा होगा।




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