बशर्ते ऊपरवाला दखल ना दे; जगदीप धनखड़ का 11 दिन पहले तक अलग ही था इरादा
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अचानक अपने पद से इस्तीफे का ऐलान करके सबको चौंका दिया। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया।
उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार शाम अचानक अपने पद से इस्तीफे का ऐलान करके सबको चौंका दिया। स्वास्थ्य कारणों का हवाला देकर उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा भेज दिया। हालांकि, महज 11 दिन पहले जब उनके सामने रिटायरमेंट का एक प्रश्न आया तो उनका जवाब पूरी तरह अलग था। दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में उन्होंने कहा था कि यदि ऊपरवाले का दखल नहीं हुआ तो वह 2027 तक अपने पद पर बने रहेंगे।
जगदीप धनखड़ के इस्तीफे के बाद उनका 11 दिन पुराना बयान काफी वायरल हो रहा है। 10 जुलाई को नई दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय ज्ञान परंपरा पर पहले वार्षिक शैक्षणिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा था, ‘मैं सही समय पर रिटायर हूंगा, अगस्त 2027 में, बशर्ते ऊपरवाले (आसमान की ओर इशारा करते हुए) का दखल ना हो।’ धनखड़ का 14वें उपराष्ट्रपति के रूप में पांच साल का कार्यकाल 10 अगस्त, 2027 को समाप्त होने वाला था।
अब उनका यह बयान सोशल मीडिया पर कई लोग वायरल करते हुए सवाल उठा रहे हैं कि आखिर उनका इरादा इतनी जल्दी कैसे बदल गया। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों के नेताओं ने भी धनखड़ की ओर से इस्तीफे में दी गई दलील को स्वीकार नहीं किया है। इस्तीफे के पीछे किसी और वजह की आशंका जाहिर करते हुए सरकार से जवाब मांगा जा रहा है।
74 साल के धनखड़ अगस्त 2022 में उपराष्ट्रपति के पद पर आसीन हुए थे। उपराष्ट्रपति बनने से पहले वह पश्चिम बंगाल के गवर्नर रहे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से टकराव की वजह से वह काफी सुर्खियों में रहते थे।




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