मां-बाप को क्यों मांगनी पड़ी बेटे के लिए इच्छामृत्यु, हरीश राणा के पिता ने रोते हुए कहा- अब मुक्ति चाहते हैं
जिंदा होते हुए भी मरणासन्न अवस्था में एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए इच्छा मृत्यु को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से हरीश राणा के माता-पिता बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे थे और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था।

अपनी संतान के लिए मौत मांगना कितना दर्दनाक होता है यह 31 साल के हरीश राणा के बूढ़े पिता के आंसू ही बता सकते हैं। जिस बेटे को उन्होंने इतने लाड-प्यार से पाला, इंजीनियरिंग कॉलेज की दहलीज तक पहुंचाया। बेटा भी टॉपर बनकर ऊंची उड़ान को तैयार था, पर एक हादसे ने उसे इस हाल में पहुंचा दिया कि मां-बाप ही बेटे के लिए इच्छा मृत्यु मांगने को मजबूर हो गए। हरीश के पिता ने कहा कि अब वह बेटे को दर्द से मुक्ति दिलाना चाहते हैं, जो 13 साल से बिस्तर पर है और उसके ठीक होने की सभी उम्मीदें खत्म हो चुकी हैं।
जिंदा होते हुए भी मरणासन्न अवस्था में एक दशक से अधिक समय बिताने के बाद आज सुप्रीम कोर्ट ने गाजियाबाद के हरीश राणा के लिए 'पैसिव यूथेनेशिया' (निष्क्रिय इच्छामृत्यु) को मंजूरी दे दी है। लंबे समय से हरीश राणा के माता-पिता बेटे के लिए इच्छा मृत्यु की मांग कर रहे थे और मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन था। बुधवार को जब कोर्ट ने उनकी अर्जी को मंजूरी दी तो पूरी सोसाइटी में माहौल गमगीन बना हुआ है। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने यह फैसला सुनाया, जो न्यायालय के 2018 के 'कॉमन कॉज' निर्णय (जिसे 2023 में संशोधित किया गया था) पर आधारित है, जिसमें गरिमा के साथ मरने को मौलिक अधिकार के रूप में मान्यता दी गई थी।
हरीश के पिता ने कहा- हम चाहते हैं बेटे को अब मुक्ति मिले
हरीश के पिता अशोक राणा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर आभार जताया। साथ ही कहा कि इस फैसले से भारत में हजारों ऐसे लोगों को दर्दनाक जीवन से मुक्ति मिलेगी, जो हरीश जैसा जीवन जी रहे हैं। उन्होंने कहा कि मैं और मेरी पत्नी बूढ़े हो रहे हैं। पूरा परिवार लंबे समय से हरीश की सेवा कर रहा है, मगर हम चाहते हैं कि हमारे बेटे को इस दर्द से मुक्ति मिले। हमने न्यायालय का रुख तब किया जब हमें एहसास हुआ कि हमारे बेटे की स्थिति असाध्य और लाइलाज है। जैसा कि आप कल्पना कर सकते हैं, यह हमारे परिवार के लिए एक बहुत ही कठिन निर्णय है, लेकिन हम हरीश के सर्वोत्तम हित में काम करना चाहते हैं।
इस तरह शरीर का त्याग करेगा हरीश
अशोक राणा ने बताया कि डॉक्टरों की निगरानी में हरीश को एम्स ले जाया जाएगा। जहां दक्ष डॉक्टरों की निगरानी में उसका फूड पाइप निकाल जाएगा। फिर पानी के सहारे उसको रखा जाएगा और जब प्रभु इच्छा से जब हरीश प्राण त्याग देगा तो हरीश के पार्थिव शरीर को गाजियाबाद लाकर सम्मान से उसका अंतिम संस्कार करेंगे।
पिता ने कहा टॉपर था मेरा बेटा
हरीश के पिता अपनी बात कहते हुए कई बार भावुक हो गए। इस दौरान उन्होंने हरीश के विद्यार्थी जीवन को भी याद किया और बताया कि उनका बेटा हरीश चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था। वह टॉपर था। 20 अगस्त 2013 को उसके साथ हादसा हुआ ।
हरीश के अलावा एक बेटा और एक बेटी
हरीश के पिता ने बताया कि परिवार में पति-पत्नी के अलावा उनके दो बेटे और एक बेटी है। बेटी की शादी हो चुकी है। छोटा बेटा भी परिवार के साथ मिलकर हरीश की सेवा करता है।
5 साल से राज अंपायर में रह रहे हैं
स्थानीय निवासियों ने बताया कि अशोक राणा का परिवार यहां करीब पांच साल से राज नगर एक्सटेंशन की सोसाइटी राज अंपायर रहता है। उनके दो बेटे और एक बेटी है। हरीश राणा सबसे बड़े बेटे थे, जो वर्ष 2013 से कोमा में है। अशोक राणा शेफ हैं। इसके साथ हुए हादसे से पहले वह मुंबई के ताज होटल में शेफ का काम करते थे।




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