सबको माफ करते जाओ; 'इच्छामृत्यु' के लिए जाते हुए हरीश राणा का वीडियो रुला देगा
सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'इच्छा मृत्यु' की इजाजत दिए जाने के बाद गाजियाबाद के हरीश राणा को आखिरी विदाई दी गई। हरीश राणा का लाइफ सपोर्ट सिस्टम हटाकर उन्हें विदा करने की तैयारी की गई। इसी से जुड़ा एक वीडियो सामने आया है जो बेहद भावुक करने वाला है।

सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ हरीश। इन्हीं चंद लाइनों के साथ ब्रह्माकुमारी ने इच्छामृत्यु (एम्स) की यात्रा पर जाने से पहले हरीश राणा को परिवार के साथ अंतिम विदाई दी। ब्रह्माकुमारी ने हरीश के जाने से पहले घर में राजयोग कराया। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल भी हो रहा है।
राजनगर एक्सटेंशन की राज एंपायर सोसाइटी में रहने वाले हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु की अनुमति दी है। इसकी प्रक्रिया पूरी करने के लिए दिल्ली के एम्स जाने से पहले ब्रह्माकुमारी बहनें हरीश राणा से मिलने पहुंची थीं। मोहननगर स्थित ब्रह्माकुमारीज राजयोग मेडिटेशन केंद्र की संचालिका बीके लवली दीदी ने बताया कि राजनगर एक्सटेंशन स्थित केंद्र की ब्रह्माकुमारी बहनें हरीश राणा के घर गई थीं। हरीश के अस्पताल रवाना होने से पहले उनके घर में राजयोग मेडिटेशन कराया गया।
बहनों ने परमात्मा को याद करते हुए हरीश की आत्मा को शक्ति देने के लिए यह योग कराया गया। इस दौरान ब्रह्माकुमारी ने कहा कि जाओ हरीश, वक्त आ गया। तुम्हारी तकलीफों के बस कुछ पल और बचे हैं। 2013 में जब तुम चंडीगढ़ में सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहे थे, चौथी मंजिल से गिर गए। इसके बाद से तुम बिस्तर पर ही पड़े हो। तुम्हारे शरीर और दिमाग ने काम करना बंद कर दिया, लेकिन तब भी माता-पिता के लिए तुम ही सब कुछ रहे। उन्होंने 13 साल तक तुम्हारी सेवा की। प्यारे हरीश, सुप्रीम कोर्ट ने तुम्हारी इच्छामृत्यु की याचिका को स्वीकृति दे दी है।
अब तुम्हारा लाइफ सपोर्ट सिस्टम एक-एक कर हटा दिया जाएगा और तुमको कष्टों से मुक्ति मिल जाएगी। तुम्हारे माता-पिता के लिए आज का दिन बहुत विचलित करनेवाला दिन हैं। तुम न बोल सकते थे, न हंस सकते थे। फिर भी उनके लिए सब कुछ थे। तुम्हारा होना ही उनके लिए खुशी थी, सुकून था, जीवन था, तुम्हारे जाने के खालीपन का वो कैसे मुकाबला करेंगे, ये सोचकर मेरा मन भी भारी हो रहा है। फिर भी, जाओ हरीश! सबको माफ करते हुए, सबसे माफी मांगते हुए जाओ हरीश। ब्रह्माकुमारी लवली दीदी ने बताया कि इसी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर लोग साझा कर रहे हैं। यह काफी मुश्किल भरा क्षण था। इसीलिए लोग भी भावुक हो रहे हैं।
माउंट आबू स्थित मधुबन भी गए थे हरीश
हरीश का जुड़ाव ब्रह्माकुमारीज केंद्र से काफी पुराना रहा है। करीब दो दशक से उनका परिवार केंद्र से जुड़ा हुआ है। ब्रह्माकुमारी लवली दीदी ने बताया कि हरीश जब ठीक थे तो माता-पिता के साथ माउंट आबू स्थित ब्रह्माकुमारीज के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय मधुबन भी गए थे। ऐसे में हरीश के इच्छामृत्यु के लिए जाने से पहले भी उन्हें ब्रह्माकुमारी ने मिलकर मजबूत किया। उनके लिए ईश्वर से कामना की गई।
पिता हर रोज ध्यान लगाने जाते थे
ब्रह्माकुमारी ने बताया कि हरीश के पिता अशोक राणा रोजाना केंद्र में सुबह के समय आकर योग साधना के सत्र में शामिल होते हैं। एक घंटे ध्यान लगाकर वह बाकी बचे 23 घंटों के लिए खुद को तैयार करते थे, क्योंकि बेटे की स्थिति को देखते हुए उनके लिए हर दिन चुनौती और दुखों से भरा होता है। शायद ही कोई दिन ऐसा बीता हो, जिस दिन अशोक ने केंद्र में आकर ध्यान न लगाया हो। यही वजह है कि इतने लंबे अरसे तक कष्ट सहने के बाद भी वह भगवान को धन्यवाद कह रहे हैं।




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