'अंदर 1.25 करोड़ की टॉयलेट सीट लगी हैं'... दिल्ली सरकार में मंत्री सिरसा ने 'शीशमहल' पर केजरीवाल को घेरा
'शीश महल' का मुद्दा भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक था और इसे फरवरी 2025 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की हार के कारणों में भी गिना जाता है। भाजपा मुख्यमंत्री रहने के दौरान केजरीवाल के आधिकारिक आवास रहे बंगले को 'शीशमहल' कहती रही है।

दिल्ली के मंत्री प्रवेश साहिब सिंह द्वारा पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आधिकारिक आवास रहे बंगले का वीडियो सार्वजनिक करने के बाद अब मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने भी निशाना साधा है। सिरसा ने एक इंटरव्यू के दौरान घर में रखे सामान का रेट बताकर आम आदमी पार्टी और केजरीवाल को घेरने की कोशिश की है।
सिरसा ने इंटरव्यू में आरोप लगाया कि ‘मैं बता सकता हूं कि उसके अंदर 1.25 करोड़ रुपये की टॉयलेट सीट लगी हैं, 10-10 लाख रुपये की टोटो की टॉयलेट सीट। एक-एक पर्दा 8 लाख रुपये का लगा है जो रिमोट के साथ चलता है।’

उन्होंने आगे कहा ‘जब आप कोविड में तड़प रहे थे और ऑक्सीजन के लिए मर रहे थे तब अरविंद केजरीवाल जी ये शीशमहल बना रहे थे। केजरीवाल के कसरत करने वाले कमरे (जिम) में एक-एक मशीन 20 से 25 रुपये की है। प्राइवेट स्पा जिसमें 25 से 30 लाख रुपये का टब लगा है जो कि सिर्फ 7-स्टार होटलों में होता है।’
एक्स हैंडल पर इंटरव्यू वीडियो शेयर किया
खाद्य व आपूर्ति मंत्री ने खुद अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर इंटरव्यू वीडियो शेयर किया है। उन्होंने वीडियो शेयर कैप्शन में लिखा कि ‘जनता का पैसा लूटकर अपने लिए शीशमहल खड़ा करने वाले केजरीवाल जी का यह महल किसी भी 7-स्टार होटल से कम नहीं है। जब कोरोना के दौरान दिल्लीवासी ऑक्सीजन की कमी से तड़प रहे थे, तब केजरीवाल जी अपना शीशमहल चमका रहे थे। यह सिर्फ एक महल नहीं, केजरीवाल जी के भ्रष्टाचार का चमकदार प्रतीक है।’
हार के कारणों में भी गिना जाता है बंगला
आपको बता दें कि 'शीश महल' का मुद्दा भाजपा के प्रमुख चुनावी मुद्दों में से एक था और इसे फरवरी 2025 के विधानसभा चुनावों में आम आदमी पार्टी की हार के कारणों में भी गिना जाता है। भाजपा मुख्यमंत्री रहने के दौरान केजरीवाल के आधिकारिक आवास रहे बंगले को 'शीशमहल' कहती रही है।
कैग रिपोर्ट भी पेश हुई
हाल में दिल्ली विधानसभा में पेश हुई कैग रिपोर्ट में केजरीवाल के आधिकारिक आवास रहे बंगले के नवीनीकरण पर बड़े सवाल उठे। बंगले के नवीनीकरण में हुई विभिन्न अनियमितताओं को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट विधानसभा में पेश की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया है कि नवीनीकरण की अनुमानित लागत लगभग 8 करोड़ रुपये थी, लेकिन इसका काम 33.66 करोड़ रुपये की लागत से पूरा हुआ। यानी काम की लागत अनुमान से 342 फीसदी ज्यादा थी। सीएजी रिपोर्ट में नियमों की अनदेखी, फंड के गलत इस्तेमाल और लागत में बढ़ोतरी की बातें सामने आई हैं।
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