डेढ़ घंटे तक फंसे रहे, सोफे तक पहुंच गई आग; दिल्ली के विवेक विहार अग्नकांड में बचे लोगों ने क्या बताया
दिल्ली के शाहदरा के विवेक विहार इलाके में चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग में नौ लोगों की मौत हो गई। आग सुबह 3 बजकर 13 बजे से 3 बजकर 47 बजे के बीच लगी और दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर स्थित कई फ्लैट्स में काफी तेजी से फैल गई।

दिल्ली के शाहदरा के विवेक विहार इलाके में चार मंजिला इमारत में लगी भीषण आग में नौ लोगों की मौत हो गई। आग सुबह 3 बजकर 13 बजे से 3 बजकर 47 बजे के बीच लगी और दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर स्थित कई फ्लैट्स में काफी तेजी से फैल गई। चश्मदीदों ने बताया कि आग के कारण लोग जालीदार बालकनियों और धुएं से भरी सीढ़ियों में फंस गए थे। आग पर काबू पाने में आखिरकार पांच घंटे से अधिक का समय लगा।
पहली मंजिल पर रहने वाले मयनक ने बताया कि उनकी नींद तब खुली जब किसी ने उनके घर की घंटी बजाई। उन्होंने कहा, मैं सो रहा था जब पड़ोसियों ने आकर कई बार घंटी बजाई। जब मैं जागा तो देखा कि इमारत के पिछले हिस्से में आग लगी हुई थी। मैं किसी तरह अपने घर से निकलने में कामयाब रहा। आग के कारण पूरी सीढ़ी बंद हो गई थी। इमारत के पीछे वाले फ्लैट्स के निवासी फंस गए क्योंकि उनके पास निकलने का कोई रास्ता नहीं था। उनकी बालकनी ग्रिल से ढकी हुई है।
'डेढ़ घंटे तक फंसे रहे'
वहीं फर्स्ट फ्लोर पर रहने वाली एक अन्य निवासी रुची अरोड़ा ने कहा कि हम डेढ़ घंटें तक अंदर फंसे रहे। दमकल कर्मियों ने हमें बचाया। तीसरी मंजिल पर रहने वाली सिल्की ने कहा, जब तक हमें स्काई लिफ्ट से नीचे नहीं उतारा गया, तब तक हम बालकनी में ही फंसे रहे। आग हमारे ड्रॉइंग रूम तक पहुंच और सोफा तक पहुंच गई थी। म पांच मिनट में बचा लिए गए। एक अन्य महिला 17 साल की नवमी झा ने बताया कि उन्होंने इमरजेंसी सर्विस को फोन किया लेकिन इसमें काफी समय लग गया। उन्होंने एचटी को बताया, मैंने सुबह 3 बजकर 50 मिनट 112 पर फोन किया। वे मुझसे बार-बार पूछ रहे थे कि क्या मैं गाजियाबाद में रहती हूं। मैंने कहा कि हम विवेक विहार में सीमा पर रहते हैं। उन्होंने कहा कि यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं है और मुझे तीन नंबर दिए। इनमें से कोई भी नंबर काम नहीं कर रहा था। अग्निशमन विभाग और पुलिस लगभग 15 मिनट बाद पहुंचे। तब तक, हमने गद्दे बिछाकर लोगों को बचाने की कोशिश की और दो नाबालिग लड़कियों को बचा लिया गया।
अधिकारियों ने बताया कि विवेक विहार फेज-1 में चार मंजिला इमारत में आग लगने की सूचना तड़के करीब तीन बजकर 48 मिनट पर मिली, जिसके बाद पुलिस, दमकल और आपदा प्रबंधन दल मौके पर पहुंचे।
आग ने इमारत की दूसरी, तीसरी और चौथी मंजिल पर स्थित कई फ्लैट को अपनी चपेट में ले लिया, जिसके बाद अफरा-तफरी के बीच बचाव के लिए प्रयास शुरू किए गए। छत का दरवाजा बंद होने के कारण इमारत में फंसे लोगों के लिए आग से बचकर निकलना मुश्किल हो गया। आग बुझाने के लिए दमकल की कुल 12 गाड़ियां भेजी गईं तथा दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए), यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस के दलों ने बचाव और निकासी प्रयासों में सहायता की। आग लगने के कारणों का अभी पता नहीं चल पाया है।
अलग-अलग फ्लोर से 9 शव
दिल्ली अग्निशमन सेवा (डीएफएस) ने बताया कि अलग-अलग मंजिलों से नौ शव बरामद किए गए। डीएफएस के एक अधिकारी ने कहा, एक शव पहली मंजिल से, पांच शव दूसरी मंजिल से और तीन शव सीढ़ियों से बरामद किए गए। सीढ़ियों वाले हिस्से में ताला लगा मिला। दूसरी मंजिल पर मृत पाए गए लोगों की पहचान अरविंद जैन (60), उनकी पत्नी अनिता जैन (58), बेटे निशांत जैन (35), बहू आंचल जैन (33) और पोते आकाश जैन के रूप में हुई है। तीसरी मंजिल पर एक परिवार के तीन सदस्य मृत पाए गए। उनकी पहचान नितिन जैन (50), उनकी पत्नी शैली जैन (48) और बेटे सम्यक जैन (25) के रूप में हुई है।
पहली मंजिल पर शिखा जैन (45) नाम की महिला मृत पाई गईं, जबकि उनके पति नवीन जैन (48) घायल हुए हैं। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, आग बुझाने के अभियान के दौरान परिसर से करीब 10 से 15 लोगों को बचाया गया। इनमें से दो लोगों को मामूली चोटें आई हैं और उन्हें गुरु तेग बहादुर अस्पताल ले जाया गया। आग ने इमारत के एक बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया और घने धुएं का गुबार इलाके में फैल गया, जिससे दृश्यता कम हो गई।
छत के पास मिले तीन शव
दमकलकर्मियों ने बताया कि आग पर काबू पाने के लिए कई घंटों तक चली मशक्कत के दौरान इमारत के भीतर फंसे लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं। बचाव अभियान में शामिल एक दमकलकर्मी ने बताया कि इमारत के पिछले हिस्से में आग की तीव्रता काफी अधिक थी। उन्होंने कहा, आगे के हिस्से की तुलना में पीछे स्थित चार फ्लैट में आग अधिक भीषण थी। अब तक हमने नौ शव बरामद कर उन्हें दिल्ली पुलिस को सौंप दिया है। इस स्तर पर विवरण देना मुश्किल है। आग लगने के कारणों की जांच की जा रही है। दमकलकर्मी ने कहा, तीन शव छत के पास मिले। छत तक जाने का रास्ता बंद था और इसी वजह से वे अपनी जान नहीं बचा सके। अगर वह बंद नहीं होता तो शायद वे बच जाते।
उन्होंने कहा, इमारत में आने-जाने के लिए एक ही मुख्य सीढ़ी थी। पीछे का गेट ग्रिल से ढका था, जिसे बचाव अभियान के लिए हमें औजारों की मदद से काटना पड़ा। हमने अलग-अलग दिशाओं से पांच सीढ़ियां लगाईं और करीब 15 लोगों को बचाने के लिए 'टर्नटेबल लैडर' यानी घूमने वाली ऊंची सीढ़ी से लैस वाहन का भी इस्तेमाल किया। उपराज्यपाल तरणजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने इस घटना में लोगों की मौत होने पर शोक जताते हुए कहा कि प्रभावित लोगों को चिकित्सकीय सहायता और राहत तत्काल उपलब्ध कराई जा रही है।
भाषा से इनपुट




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