Delhi Police bust Rs 12 crore luxury property fraud Arrest 5 accused गुरुग्राम में प्रोपर्टी दिलाने के नाम पर 12 करोड़ की ठगी, पुलिस ने किया गैंग का भंडाफोड़, Ncr Hindi News - Hindustan
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गुरुग्राम में प्रोपर्टी दिलाने के नाम पर 12 करोड़ की ठगी, पुलिस ने किया गैंग का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियास में ऐसी संपत्ति बेचने के नाम पर 12 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जो अस्तित्व में ही नहीं है।

Sun, 28 Dec 2025 08:21 PMAditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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गुरुग्राम में प्रोपर्टी दिलाने के नाम पर 12 करोड़ की ठगी,  पुलिस ने किया गैंग का भंडाफोड़

दिल्ली पुलिस ने गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियास में ऐसी संपत्ति बेचने के नाम पर 12 करोड़ रुपये की ठगी करने के आरोप में पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, जो अस्तित्व में ही नहीं है। पुलिस के अनुसार, इन गिरफ्तारियों से एक संगठित प्रॉपर्टी धोखाधड़ी गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है जो पीड़ितों को ठगने के लिए फर्जी बैंक नीलामी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर रहा था।

एक बयान में पुलिस ने बताया कि अपराध शाखा ने भारतीय न्याय संहिता की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत कई धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज कर इस रैकेट का भंडाफोड़ किया।

200 करोड़ रुपए से ज्यादा की ठगी

पुलिस अपराध शाखा उपायुक्त आदित्य गौतम ने बयान में कहा, यह सिंडिकेट एक ही तरह के तरीके अपनाकर जैसे फर्जी बिक्री प्रमाण पत्र, नकली नीलामी दस्तावेज और बैंकों द्वारा नीलाम की गई प्रीमियम संपत्तियों पर तुरंत कब्जा दिलाने का झूठा दावा करके कई राज्यों में 200 करोड़ रुपये से अधिक की ठगी कर चुका है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों में कथित सरगना मोहित गोगिया और उसके चार सहयोगी शामिल हैं। पुलिस ने बताया कि राम सिंह उर्फ ‘बाबाजी’ समेत अन्य साजिशकर्ताओं की तलाश जारी है।

कैसे की धोखाधड़ी?

मामला 13 जून को दर्ज एक शिकायत के बाद सामने आया, जिसमें एमजी लीजिंग एंड फाइनेंस, उसके मालिक मोहित गोगिया और सहयोगियों पर धोखाधड़ी व जालसाजी का आरोप लगाया गया था। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि आरोपियों ने उसे गुरुग्राम के डीएलएफ कैमेलियास में स्थित एक प्रॉपर्टी से जुड़े फर्जी दस्तावेज दिखाए और दावा किया कि उनकी कंपनी ने यह संपत्ति बैंक नीलामी में खरीदी है और इसे उसके नाम ‘ट्रांसफर’ किया जा सकता है।

बयान के अनुसार, शिकायतकर्ता ने अगस्त से अक्टूबर 2024 के बीच आरटीजीएस और डिमांड ड्राफ्ट के माध्यम से आरोपियों को 12.04 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। हालांकि बाद में बैंक ने पुष्टि की कि बिक्री प्रमाण पत्र और नीलामी रसीदों समेत सभी दस्तावेज फर्जी थे।

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