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दिल्ली में ऑनलाइन निवेश के बहाने 22 लाख का साइबर फ्रॉड, हरियाणा में पकड़े गए आरोपी

जांच के दौरान, शिकायतकर्ता से उन बैंक खातों का विवरण लिया गया जिनमें पैसे भेजे गए थे। जब NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर इन लेनदेनों की जांच की गई, तो पता चला कि पैसा दो किश्तों में 'बैंक ऑफ महाराष्ट्र' के एक खाते में जमा किया गया था।

Tue, 30 Dec 2025 01:36 PMUtkarsh Gaharwar नई दिल्ली, एएनआई
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दिल्ली में ऑनलाइन निवेश के बहाने 22 लाख का साइबर फ्रॉड, हरियाणा में पकड़े गए आरोपी

दिल्ली पुलिस की साइबर क्राइम यूनिट ने 22.7 लाख की ऑनलाइन निवेश धोखाधड़ी के एक बड़े गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में दो गिरफ्तारी भी की है। अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यह मामला एक फर्जी स्टॉक-ट्रेडिंग एप्लिकेशन घोटाले से जुड़ा है। पुलिस के अनुसार, पीड़ित को एक व्हाट्सएप ग्रुप के जरिए निवेश के लिए लालच दिया गया था। यह ग्रुप खुद को शेयर बाजार से जुड़ा एक असली चर्चा मंच (forum) बताता था। 13 नवंबर को दर्ज की गई शिकायत में आरोप लगाया गया कि पीड़ित को "Stan Chart Dialogue Forum L7" नाम के एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ा गया था।

दिल्ली पुलिस ने बताया कि इस ग्रुप में पांच एडमिन थे जो डीमैट शेयरों (demat shares) पर चर्चा करते थे। ग्रुप की एक एडमिन, यालिनी गुना (Yalini Guna) ने "SCIIHNW" नाम के एक ऐप के माध्यम से निवेश योजना की पेशकश की और शेयर दिलाने का दावा किया। पीड़ित ने दिए गए लिंक से ऐप इंस्टॉल किया और निवेश किया, जिसके बाद उसके साथ ₹22.7 लाख की ठगी हुई। इस मामले में दिल्ली के साइबर शाहदरा थाने में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 340 के तहत ई-एफआईआर (e-FIR) दर्ज की गई है।

शुरुआत में, शिकायतकर्ता ने अलग-अलग तारीखों पर 11 ट्रांजेक्शन (लेनदेन) के जरिए लगभग 2,70,000/- का निवेश किया। जब शिकायतकर्ता ने इस पैसे को निकालने की कोशिश की, तो आरोपियों ने कई शर्तें थोप दीं और उन पर और अधिक पैसा निवेश करने का दबाव बनाया। इस तरह, शिकायतकर्ता ने कुल 22,70,000/- का निवेश कर दिया। आधिकारिक बयान के अनुसार, इसके बाद शिकायतकर्ता को उस एप्लिकेशन पर ब्लॉक कर दिया गया।

जांच के दौरान, शिकायतकर्ता से उन बैंक खातों का विवरण लिया गया जिनमें पैसे भेजे गए थे। जब NCRP (नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल) पर इन लेनदेनों की जांच की गई, तो पता चला कि पैसा दो किश्तों में 'बैंक ऑफ महाराष्ट्र' के एक खाते में जमा किया गया था। खाते के मालिक की पहचान समीर के रूप में हुई। उस खाते से जुड़े मोबाइल नंबर के कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) निकाले गए, जिससे इस धोखाधड़ी में शामिल कई अन्य संदिग्ध मोबाइल नंबरों का भी पता चला।

10 नवंबर को, जांच अधिकारी अपनी टीम के साथ हरियाणा के हिसार पहुंचे, जहां संदिग्धों की पहचान समीर और देव सिंह के रूप में हुई। उनकी भूमिका की पुष्टि होने के बाद, दोनों को हिरासत में लिया गया और गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान, समीर ने खुलासा किया कि उसने अलग-अलग बैंकों में 5-6 खाते खोले थे और उन्हें देव सिंह को सौंप दिया था। इसके बदले में उसे 4,000 रुपये प्रति खाता मिलते थे। उनके पास से दो मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए और कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें जब्त कर लिया गया। अधिकारियों के अनुसार, दोनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

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