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50% से अधिक पैदल यात्रियों की मौत कैसे हुई? दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पता ही नहीं

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि जेबरा क्रॉसिंग, फुट ओवरब्रिज और सबवे (रास्ता) होने के बावजूद, ज्यादातर लोग इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे ऐसी जगहों से सड़क पार करते हैं जहां से उन्हें नहीं चलना चाहिए। ऐसा करके वे न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं।

Sun, 18 Jan 2026 10:06 AMUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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50% से अधिक पैदल यात्रियों की मौत कैसे हुई? दिल्ली ट्रैफिक पुलिस को पता ही नहीं

दिल्ली में पैदल चलने वाले लोगों की मौत का कोई डेटा ही नहीं है। ये हम नहीं बल्कि दिल्ली ट्रैफिक पुलिस के ताजा आंकड़े कह रहे हैं। पुलिस का कहना है कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले आधे से ज्यादा पैदल लोगों का कोई रिकॉर्ड नहीं है यानी यह पता नहीं चल सका है कि किन वजहों से उनकी मौत हुई।

2025 के आंकड़े कहते हैं कि दिल्ली में 2025 में कुल 649 पैदल यात्रियों की मौत हुई है। इनमें से 330 मामलों (50.8%) में दुर्घटना की वजह का पता नहीं चला। 92 मौतें निजी कारों और 75 मौतें दोपहिया वाहनों की वजह से हुईं। 43 हादसों में भारी वाहन या माल ढोने वाली गाड़ियां शामिल थीं, 25 लोगों की जान टेम्पो (छोटे मालवाहक वाहन) से गई। 16 मौतें ई-रिक्शा और 15 बसों के कारण हुईं। बाकी 33 मौतें ऑटो और अन्य वाहनों की वजह से हुईं।

पिछले कुछ वर्षों में पैदल चलने वालों की मौत के आंकड़े इस प्रकार रहे हैं:

➤2024: 584 मौतें (जिनमें 309 का कारण अज्ञात रहा)

➤2023: 622 मौतें (जिनमें 343 का कारण अज्ञात रहा)

➤2022: 629 मौतें (जिनमें 358 का कारण अज्ञात रहा)

आंकड़ों के अनुसार, पिछले साल शहर में सड़क हादसों में हुई कुल 1,617 मौतों में से 40% हिस्सा पैदल यात्रियों का था। साल 2025 में कुल 1,578 सड़क दुर्घटनाएं हुईं। अगर इसकी तुलना 2024 से करें, तो उस समय 1,504 हादसों में 1,551 लोगों की जान गई थी। इसका मतलब है कि 2024 के मुकाबले 2025 में मौतों की संख्या में 4.26% की बढ़ोतरी हुई है।

delhi pedestrians deaths

ट्रैफिक पुलिस के आंकड़े आगे बताते हैं कि

➤2023 में: 1,432 सड़क हादसों में 1,457 लोगों की जान गई।

➤2022 में: 1,428 सड़क हादसों में 1,461 लोगों की मौत हुई।

ट्रैफिक पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि राजधानी में पैदल यात्रियों की ज्यादातर मौतें रात के समय और तेज रफ्तार वाली सड़कों पर होती हैं।

सालकुल सड़क दुर्घटनाएंकुल मौतें
20251,5781,617
20241,5041,551
20231,4321,457
20221,4281,461
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तो गलती पैदल चलने वालों की भी है..

दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कहा कि जेबरा क्रॉसिंग, फुट ओवरब्रिज और सबवे (रास्ता) होने के बावजूद, ज्यादातर लोग इनका इस्तेमाल नहीं करते हैं। वे ऐसी जगहों से सड़क पार करते हैं जहां से उन्हें नहीं चलना चाहिए। ऐसा करके वे न केवल अपनी जान जोखिम में डालते हैं, बल्कि सड़क पर चलने वाले दूसरे लोगों की सुरक्षा के लिए भी खतरा पैदा करते हैं।

उन्होंने आगे बताया, "पैदल यात्रियों की ज्यादातर मौतें रात के समय और नेशनल हाईवे, रिंग रोड और आउटर रिंग रोड जैसे तेज रफ्तार वाले रास्तों पर होती हैं। हम नियमित रूप से सड़क सुरक्षा अभियान चलाते हैं ताकि पैदल यात्रियों की सुरक्षा के महत्व को समझाया जा सके और इस बात पर जोर दिया जा सके कि सड़कें सभी के लिए सुरक्षित होनी चाहिए, खासकर पैदल चलने वालों के लिए।”

सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार और अन्य संबंधित पक्षों द्वारा उठाए गए कुछ कदमों से शहर में सड़क हादसों के दौरान होने वाली पैदल यात्रियों की मौतों को रोका जा सकता है। अर्बन मोबिलिटी एक्सपर्ट और राहगीरी फाउंडेशन की को-फाउंडर सारिका पांडा भट्ट ने कहा: “दिल्ली के ज्यादातर हिस्सों में पर्याप्त फंड और जगह उपलब्ध है। लेकिन प्लानिंग के मामले में पैदल चलने वालों को सबसे नीचे रखा जाता है। कारों के लिए सड़कें चौड़ी की जाती हैं, तेज रफ्तार के लिए फ्लाईओवर बनाए जाते हैं, लेकिन पैदल चलने वालों और साइकिल सवारों को नजरअंदाज कर दिया जाता है, जबकि सड़क पर उनकी संख्या सबसे ज्यादा होती है। हरियाली और बैठने की जगह के साथ एक अच्छी तरह से डिजाइन किया गया फुटपाथ न केवल सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि पैदल चलने को बढ़ावा देता है और प्रदूषण भी कम करता है।”

IIT दिल्ली के ट्रांसपोर्टेशन रिसर्च एंड इंजरी प्रिवेंशन सेंटर (TRIP Centre) की ट्रैफिक सुरक्षा विशेषज्ञ गीतम तिवारी ने कहा: “शहरी इलाकों में वाहनों की रफ्तार कम करने से पैदल यात्रियों की मौतों को आधा किया जा सकता है। आप रिहायशी इलाकों या स्कूलों के पास 60 किमी/घंटा की रफ्तार की अनुमति नहीं दे सकते। अगर हम चौराहों को दोबारा डिजाइन करें, उनके कोनों (corner radii) को कम करें और क्रॉसिंग पर पैदल यात्रियों को प्राथमिकता दें, तो सुरक्षा में भारी सुधार होगा।”

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