पत्नी के गहने ले लेना क्रूरता नहीं... दिल्ली हाई कोर्ट ने वकील पति को कर दिया बरी
दिल्ली हाईकोर्ट ने वैवाहिक झगड़े पर अहम फैसला सुनाते हुए कहा कि सिर्फ़ पत्नी के गहने चोरी करने का आरोप पति पर 'क्रूरता' का मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है, जिसके बाद कोर्ट ने 66 वर्षीय वकील पर दर्ज FIR रद्द कर दी।

दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को एक ऐसा फैसला सुनाया, जिसने वैवाहिक झगड़ों की दुनिया में नई बहस छेड़ दी। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ पत्नी के गहने ले जाने के आरोप से पति पर क्रूरता का मुकदमा नहीं चल सकता। जस्टिस नीना बंसल कृष्णा की बेंच ने 66 साल के वकील का केस पूरी तरह रद्द कर दिया।
क्या है पूरा मामला?
कहानी कुछ फिल्मी है। एक वकील साहब ने अपनी मुवक्किल का तलाक करवाया। मदद करते-करते प्यार हो गया। दोनों ने 2007 में शादी कर ली। लेकिन शादी के तीन साल बाद पता चला कि महिला का पहला तलाक तो 2010 में हुआ था। यानी उनकी शादी कानूनी रूप से कभी हुई ही नहीं। पत्नी भड़क गईं। उसने वकील के खिलाफ FIR दर्ज कराई।
इस एफआईआर में आरोप थे कि जॉइंट अकाउंट से लाखों रुपये और घर के लॉकर से लाखों रुपये के गहने उठा लिए। वहीं गहने गिरवी रखकर वकील ने नया घर खरीद लिया। इसके अलावा प्राइवेट वीडियो लीक करने की धमकी दी।
इसके बाद पति ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। वकील ने कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए तर्क दिया कि शादी फर्जी है, तो 498A कैसे लगेगा?
पुलिस ने भी पति का साथ दिया
दिल्ली पुलिस ने कोर्ट को बताया कि महिला ने FIR में अपना असली तलाक छुपाया। यह साफ धोखा है। पुलिस ने पति की याचिका का समर्थन किया। दूसरी तरफ पत्नी ने कोर्ट में राहत की गुहार लगाई।
सुप्रीम कोर्ट का पुराना फैसला आया काम
जस्टिस कृष्णा ने सुप्रीम कोर्ट के मशहूर अरविंद सिंह केस को याद किया। उसमें साफ लिखा है क्रूरता का मतलब है पत्नी को मानसिक या शारीरिक दर्द देना। सिर्फ गहने ले जाना, क्रूरता की परिभाषा में नहीं आता। कोर्ट ने लिखा, “मान लीजिए पति ने 40 लाख के गहने उठा भी लिए। तब भी यह 498A के तहत क्रूरता नहीं कहलाएगा। धमकी और वीडियो की बातें? उनके लिए एक भी सबूत नहीं है। ये सिर्फ केस को भारी बनाने की कोशिश है।”




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