Delhi High court says Judges Often Make Such Observations on ED Plea in Case Linked to Arvind Kejriwal कई बार जज इस तरह की टिप्पणी करते हैं; केजरीवाल से जुड़े केस में ईडी की याचिका पर HC, Ncr Hindi News - Hindustan
More

कई बार जज इस तरह की टिप्पणी करते हैं; केजरीवाल से जुड़े केस में ईडी की याचिका पर HC

दिल्ली आबकारी नीति से जुड़े ट्रायल कोर्ट के फैसले में ईडी ने खुद पर की गई टिप्पणी के खिलाफ दिल्ली हाई कोर्ट का रुख किया था। हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि कई बार जज इस तरह की टिप्पणी कर देते हैं। 

Tue, 10 March 2026 01:06 PMGaurav Kala लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
share
कई बार जज इस तरह की टिप्पणी करते हैं; केजरीवाल से जुड़े केस में ईडी की याचिका पर HC

दिल्ली हाईकोर्ट ने आबकारी नीति मामले में ट्रायल कोर्ट की टिप्पणियों को हटाने की मांग को लेकर दायर ईडी की याचिका पर कहा कि जज की टिप्पणियां संभवतः मामले से सीधे जुड़ी नहीं हो सकतीं। कई बार जज इस तरह की सामान्य टिप्पणियां करते हैं। ईडी का आरोप है कि ट्रायल कोर्ट में मामला सीबीआई और केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों से जुड़ा था, बावजूद इसके अदालत ने ईडी पर भी टिप्पणी की।

मंगलवार को दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि इस मामले में हमारा सवाल यह है कि जज की जो टिप्पणियां की गई हैं, वे सामान्य प्रकृति की हैं और या फिर इनका इस मामले से कोई संबंध नहीं है। वह आदेश के संबंधित हिस्सों को देखकर इस पर फैसला लेगी। हाई कोर्ट ने मामले की सुनवाई के लिए अगली तारीख तय कर दी है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने आबकारी नीति मामले में अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को बरी करते समय ईडी के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को हटाने की मांग वाली याचिका पर नोटिस जारी किया है। अदालत ने कहा कि ये टिप्पणियां सामान्य थीं और मामले से संबंधित नहीं थीं। ईडी ने तर्क दिया कि भविष्य की कार्यवाही में इनका इस्तेमाल उसके खिलाफ किया जा सकता है। अदालत ने अपनी स्वतंत्रता का हवाला देते हुए कहा कि आप नहीं बताएंगे हमें क्या करना चाहिए और क्या नही। इस मामले की सुनवाई 19 मार्च को होगी।

गौरतलब है कि ईडी ने हाल ही में सीबीआई द्वारा जांच किए जा रहे आबकारी नीति मामले में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और अन्य को आरोपमुक्त करते हुए निचली अदालत द्वारा धनशोधन जांच के संबंध में की गई टिप्पणी को हटाने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया था। ईडी का कहना था कि 27 फरवरी का आदेश "न्यायिक अधिकार क्षेत्र का स्पष्ट उल्लंघन" था क्योंकि अदालत ने एजेंसी के खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए उसके साक्ष्यों पर ना तो गौर किया और ना ही उसकी बात सुनी।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:अरविंद केजरीवाल को क्लीनचिट देने वाले फैसले में HC को क्या गलत लगा

अदालत ने क्या कहा था

विशेष न्यायाधीश जितेंद्र सिंह की अदालत ने पीएमएलए और ईडी जांच के संबंध में कई टिप्पणियां की थीं। आदेश में विशेष रूप से कहा गया कि सुप्रीम कोर्ट ने 2022 के विजय मदनलाल चौधरी मामले में कहा था कि एक बार मूल मामला (सीबीआई मामला) समाप्त होने पर ईडी मामला भी अनिवार्य रूप से खत्म हो जाएगा।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:शराब घोटाले में HC ने CBI की 3 बातें मानी, दूसरी से केजरीवाल की उम्मीदों को झटका

ईडी की आपत्ति

ईडी ने 7 मार्च को दायर अपनी याचिका में आदेश के कई पैराग्राफ का हवाला देते हुए कहा कि अदालत की उसके खिलाफ की गई टिप्पणियां "प्रतिकूल, व्यापक और अवांछित" थीं क्योंकि सुनवाई में ईडी पक्षकार नहीं थी और अदालत के समक्ष केवल सीबीआई की जांच के गुण-दोष पर ही विचार किया जा रहा था।

read moreये भी पढ़ें:
ये भी पढ़ें:सबसे बड़े घोटालों में से एक; केजरीवाल और सिसोदिया पर HC में CBI ने क्या कहा

एजेंसी ने यह भी कहा कि यदि इस प्रकार की व्यापक और निराधार टिप्पणियों को बरकरार रहने दिया गया, जिनका आधार ईडी द्वारा एकत्रित किसी भी सामग्री या साक्ष्य पर नहीं है तो इससे सार्वजनिक हित के साथ-साथ ईडी को भी गंभीर और अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।

लेटेस्ट Hindi News , Delhi News , Ghaziabad News , Noida News , Gurgaon News और Faridabad News सहित पूरी NCR News पढ़ने के लिए Live Hindustan App डाउनलोड करें।