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जब जज ने रेप केस की सुनवाई से खुद को किया अलग, दिल्ली हाई कोर्ट में नया ट्विस्ट

महिला वकील से रेप के मामले में जस्टिस अमित महाजन ने खुद को सुनवाई से अलग कर लिया है; आरोपी वरिष्ठ वकील और पीड़िता के बीच समझौते के दावों के बीच अब 22 दिसंबर को दूसरी बेंच इस पर सुनवाई करेगी।

Fri, 19 Dec 2025 09:51 AMAnubhav Shakya नई दिल्ली, हिंदुस्तान टाइम्स
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जब जज ने रेप केस की सुनवाई से खुद को किया अलग, दिल्ली हाई कोर्ट में नया ट्विस्ट

दिल्ली हाईकोर्ट में एक गंभीर रेप केस की सुनवाई के दौरान गुरुवार को नया ट्विस्ट आया। जस्टिस अमित महाजन ने खुद को इस मामले से अलग कर लिया। आरोपी एक 51 साल का वरिष्ठ वकील है, जिस पर 27 साल की महिला वकील ने बार-बार रेप और मारपीट का आरोप लगाया है। जज ने कहा कि वे पहले ही आरोपी की अग्रिम जमानत रद्द कर चुके हैं, इसलिए दोबारा सुनवाई करना अपने फैसले की समीक्षा जैसा होगा।

जज ने कहा- हालात नहीं बदले

कोर्ट में जस्टिस महाजन ने आरोपी के वकील विकास पाहवा से कहा, 'मेरा मन पहले ही बन चुका है। नवंबर में मैंने जमानत रद्द की थी और परिस्थितियों में कोई बदलाव नहीं हुआ।' पाहवा ने दलील दी कि अब हालात बदल गए हैं। पीड़िता और आरोपी के बीच 29 नवंबर को समझौता हो गया, जिसमें महिला ने कहा कि उसकी कोई शिकायत नहीं बची। जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल है और हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।

जज ने दोनों याचिकाएं खारिज करने का संकेत दिया, लेकिन आरोपी को दूसरी बेंच में सुनवाई का मौका देने का फैसला किया। अगली तारीख 22 दिसंबर रखी गई है।

ट्रायल कोर्ट ने भी ठुकराई जमानत

इससे पहले 15 दिसंबर को ट्रायल कोर्ट ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने 20 पेज के आदेश में कहा कि गंभीर आरोपों के बावजूद पीड़िता के बयानों में बड़ा विरोधाभास है। 26 नवंबर को उन्होंने प्रोटेस्ट पिटिशन दाखिल करने के लिए समय मांगा था, लेकिन तीन दिन बाद ही समझौता कर लिया। बाद में कोर्ट को बता दिया कि प्रोटेस्ट आगे नहीं बढ़ाएंगी।

पहले का फैसला और जजों पर कार्रवाई

ये मामला नवंबर के उस फैसले से जुड़ा है, जब जस्टिस महाजन ने आरोपी की जमानत रद्द की और सरेंडर के लिए एक हफ्ते का समय दिया। उसी आदेश में दो जिला जजों पर प्रशासनिक जांच के निर्देश दिए गए। उन पर पीड़िता को आरोप वापस लेने का दबाव बनाने का इल्जाम था। कोर्ट ने इसे न्याय व्यवस्था पर गंभीर हमला बताया। इसके बाद अगस्त में हाईकोर्ट की फुल कोर्ट मीटिंग में जज संजीव कुमार सिंह को सस्पेंड कर दिया गया। दूसरे जज अनिल कुमार के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश हुई। पीड़िता की शिकायत पर ऑडियो रिकॉर्डिंग्स भी सबूत बने थे।

पीड़िता का एक और गंभीर आरोप

महिला ने ये भी कहा कि जनवरी 2025 में आरोपी के वकील ने उन्हें एक तत्कालीन हाईकोर्ट जज से मिलवाया था। वादा किया गया था कि लॉ रिसर्चर की नौकरी दिलवाई जाएगी।

ये केस अब दूसरी बेंच के सामने जाएगा। कानूनी हलकों में चर्चा है कि समझौता कितना स्वैच्छिक है। अगली सुनवाई में नए खुलासे हो सकते हैं।

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