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पत्नी को गुजारा भत्ता देते समय 'कमाने वाली' मानना गलत… दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक मामले में पति के खोखले दावों को खारिज करते हुए कहा कि बिना ठोस सबूत के पत्नी को कमाने वाला नहीं माना जा सकता और न्यूनतम मजदूरी के आधार पर अंतरिम गुजारा भत्ता बढ़ाने का आदेश दिया।

Thu, 8 Jan 2026 02:00 PMAnubhav Shakya नई दिल्ली, पीटीआई
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पत्नी को गुजारा भत्ता देते समय 'कमाने वाली' मानना गलत… दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

शादी के बाद गुजारा भत्ता का मामला अक्सर विवादों में घिर जाता है। दिल्ली हाईकोर्ट ने एक केस की सुनवाई के दौरान कहा कि अंतरिम भत्ता तय करते समय पत्नी को यह मानकर नहीं चलना चाहिए कि वह खुद कमाती है या खुद को संभाल सकती है। कोर्ट ने यह भी जोर दिया कि बिना सबूत के पति का सिर्फ दावा करना काफी नहीं है।

बिना सबूत के दावा खारिज

जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच ने यह टिप्पणी एक महिला की याचिका पर की, जिसमें उसने फैमिली कोर्ट के सिर्फ 2,500 रुपये मासिक अंतरिम भत्ते के फैसले को चुनौती दी थी। पति ने दावा किया कि उनकी पत्नी नर्सरी टीचर हैं और कमाती हैं, लेकिन इसके लिए एक भी दस्तावेज पेश नहीं किया। कोर्ट ने पत्नी की सिर्फ 11वीं तक की पढ़ाई का हवाला देते हुए कहा, 'बिना प्रमाण के ऐसा खोखला दावा इस स्टेज पर किसी काम का नहीं। अंतरिम भत्ते के लिए पत्नी को कमाने वाली मानना ठीक नहीं।'

शादी के बाद क्रूरता और घर से निकाला

यह जोड़ा जून 2021 में मुस्लिम रीति-रिवाज से शादीशुदा था। पत्नी का आरोप है कि दहेज की मांग को लेकर उसे जल्द ही ससुराल में क्रूरता का शिकार होना पड़ा और 2022 में घर से बाहर निकाल दिया गया। उसने कोई अपना कमाई का स्रोत न होने की बात कही।

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पति की कमाई पर सवाल

पत्नी ने दावा किया कि ग्रेजुएट पति प्राइवेट स्कूल में टीचर हैं और करीब 25 हजार रुपये सैलरी लेते हैं। इसके अलावा प्राइवेट ट्यूशन से 15 हजार, किराने की दुकान और किराए से 30 हजार रुपये अतिरिक्त कमाई है। ऐसे में 2500 रुपये बहुत कम हैं।

पति ने जवाब में कहा कि वह एक एनजीओ में स्पेशल एजुकेटर हैं और सिर्फ 10 हजार रुपये कमाते हैं। लेकिन कोर्ट ने देखा कि यह रकम तो ग्रेजुएट के लिए न्यूनतम मजदूरी से भी कम है। पति ने पूरी बैंक स्टेटमेंट भी नहीं दी – सिर्फ सीमित अवधि की, जिसमें सैलरी का कोई क्लियर ट्रांजेक्शन नहीं था।

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भत्ता बढ़ाकर 3,500 रुपये किया

कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में ग्रेजुएट/स्किल्ड वर्कर के लिए लागू न्यूनतम मजदूरी (तब करीब 13,200 रुपये) को आधार मानते हुए पति की कमाई का आकलन किया। इसके बाद कोर्ट ने अंतरिम भत्ता बढ़ाकर 3,500 रुपये मासिक कर दिया गया। कोर्ट ने कहा, 'पत्नी के पास कोई स्वतंत्र आय नहीं है, दोनों पक्षों की स्थिति और पति की आंकी गई कमाई को देखते हुए पुराना भत्ता बहुत कम था।' साथ ही, पति को बकाया राशि तीन महीने में चुकाने का भी आदेश दिया गया।

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