Delhi HC Order over pension cut imposed on govt employee for showing live in partner as wife लिव-इन पार्टनर को 'पत्नी' बताने पर पेंशन में हुई थी कटौती, दिल्ली HC ने क्या कहा, Ncr Hindi News - Hindustan
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लिव-इन पार्टनर को 'पत्नी' बताने पर पेंशन में हुई थी कटौती, दिल्ली HC ने क्या कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की पेंशन में की गई 50 फीसदी की कटौती के फैसले को रद्द कर दिया है। यह सजा उसे इसलिए दी गई थी क्योंकि उसने बिना तलाक लिए अपनी 'लिव-इन पार्टनर' का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में पत्नी के तौर पर दर्ज कराने की कोशिश की थी।

Sat, 10 Jan 2026 12:05 AMAditi Sharma लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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लिव-इन पार्टनर को 'पत्नी' बताने पर पेंशन में हुई थी कटौती, दिल्ली HC ने क्या कहा

दिल्ली हाई कोर्ट ने एक सरकारी कर्मचारी की पेंशन में की गई 50 फीसदी की कटौती के फैसले को रद्द कर दिया है। यह सजा उसे इसलिए दी गई थी क्योंकि उसने बिना तलाक लिए अपनी 'लिव-इन पार्टनर' का नाम आधिकारिक रिकॉर्ड में पत्नी के तौर पर दर्ज कराने की कोशिश की थी। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी के इस कदम को 'गंभीर कदाचार' नहीं माना जा सकता।

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक वीरेंद्र सिंह कुंवर नाम के इस कर्मचारी की शादी 1981 में हुई थी, लेकिन 1983 में उनकी पत्नी उन्हें छोड़कर चली गईं और तलाक देने से भी मना कर दिया। 1990 में पत्नी की शिकायत पर उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई हुई थी और वेतन में कटौती की गई थी। तब पत्नी ने उसके खिलाफ परिवार को छोड़ दूसरी महिला के साथ रहने की शिकायत दर्ज कराई थी।

इसके बाद 2008 में उन्होंने अपनी लिव-इन पार्टनर का नाम पत्नी के रूप में दर्ज कराने और उनके लिए डिप्लोमैटिक पासपोर्ट बनवाने की कोशिश की। विभाग ने इसे धोखाधड़ी मानते हुए उनकी आधी पेंशन रोक दी थी। इसे 'सेंट्रल सिविल सर्विसेज (CCA) रूल्स, 1965' के तहत पूर्ण सत्यनिष्ठा की कमी और गंभीर कदाचार माना गया। इसी आधार पर यूपीएससी की सलाह पर उनकी 50 फीसदी पेंशन रोक दी गई थी। कुंवर ने पेंशन कटौती की इस सजा के खिलाफ CAT में अपील की थी। CAT ने विभाग की कार्रवाई को सही माना था और सजा को बरकरार रखा था। इसके बाद फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

हाई कोर्ट ने इस सजा को रद्द करते हुए कहा कि कर्मचारी ने अपनी पार्टनर के साथ संबंधों को लेकर विभाग से कभी कुछ नहीं छिपाया। उसने हमेशा अपनी लिव-इन पार्टनर के साथ अपने रिश्तों को लेकर पारदर्शिता बनाए रखी, इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उसकी नीयत धोखाधड़ी करने की थी। दिल्ली हाई कोर्ट ने आदेश दिया कि कर्मचारी वीरेंद्र सिंह कुंवर अपनी पूरी मासिक पेंशन और ग्रेच्युटी पाने के हकदार हैं। कोर्ट ने साफ किया कि उन्हें यह लाभ 1 अगस्त 2012 से प्रभावी रूप से दिया जाए। इसके अलावा, अदालत ने यह भी कहा इतने सालों तक जो भुगतान उन्हें नहीं मिला, उस बकाया राशि पर विभाग उन्हें 6 प्रतिशत सालाना की दर से ब्याज भी देगा।

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