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अब तकनीक से पलूशन पर काबू पाएगी दिल्ली; 22 का होगा ट्रायल, क्या है प्लान?

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए 22 नई तकनीकों के ट्रायल शुरू किए हैं। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वाहनों और वातावरण से जुड़े इन वैज्ञानिक समाधानों का परीक्षण पूरा कर रिपोर्ट सौंपें।

Mon, 6 April 2026 08:54 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, संजय कुशवाह, नई दिल्ली
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अब तकनीक से पलूशन पर काबू पाएगी दिल्ली; 22 का होगा ट्रायल, क्या है प्लान?

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में दिल्ली सरकार ने पलूशन से निपटने के लिए इनोवेशन चैलेंज के तहत 22 नई तकनीकों के ट्रायल शुरू किए हैं। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने एक उच्च स्तरीय बैठक में निर्देश दिए कि इन तकनीकों का परीक्षण तेजी से किया जाए। इसमें वाहनों के पलूशन को रोकने वाले 13 डिवाइस और हवा साफ करने वाले 9 समाधान शामिल किए गए हैं। इन डिवाइस को कश्मीरी गेट और लाल किला जैसे व्यस्त इलाकों में लगाया जाएगा। IIT दिल्ली और अन्य वैज्ञानिक संस्थानों की निगरानी में यह ट्रायल 30 से 90 दिनों तक चलेंगे।

विभागों को दिए गए ये आदेश

बैठक का मकसद 22 नई और असरदार तकनीकों के ट्रायल को तेज करना था जिन्हें देशभर से प्राप्त 284 प्रविष्टियों में से चुना गया है। पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे इन ट्रायल्स के लिए स्थल की अनुमति देने, उपकरण लगाने की इजाजत देने, बिजली की व्यवस्था करने से लेकर एनओसी जारी करने जैसी सुविधाएं प्रदान करें।

ट्रायल समय पर पूरा करने पर जोर

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने दिल्ली सरकार के सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि साइट की अनुमति, गाड़ियों की व्यवस्था और बिजली कनेक्शन में देरी नहीं होनी चाहिए। इन ट्रायल्स का समय पर पूरा किया जाना बहुत जरूरी है ताकि दिल्ली को स्वच्छ हवा के लिए सटीक और प्रभावी समाधान मिल सकें।

…ताकि पूरी दिल्ली में लागू किए जा सकें उपाय

दिल्ली सरकार का यह इनोवेशन चैलेंज पलूशन पर काबू पाने के लिए कम लागत वाले ऐसे समाधान खोजने के लिए हैं जिनको बड़े स्तर पर राष्ट्रीय राजधानी में लागू किया जा सके। पहल मकसद गाड़ियों के धुएं और धूल से होने वाले पीएम 2.5 और पीएम 10 जैसे प्रदूषण को कम करना है। 30 से 90 दिनों के ट्रायल IIT दिल्ली, NPL और ICAT की निगरानी में होंगे।

ट्रायल के लिए 22 इनोवेशन सलेक्ट

इस इनोवेशन चैलेंज के लिए शुरुआत में 284 एंट्री आई थीं। इनमें से डीपीसीसी ने 48 एंट्री को चुना और आगे टेक्निकल कमेटी के पास भेजा। IIT दिल्ली, CPCB, ARAI (पुणे), NPL, DTU और Maruti Suzuki के विशेषज्ञों वाली इस कमेटी ने जांच के बाद 22 इनोवेशन को ट्रायल के लिए चुना।

चुनिंदा तकनीकों में 13 वाहन से जुड़ीं

इन 22 इनोवेशन में से 13 वाहन से जुड़े हैं। इनमें गाड़ियों पर लगने वाले एयर फिल्टर, पीएम कलेक्टर, बीएस-4 वाहनों के लिए रेट्रोफिट एमिशन कंट्रोल डिवाइस (RECD), डस्ट कलेक्टर और भारी डीजल वाहनों के लिए आफ्टर-ट्रीटमेंट सिस्टम जैसे उपकरण शामिल हैं। इनका इस्तेमाल वाहनों पर किया जाएगा।

9 वातावरण से जुड़े समाधान

चुनिंदा 22 इनोवेशन में से 9 वातावरण से जुड़े समाधान हैं। इनमें बड़े एयर प्यूरीफायर लगाना, एयर ट्रीटमेंट टावर लगाना, पोल और रोड डिवाइडर पर लगने वाले डस्ट कलेक्टर का इस्तेमाल करना और रेडियो वेव आधारित पार्टिकल कंट्रोल तकनीक का भी इस्तेमाल शामिल है।

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कितना होगा खर्च?

दिल्ली सरकार इन 22 नए आविष्कारों के ट्रायल के लिए हर एक पर 10 लाख रुपये तक खर्च करेगी ताकि उनका सही से टेस्ट हो सके। इसके साथ ही सबसे अच्छे काम के लिए पहले विजेता को 50 लाख, दूसरे को 25 लाख और तीसरे को 10 लाख रुपये का इनाम भी दिया जाएगा।

किन जगहों पर लगेंगी डिवाइस?

इन तकनीकी डिवाइस को ISBT कश्मीरी गेट, लाल किला मैदान, प्राइमरी हेल्थ सेंटर, फायर स्टेशन, और पंजाबी बाग, कीर्ति नगर, रोहिणी जैसे इलाकों में लगाया जाएगा।

IIT दिल्ली करेगी निगरानी

इन ट्रायल्स की निगरानी IIT दिल्ली, नेशनल फिजिकल लेबोरेटरी (NPL) और इंटरनेशनल सेंटर फॉर ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी (ICAT) की ओर से की जाएगी। मई के अंत तक डेटा जमा कर लिया जाएगा। मई-जून में आंकड़ों का मूल्यांकन होगा। इसके बाद जुलाई 2026 तक सरकार को अंतिम सिफारिशें दी जाएंगी। बैठक में ट्रायल के बाद की योजना पर भी चर्चा हुई। इसमें सफल तकनीकों को बड़े स्तर पर लागू करने और सरकारी स्तर पर अपनाने की रणनीति शामिल है।

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