आवारा कुत्तों की गिनती के लिए लगाए गए टीचर? दिल्ली सरकार ने क्लियर कर दिया
विवाद तब शुरू हुआ जब सोमवार को व्हाट्सऐप पर उत्तर-पश्चिम जिले के 118 शिक्षकों की एक लिस्ट वायरल हुई, जिन्हें 'नोडल टीचर' बनाया गया था। इसके बाद शिक्षक संघों में यह डर फैल गया कि उन्हें स्कूलों और आस-पास के इलाकों में आवारा कुत्तों को गिनने जैसे कामों में लगाया जा सकता है।

क्या दिल्ली के शिक्षक अब आवारा कुत्तों की गिनती करेंगे? क्या दिल्ली सरकार ने ऐसे कुछ काम सौंपे टीचरों को सौंपे हैं? ये कुछ ऐसे सवाल हैं जो कल देश की राजधानी में चर्चा का विषय बने हैं। दिल्ली सरकार ने अब इन सारे सवालों पर विराम लगा दिया है। दिल्ली सरकार ने इन गलत सूचनाओं को खारिज कर दिया है। यह स्पष्टीकरण शिक्षक संघों के भारी विरोध के बाद आया है, जिनका कहना था कि पढ़ाई के अलावा अन्य काम करने से बच्चों की शिक्षा पर बुरा असर पड़ेगा।
असल में पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि संवेदनशील सार्वजनिक जगहों पर आवारा कुत्तों के प्रबंधन के लिए 'नोडल अधिकारी' नियुक्त किए जाएं। सोमवार को शिक्षा निदेशालय (DoE) ने सफाई दी कि उसने सभी स्कूलों के प्रमुखों और स्थानीय निकायों को केवल यह निर्देश दिया था कि वे इस संबंध में उठाए गए कदमों की जानकारी दें।
आदेश में क्या लिखा है?
शिक्षा निदेशालय (DoE) ने अपने बयान में कहा: “20 और 24 नवंबर, तथा 5 और 10 दिसंबर को जारी निर्देशों के अनुसार, निदेशालय के तहत आने वाले सभी कार्यालयों, स्कूलों और स्टेडियमों के प्रमुखों के साथ-साथ संबंधित स्थानीय निकायों को कुछ खास कदम उठाने की जिम्मेदारी दी गई है। इनमें सभी सरकारी और प्राइवेट स्कूलों व खेल परिसरों की पूरी लिस्ट जमा करना, चारदीवारी को मजबूत करना, नोडल अधिकारियों की नियुक्ति करना और आवारा कुत्तों को वहां बसने से रोकने के लिए जागरूकता कार्यक्रम चलाना शामिल है।”
विवाद तब शुरू हुआ जब सोमवार को व्हाट्सऐप पर उत्तर-पश्चिम जिले के 118 शिक्षकों की एक लिस्ट वायरल हुई, जिन्हें 'नोडल टीचर' बनाया गया था। इसके बाद शिक्षक संघों में यह डर फैल गया कि उन्हें स्कूलों और आस-पास के इलाकों में आवारा कुत्तों को गिनने जैसे कामों में लगाया जा सकता है। हमारे सहयोगी 'हिंदुस्तान टाइम्स' (HT) ने वह लिस्ट देखी है, हालांकि उसमें यह नहीं लिखा था कि इन नोडल अधिकारियों को असल में क्या काम करना होगा।

शिक्षा मंत्री ने क्लियर कर दिया
इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए, शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि शिक्षकों को आवारा कुत्तों की गिनती के काम में लगाने का कोई निर्देश जारी नहीं किया गया है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ये अफवाहें आम आदमी पार्टी (AAP) फैला जा रही हैं, जो अपनी हार स्वीकार नहीं कर पा रही है। सरकार के स्पष्टीकरण के बाद, नगर निगम शिक्षक संघ 'शिक्षक न्याय मंच' के अध्यक्ष कुलदीप खत्री ने एक बयान में कहा: "हम मांग करते हैं कि छात्रों और शिक्षकों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी नगर निगम स्कूलों के गेट पर गार्ड नियुक्त किए जाएं।"
बता दें कि 7 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने कुत्ते के काटने की बढ़ती घटनाओं को मानवीय सुरक्षा के लिए चिंता का विषय बताया था। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था कि शिक्षण संस्थानों, अस्पतालों, खेल परिसरों, बस डिपो और रेलवे स्टेशनों से आवारा कुत्तों को हटाया जाए। अदालत ने यह भी कहा था कि ऐसे कुत्तों को नसबंदी के बाद वापस उन्हीं परिसरों में नहीं छोड़ा जा सकता। इसी संदर्भ में, कोर्ट ने कहा था कि इन सार्वजनिक स्थानों के प्रबंधन को एक 'नोडल अधिकारी' नियुक्त करना चाहिए, जो परिसर की साफ-सफाई और रखरखाव सुनिश्चित करे और यह देखे कि आवारा कुत्ते वहां प्रवेश न करें या बस न जाएं।
सोमवार को सरकार ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, हर संस्थान में इसे लागू करने की विस्तृत योजना बनाने के लिए 12 और 20 नवंबर को दो बैठकें की गईं। इस संबंध में शिक्षा विभाग के साथ-साथ अन्य नागरिक निकायों जैसे दिल्ली नगर निगम (MCD), नई दिल्ली नगरपालिका परिषद (NDMC), दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI) और दिल्ली छावनी बोर्ड को पालन करने के निर्देश जारी किए गए।
आदेश बन गया गले की फांस
5 दिसंबर को जारी एक आदेश में निर्देश दिया गया था कि प्राथमिकता के आधार पर प्रत्येक संस्थान के लिए एक 'नोडल अधिकारी' नामित किया जाए, मुख्य द्वार पर उस अधिकारी का विवरण प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए और यह जानकारी संबंधित क्षेत्रीय स्थानीय निकाय के साथ साझा की जाए।" बयान में कहा गया कि ये अधिकारी अपने परिसरों के भीतर नियमित निरीक्षण करेंगे और यदि परिसर में आवारा कुत्ते पाए जाते हैं, तो सुधारात्मक कार्रवाई के लिए स्थानीय अधिकारियों को सूचित करेंगे।
दिल्ली स्कूल टीचर्स एसोसिएशन के उत्तर-पश्चिम जिला सचिव, संत राम ने सवाल उठाया कि कुत्तों को दूर रखने का काम MCD कर्मचारियों को क्यों नहीं दिया जा सकता। उन्होंने कहा, “यह पढ़ाई से जुड़ा काम नहीं है। चाहे चुनाव हों, SIR की तैयारी हो या बूथ मैनेजमेंट, शिक्षकों को ही हमेशा आगे क्यों रखा जाता है? प्री-बोर्ड और परीक्षाएं आने वाली हैं, हमें बच्चों का रिवीजन कराना है।” वहीं, मंगोलपुरी के एक सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने नाम न छापने की शर्त पर 5 दिसंबर के आदेश का जिक्र करते हुए कहा, “यह आदेश स्पष्ट नहीं है कि नोडल अधिकारी के रूप में किसे और कितने अनुभव वाले व्यक्ति को नियुक्त किया जाना चाहिए।” उन्होंने आगे बताया कि स्पष्टता न होने के कारण उन्होंने इसके लिए शिक्षकों और लैब-सपोर्ट स्टाफ के नाम दे दिए थे।




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