बिजली की बढ़ती जरूरतों पर दिल्ली सरकार का क्या प्लान? सूर्य घर योजना पर भी मंथन
बिजली व्यवस्था को लेकर हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समीक्षा बैठक में बिजली क्षेत्र के मौजूदा कार्यों और वर्ष 2029 तक की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा है कि राजधानी को विकसित, आत्मनिर्भर और पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बिजली का सुदृढ़, विश्वसनीय और भविष्य के अनुरूप प्रबंधन अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि दिल्ली सरकार बढ़ती बिजली मांग को ध्यान में रखते हुए ट्रांसमिशन और डिस्ट्रिब्यूशन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए ठोस और दूरदर्शी कदम उठा रही है।
तीन वर्षों के लिए 17,000 करोड़ रुपये व्यय होंगे
बिजली व्यवस्था को लेकर हाल ही में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। समीक्षा बैठक में बिजली क्षेत्र के मौजूदा कार्यों और वर्ष 2029 तक की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में बिजली मंत्री श्री आशीष सूद, बिजली विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, दिल्ली ट्रांसको लिमिटेड (डीटीएल) तथा राजधानी की सभी डिस्कॉम के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि दिल्ली में अगले तीन वर्षों के दौरान लगभग 17,000 करोड़ रुपये की पूंजीगत व्यय योजना को लागू किया जाएगा। इस योजना के तहत डीटीएल और डिस्कॉम पारेषण लाइनों, ग्रिड सब-स्टेशनों और वितरण नेटवर्क को सशक्त करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन निवेशों का उद्देश्य केवल नई क्षमता जोड़ना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि राजधानी के प्रत्येक क्षेत्र में निर्बाध, सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण बिजली उपलब्ध हो।
बिजली की मांग में हर वर्ष 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि
बैठक में जानकारी दी गई कि दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग लगातार बढ़ रही है। वर्ष 2025 में राजधानी की पीक बिजली मांग लगभग 8,400 मेगावाट तक पहुंच चुकी है। दिल्ली में बिजली की मांग में औसतन हर वर्ष 4 से 5 प्रतिशत की वृद्धि देखी जा रही है, जिसका मुख्य कारण बढ़ती आबादी, एयर कंडीशनर व अन्य विद्युत उपकरणों का अधिक उपयोग तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाया जाना है। यह भी स्पष्ट किया गया कि दिल्ली में बिजली की अधिकतम मांग प्रायः गर्मी के महीनों, विशेषकर जून और जुलाई में दर्ज की जाती है।
बैठक में बताया गया कि दीर्घकालिक आकलन के अनुसार यदि वर्तमान रुझान जारी रहा तो वर्ष 2030 तक दिल्ली की अधिकतम बिजली मांग 11,500 से 12,000 मेगावाट के स्तर तक पहुंच सकती है। वहीं दीर्घकालिक परिदृश्य में वर्ष 2040 तक यह मांग लगभग 19,000 से 20,000 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार इस बढ़ती मांग को चुनौती नहीं बल्कि अवसर मानते हुए बिजली तंत्र को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप ढाल रही है, ताकि वर्ष 2029 तक भी दिल्ली में बिजली आपूर्ति पर कोई दबाव न पड़े।
सूर्य घर योजना में तेजी लाने के निर्देश
बैठक में प्रधानमंत्री सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना पर भी विस्तार से चर्चा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि सौर ऊर्जा दिल्ली के स्वच्छ ऊर्जा भविष्य का महत्वपूर्ण आधार है। उन्होंने इस योजना को अधिक आकर्षक और नागरिकों के अनुकूल बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। विशेष रूप से सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर सिस्टम की स्थापना को तेज करने के निर्देश दिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सौर ऊर्जा के लाभों को जन-जन तक पहुंचाने के लिए एक व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी शुरू करेगी। मुख्यमंत्री ने डीटीएल व वितरण कंपनियों को अंतिम छोर तक बिजली आपूर्ति को और बेहतर बनाने, फॉल्ट की स्थिति में तेजी से बहाली और उपभोक्ताओं को न्यूनतम असुविधा सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देने को कहा।
फ्लाईओवरों के नीचे संरचनाएं स्थापित करने पर विचार
मुख्यमंत्री को यह भी बताया गया कि कृषि भूमि पर सोलर पैनल लगाने की प्रक्रिया को सरल बनाया जा रहा है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह पहल दिल्ली के ऊर्जा प्रबंधन को गति देगी और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने में सहायक होगी। बैठक में अनुपयोगी और कम उपयोग में आ रही भूमि के बेहतर उपयोग पर भी विचार किया गया।
मुख्यमंत्री ने डिस्कॉम को निर्देश दिए कि वे फ्लाईओवरों के नीचे और अन्य उपयुक्त स्थानों पर वितरण संरचना स्थापित करने की संभावनाओं का गंभीरता से अध्ययन करें, ताकि भूमि की कमी के बावजूद बिजली तंत्र को और अधिक कुशल बनाया जा सके। बैठक में मुख्यमंत्री ने विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में वितरण अवसंरचना की कमी को देखते हुए सभी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास कार्य मिशन मोड में पूरा करने के निर्देश दिए।
मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार का लक्ष्य केवल वर्तमान जरूरतों को पूरा करना नहीं है, बल्कि आने वाले वर्षों में राजधानी को विश्वसनीय, सतत और उपभोक्ता-केंद्रित बिजली व्यवस्था का आदर्श मॉडल बनाना है।
उन्होंने सभी संबंधित एजेंसियों से वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने, आपसी समन्वय मजबूत करने और सभी परियोजनाओं को समय पर पूरा करने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ‘विकसित दिल्ली’ की परिकल्पना को प्रभावी रूप से साकार करने के लिए राजधानी के बिजली तंत्र को मजबूत, आधुनिक और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार बनाने को कृतसंकल्प है। इसी दिशा में दिल्ली सरकार लगातार ठोस कदम उठा रही है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को सुरक्षित और स्थायी ऊर्जा भविष्य मिल सके।




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