दिल्ली सरकार ने बढ़ाए निगमायुक्त के वित्तीय अधिकार, ये होंगे 5 प्रमुख फायदे
दिल्ली नगर निगम (MCD) के विकास कार्यों को गति देने के लिए दिल्ली सरकार ने अहम निर्णय लिया है। सरकार ने निगमायुक्त के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि की है। निगमायुक्त अपने स्तर पर ही 50 करोड़ रुपये तक की योजनाओं और कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर सकेंगे।

राजधानी में दिल्ली नगर निगम (MCD) के विकास कार्यों को गति देने के लिए दिल्ली सरकार ने महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। सरकार ने दिल्ली नगर निगम आयुक्त के वित्तीय अधिकारों में वृद्धि की है। निगम आयुक्त अपने स्तर पर ही 50 करोड़ रुपये तक की योजनाओं और कार्यों को स्वीकृति प्रदान कर सकेंगे।
सरकार के अनुसार, इससे न केवल निर्णय-प्रक्रिया तेज होगी बल्कि बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा कर जनता को शीघ्र लाभ मिलना सुनिश्चित किया जा सकेगा। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता का कहना है कि दिल्ली के विकास के लिए स्थानीय निकायों को सशक्त करना सरकार की प्राथमिकता है। यह निर्णय जनहित को सर्वोपरि रखते हुए लिया गया दूरदर्शी प्रशासनिक कदम है। इसका सीधा लाभ राजधानी की जनता को मिलेगा। इस कदम के बाद सड़कों, नालों, सफाई व्यवस्था, सामुदायिक सुविधाओं और अन्य बुनियादी नागरिक सेवाओं से जुड़े कार्य पहले की तुलना में अधिक तेजी से पूरे होंगे। लंबे समय तक लंबित रहने वाली परियोजनाओं में तेजी आएगी, जिससे नागरिकों को दैनिक जीवन में आने वाली असुविधाओं से राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के समयबद्ध क्रियान्वयन से संसाधनों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा।
लटकी परियोजनाओं में आएगी तेजी
सूत्रों ने बताया कि निगम में कई परियोजनाएं केवल इसलिए लटकी हुई थीं क्योंकि 5 करोड़ से अधिक बजट होने के चलते उन्हें बहुस्तरीय अनुमति की आवस्यकता थी। लेकिन दिल्ली सरकार के इस निर्णय से इन परियोजनाओं में तेजी आएगी।
इतिहास में पहली बार इतनी राशि की मंजूरी मिली
पूर्ववर्ती उत्तरी और पूर्वी नगर निगम के प्रेस एवं सूचना विभाग के पूर्व निदेशक योगेंद्र सिंह मान ने बताया कि यह दिल्ली नगर निगम के इतिहास में पहली बार है, जब निगम आयुक्त को 50 करोड़ रुपये तक फंड से जुड़े प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने की अनुमति मिली है। इससे निगम से जुड़े कार्यों में तेजी आएगी।
पांच प्रमुख फायदे
1. पांच करोड़ रुपये से अधिक और 50 करोड़ रुपये के फंड तक के प्रोजेक्ट को अब निगम आयुक्त खुद स्वीकृत कर सकेंगे। इससे छोटे प्रोजेक्ट को जल्द शुरू करने और पूरा करने में तेजी आएगी।
2. निगम अफसर 50 करोड़ रुपये तक के प्रोजेक्ट से जुड़ी डीपीआर के प्रस्ताव तैयार कर सीधे निगम आयुक्त से स्वीकृत करा सकेंगे।
3. कई परियोजनाओं जैसे कुछ वार्डों, मध्य जोन और अन्य जोन में अपशिष्ट प्रबंधन, व्यवस्था के नवीनीकरण जैसे कार्य में तेजी आएगी।
4. अभी पांच करोड़ से अधिक के प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने के लिए स्थायी समिति, सदन से स्वीकृत जरूरी थी, इसमें लगने वाला समय बचेगा।
5. निगम के सभी जोन में कई प्रोजेक्ट सीधे आयुक्त स्वीकृत कर सकेंगे। ऐसे में स्कूल, बुनियादी सेवाओं से जुड़ी तमाम 50 करोड़ रुपये तक की राशि की परियोजनाओं को जल्द शुरू किया जा सकेगा।
देशभर में निकायों की स्थिति
● मुबंई में बीएमसी आयुक्त को ढाई करोड़ तक के फंड से जुड़े प्रोजेक्ट को स्वीकृत करने की शक्ति है।
● बेंगलुरु में निगम आयुक्त को तीन करोड़ जबकि हैदराबाद में निगम आयुक्त को 20 लाख तक के फंड को स्वीकृत करने की अनुमति है।
● चेन्नई में निगम आयुक्त को 30 लाख, चंडीगढ़ में 50 लाख तक के फंड स्वीकृत करने की अनुमति है।




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