दिल्ली में नया निर्भया कांड; चलती बस में गैंगरेप क बाद थी खून से लथपथ, मजबूर इतनी कि अस्पताल में इलाज भी नहीं कराया
चलती बस में गैंगरेप के बाद वह खुद खून से लथपथ थी, असहनीय दर्द से गुजर रही थी… लेकिन इतनी मजबूर थी कि अस्पताल में भर्ती नहीं हो सकी। बीमार पति और छोटे बच्चों की वजह से पीड़िता ने कहा कि वह घर पर ही अपना इलाज कराएगी।

16 दिसंबर 2012 की रात दिल्ली के वसंत कुंज इलाके में सड़क पर चलती एक बस में निर्भया के साथ जिस तरह की दरिंदगी हुई उसने पूरे देश को हिला दिया था। करीब 14 साल बाद एक बार फिर राजधानी की हमेशा व्यस्त रहने वाली सड़कों पर 30 साल की एक 'नई निर्भया' के साथ उसी तरह घटना को अंजाम दिया गया है। गनीमत है कि पीड़िता की जान बच है, पर वह जिस तरह दरिंदगी का शिकार हुई और खून से लथपथ हालत में बस से फेंके जाने के बाद भी अस्पताल में इलाज ना करा सकी, उसकी दशा और मजबूरियां रुलाने वाली हैं।
घटना सोमवार रात राजधानी के रानी बाग इलाके में घटी। पीतमपुरा की झुग्गियों में गरीबी और बीमारी की मजबूरियों से संघर्ष कर रही 30 साल की पीड़िता 3 बच्चों की मां है। उसके पति टीबी की बीमारी से जूझ रहे हैं और इसलिए काम पर नहीं जा पाते। ऐसे में वह एक फैक्ट्री में घंटों मेहनत करके किसी तरह बच्चों के भोजन और पति की दवा का इंतजाम कर पाती है। उस दिन भी वह देर रात तक फैक्ट्री में काम करने के बाद घर जाने के लिए निकली थी। सरस्वती विहार में बी-ब्लॉक बस स्टैंड के पास पहुंची, तो उसने एक आरोपी को बस के दरवाजे के पास खड़ा देखा और उससे समय पूछा। इसके बाद आरोपी ने कथित तौर पर उसे बस के अंदर खींच लिया और उसके साथ गैंगरेप किया किया।
चलती बस में 2 घंटे तक दरिंदगी और खून से लथपथ हालत में फेंका
एसी बस के बंद शीशों और पर्दों के पीछे करीब दो घंटे तक पीड़िता को हवस का शिकार बनाया गया। बारी-बारी से दो आरोपी उसके साथ रेप करके रहे। इस दौरान बस सात किलोमीटर तक सड़क पर चलती रही। रात के करीब 2 बज चुके थे और पीड़िता जुल्म सहते हुए बदहवास हो चुकी थी। आरोपियों ने हवस मिटाने के बाद पीड़िता को चलती बस से नीचे फेंक दिया और फरार हो गए। खून से लथपथ हो चुकी पीड़िता ने पुलिस को सूचना दी।
क्यों अस्पताल में नहीं रही भर्ती
मौके पर पहुंची एक महिला सब-इंस्पेक्टर पीड़िता को बाबासाहेब अंबेडकर अस्पताल ले गईं। मेडिकल जांच में गैंगरेप की पुष्टि हुई। डॉक्टरों ने पीड़िता की गंभीर हालत को देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती करने की प्रक्रिया शुरू की। लेकिन पीड़िता ने अपनी मजबूरियां बताते हुए कहा कि वह अस्पताल में नहीं रह सकती है। उसे हर हाल में घर जाना ही होगा। पीड़िता ने कहा कि उसके पति को टीबी है और वे घर पर ही रहते हैं। 8, 6 और 4 साल है के तीन छोटे बच्चे हैं। पीड़िता ने कहा कि यदि वह अस्पताल में भर्ती रही तो बच्चों को खाना और पति को दवा कौन देगा? उसने असहनीय दर्द के बावजूद घर जाने की इजाजत मांगी और कहा कि वह घर पर रहकर ही दवा कराएगी।




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