घटनाएं स्थिर, मौतें 4 गुना तक बढ़ीं; दिल्ली में हर साल कितनों को निगल रही आग?
Delhi fire incidents: डिपार्टमेंट ऑफ दिल्ली फायर सर्विस के पिछले 15 सालों के आंकड़ों को देखने पर रूह कांप जाती है। सरल भाषा में कहें, तो 5 साल में आग में जलकर मरने वालों की संख्या में 4 गुना तक उछाल आया है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि आग लगने की घटनाएं लगभग स्थिर हैं।

Delhi fire incidents: दिल्ली के विवेक विहार स्थित इमारत में लगी भीषण आग, 9 की जलकर मौत। रविवार सुबह घटे इस हादसे से पहले पालम इलाके की 5 मंजिला इमारत में आग लगी थी, जिसमें एक ही परिवार के 9 लोगों की जलकर मौत हो गई थी। डिपार्टमेंट ऑफ दिल्ली फायर सर्विस के पिछले 15 सालों के आंकड़ों को देखने पर रूह कांप जाती है। सरल भाषा में कहें, तो 5 साल में आग में जलकर मरने वालों की संख्या में 4 गुना तक उछाल आया है। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि आग लगने की घटनाएं लगभग स्थिर हैं। ऐसे में दिल्ली के फायर सिस्टम पर सबसे ज्यादा सवाल उठ रहे हैं।
घटनाएं स्थिर, मौतें 4 गुना तक बढ़ीं…
आंकड़ों के मुताबिक 2019-20 में आग से 308 लोगों की मौत हुई थी। 2020-21 में यह संख्या 346 रही, जो 2021-22 में बढ़कर 591 हो गई। इसके बाद 2022-23 में 1029 और 2023-24 में 1303 मौतें दर्ज की गईं। यानी सिर्फ पांच साल में मौतों का आंकड़ा चार गुना के करीब पहुंच गया। इसके उलट फायर कॉल्स का डेटा लगभग स्थिर है- 2019-20 में 31,157 कॉल्स और 2023-24 में 31,575 कॉल्स। मतलब साफ है- आग की घटनाएं नहीं बढ़ीं, लेकिन उनका असर अब ज्यादा घातक हो गया है।
मौतें 4 गुना, तो घायलों में भी रिकॉर्ड उछाल
आग अब सिर्फ जानलेवा नहीं रही, बल्कि ज्यादा लोगों को झुलसाने लगी है। पिछले कुछ सालों के आंकड़े बताते हैं कि जहां मौतों में तेज उछाल आया है, वहीं घायलों की संख्या भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। 2021-22 में 1421 लोग घायल हुए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 3232 हो गए। यानी महज तीन साल में यह संख्या दोगुने से भी ज्यादा हो गई। यह ट्रेंड संकेत देता है कि आग की घटनाएं भले ही स्थिर हों, लेकिन उनका असर अब ज्यादा व्यापक और खतरनाक हो गया है, जिससे अधिक लोग इसकी चपेट में आ रहे हैं।


हर साल आग लगने की कितनी घटनाएं सामने आ रहीं
डिपार्टमेंट ऑफ दिल्ली फायर सर्विस के आंकड़े बताते हैं कि राजधानी में आग की घटनाएं बीते कई सालों से लगभग एक ही स्तर पर बनी हुई हैं। 2019-20 में जहां 31,157 फायर कॉल दर्ज हुई थीं, वहीं 2023-24 में यह संख्या 31,575 रही। यानी पांच साल में कोई बड़ा उछाल नहीं। बीच में 2020-21 में कॉल्स घटकर 25,709 जरूर हुईं, लेकिन इसके बाद फिर से आंकड़े 27 से 31 हजार के बीच स्थिर हो गए। रोज के हिसाब से देखें तो दिल्ली में औसतन 75 से 85 फायर कॉल आती हैं, यानी हर घंटे तीन से ज्यादा घटनाएं। साफ है कि आग लगने की घटनाएं तेजी से नहीं बढ़ रहीं, बल्कि लगभग एक ही स्तर पर बनी हुई हैं।
दिल्ली में 66 फायर स्टेशन, फिर भी समस्या बरकरार
अब अगर फायर सिस्टम की मजबूती की बात करें, तो इनसे निपटने के लिए 66 फायर स्टेशन और करीब 245 फायर फाइटिंग गाड़ियां हैं। कागज पर यह सिस्टम बड़ा और व्यवस्थित दिखाई देता है, लेकिन हादसों के दौरान जमीन पर तस्वीर बहुत ही भयानक दिखाई देती है। उसके पीछे की वजह, सिर्फ कमजोर या असफल फायर सिस्टम जिम्मेदार नहीं होता, बल्कि दिल्ली की बसावट होती है। क्योंकि यहां की भीड़भाड़ वाली कॉलोनियां, संकरी गलियां, यहां होने वाला अवैध निर्माण और ट्रैफिक जाम जैसी समस्याएं आग की घटना को और भी विकराल बना देती हैं।




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