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दिल्ली में कहां मिलेगी कश्मीर के डल झील वाली फील? हाउसबोट भी, DDA खर्चेगी 4 करोड़

 डीडीए इसके लिए 4 करोड़ खर्च करने वाला है। यह सब कुछ होगा बांसेरा पार्क में। 60 फीट लंबी संरचना पारंपरिक कश्मीरी हाउस-बोट जैसी दिखेगी, जिस पर फारसी शैली में बेहद खूबसूरत नक्काशी की जाएगी। इसे पार्क के रेस्तरां के पास जमीन पर स्थायी रूप से लगाया जाएगा। 

Mon, 19 Jan 2026 01:12 PMUtkarsh Gaharwar लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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दिल्ली में कहां मिलेगी कश्मीर के डल झील वाली फील? हाउसबोट भी, DDA खर्चेगी 4 करोड़

जल्द ही दिल्लीवालो को कश्मीर की डल झील वाला फील राजधानी में मिलेगा। इसके लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण प्लान बना रहा है, एक हाउसबोट भी होगी जिसमें मनोरंजन और आराम की कई सुविधाएं होंगी। डीडीए इसके लिए 4 करोड़ खर्च करने वाला है। यह सब कुछ होगा बांसेरा पार्क में। 60 फीट लंबी संरचना पारंपरिक कश्मीरी हाउस-बोट जैसी दिखेगी, जिस पर फारसी शैली में बेहद खूबसूरत नक्काशी की जाएगी। इसे पार्क के रेस्तरां के पास जमीन पर स्थायी रूप से लगाया जाएगा और अनुमान है कि यह करीब 50 साल तक सुरक्षित रहेगी।

अधिकारियों के अनुसार, इस हाउस-बोट में एक मल्टी-पर्पज हॉल, लॉबी, रसोई (पेंट्री), स्टोर और शौचालय की सुविधा होगी। साथ ही इसके आगे और पीछे के हिस्से में बैठने और खाने की जगह (डेक) भी होगी। इसके बीच वाले हिस्से में एक कांच का हॉल बनाया जाएगा, जहां 15 लोग मिलकर मीटिंग या छोटे कार्यक्रम कर सकेंगे। इसमें बालकनी भी होगी और दोनों तरफ से सीढ़ियों के जरिए अंदर जाने का रास्ता दिया जाएगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट की मानें तो परियोजना में तेज़ी लाने के लिए, प्राधिकरण ने हाउस-बोट बनाने वाली एजेंसी चुनने के लिए टेंडर की प्रक्रिया शुरू कर दी है। काम सौंपे जाने के बाद इसे छह महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ठेकेदार को काम मिलने के 30 दिनों के भीतर या काम शुरू होने से पहले, चुनिंदा संस्थानों से प्रमाणित स्ट्रक्चरल ड्राइंग जमा करनी होगी।

टेंडर प्रस्ताव के अनुसार, "इस काम में हाउस-बोट की नींव, स्टील का ढांचा, लकड़ी की सजावट, प्लंबिंग और जल निकासी व्यवस्था का डिजाइन और निर्माण शामिल है।" पूरी बनावट में कई तरह की लकड़ियों का इस्तेमाल होगा: आधार (बेस) के लिए देवदार, ढांचे के लिए सीडर (देवदार की एक प्रजाति) और खूबसूरत नक्काशी के लिए अखरोट (walnut) की लकड़ी का प्रयोग किया जाएगा। छतों और अंदर की दीवारों के पैनल चिनार की लकड़ी से तैयार किए जाएंगे। मजबूती और स्थिरता देने के लिए ज़मीनी स्तर पर कंक्रीट की नींव बनाई जाएगी।

dal lake like

अधिकारियों के अनुसार, रेलिंग और खंभों से लेकर मेहराब और बाहरी दीवार के पैनलों तक, हर चीज पर कुशल कारीगरों की ओर सेफारसी शैली में बारीक नक्काशी की जाएगी। इसके अलावा, सीडर (Cedar) लकड़ी से बनी खिड़कियों में कांच के पल्लों के साथ नक्काशीदार डिजाइन भी होंगे। इस ढांचे में इस्तेमाल होने वाली लकड़ी को अच्छी तरह से सुखाया जाएगा ताकि वह समय के साथ मुड़े नहीं। साथ ही जोड़ों को प्राकृतिक राल या अन्य टिकाऊ सीलेंट्स से बंद किया जाएगा ताकि यह हर मौसम में सुरक्षित रहे। सुरक्षा के लिए लकड़ी पर आग से बचाने वाली पेंट की दो परतें चढ़ाई जाएंगी। इसकी छत पर पर्यावरण के अनुकूल और हल्के 'कैल्शियम सिलिकेट' के टाइल्स लगाए जाएंगे, जबकि बाहरी डेक वाले हिस्सों में लकड़ी की रेलिंग और दरवाजों के फ्रेम लगाए जाएंगे।

आधार तल (बेस लेवल) पर फर्श बनाने के लिए इंजीनियर्ड वुड का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि दीवारों को आग से सुरक्षित रखने वाले बोर्ड और लकड़ी के पैनलों से तैयार किया जाएगा। रसोई और अन्य जरूरी हिस्सों में सिरेमिक टाइलें लगाई जाएंगी और दरवाजे भी आग प्रतिरोधी लकड़ी से बने होंगे। यह परियोजना निजामुद्दीन पुल से डीएनडी फ्लाईवे (पश्चिमी तट) तक यमुना खादर (floodplain) के पुनरुद्धार और सौंदर्यीकरण का हिस्सा है। पिछले कुछ वर्षों में बांसेरा पार्क में मनोरंजन की सुविधाओं का लगातार विस्तार हुआ है। नवंबर 2024 में प्राधिकरण ने यहाँ 'कैफे बैम्बू ओएसिस' खोला था और 1 दिसंबर 2025 को एक हॉट-एयर बैलून की सुविधा भी जोड़ी गई। यह पार्क कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मेजबानी भी करता है, जिसमें आगामी 'पलाश उत्सव' प्रमुख है।

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