क्योंकि जज एक महिला है....; CM रेखा गुप्ता का अरविंद केजरीवाल पर बड़ा हमला
दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, विपक्ष की महिला विरोधी सोच के कारण आज महिलाओं को आरक्षण नहीं मिल सका।

दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने मंगलवार को विधानसभा के एक दिन के विशेष सत्र में विपक्ष पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा, विपक्ष की महिला विरोधी सोच के कारण आज महिलाओं को आरक्षण नहीं मिल सका। इस दौरान उन्होंने अरविंद केजरीवाल के जस्टिस स्वर्ण कांता के सामने पेश ना होने के फैसले पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, मुझे तो इसमें भी अरविंद केजरीवाल का महिला विरोधी चेहरा नजर आता है। क्योंकि जज एक महिला है और वह ईमानदारी से फैसला सुनाएगी। उन्हें पता है कि उनका गुनाह उजागर होकर रहेगा। इसलिए वो ये सब नौटंकी कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आम आदमी पार्टी की सोच पर सवाल उठाते हुए कहा कि कैसे आदमी हैं यह। कह रहे हैं सत्याग्रह करूंगा। जिस शब्द से हमें आजादी मिली, उस शब्द का कैसे दुरुपयोग कर रहे हैं। आज महात्मा गांधी को कितनी पीड़ा हो रही होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे व्यवहार से सदन की कार्यवाही भी प्रभावित होती है और यह ‘मेरी मर्जी’ वाली मानसिकता को दर्शाता है, जहां व्यक्ति खुद को कानून से ऊपर समझकर न्यायिक प्रक्रिया से बचने की कोशिश करता है। कोई व्यक्ति खुद ही मुजरिम, गवाह, वकील और न्यायाधीश बनने लगे, यह लोकतंत्र के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय केवल न्यायपालिका ही करेगी। उन्होंने कहा कि जनता को गुमराह किया गया है और किए गए कार्यों का परिणाम जरूर सामने आएगा। साथ ही, उन्होंने आतिशी के प्रति संवेदना जताते हुए कहा कि जिस परिस्थितियों में वे काम कर रही हैं, वे कठिन हैं।
सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र सरकार ने विधानसभाओं और लोकसभा में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित करने के लिए ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ पारित किया था। इसके लिए 131वां संविधान संशोधन विधेयक भी प्रस्तुत किया ताकि महिलाओं को जल्द लाभ मिल सके। लेकिन 16, 17 और 18 अप्रैल के दिन भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक दुखद अध्याय के रूप में दर्ज हुए हैं। इन दिनों पूरे देश की महिलाएं लोकसभा की ओर आशा भरी निगाहों से देख रही थीं कि 78 वर्षों का लंबा इंतजार अब समाप्त होगा और उन्हें विधानसभाओं तथा लोकसभा में प्रतिनिधित्व का अवसर मिलेगा। लेकिन इन दिनों हुई चर्चाओं ने निराशा ही दी।
क्यों जरूरी है महिला आरक्षण
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण इसलिए जरूरी है क्योंकि महिलाओं को सामाजिक बाधाओं और चुनौतियों का सामना पुरुषों की तुलना में अधिक करना पड़ता है। ऐसे में केवल अधिकार नहीं, बल्कि विशेष प्रावधान ही समान अवसर सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने बताया कि आरक्षण और जनसमर्थन के जरिए ही उन्हें जनसेवा का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि पंचायत व स्थानीय निकायों में बड़ी संख्या में महिलाएं चुनी जाती हैं, लेकिन विधानसभा और संसद तक उनकी भागीदारी काफी कम रह जाती है। देश में लगभग 4600 विधायकों में केवल 10 प्रतिशत महिलाएं हैं और लोकसभा-राज्यसभा में भी उनकी हिस्सेदारी करीब 13-14 प्रतिशत ही है, जो अवसरों की कमी को दर्शाता है।
‘अधिकार मिले, अवसर नहीं मिले’
मुख्यमंत्री ने कहा कि संविधान ने महिलाओं को समान अधिकार और चुनाव का अवसर तो दिया, पर केवल इससे वे आगे नहीं बढ़ सकीं और उन्हें राजनीतिक अवसरों से वंचित रखा गया। उन्होंने बताया कि महिला आरक्षण विधेयक 27 वर्षों में सात बार संसद में आया, लेकिन हर बार रोका गया। कई दलों ने बाधाएं खड़ी कीं और महिलाओं को सीमित भूमिका में रखा, जबकि भाजपा ने उन्हें आगे बढ़ने के अवसर दिए।
2014 के बाद बदला महिलाओं का परिदृश्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को लंबे समय तक भ्रूण हत्या, बाल विवाह और अन्य सामाजिक कुरीतियों के साथ-साथ बुनियादी जरूरतों के लिए भी संघर्ष करना पड़ा। 2014 के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तीकरण की दिशा में व्यापक बदलाव आए हैं। स्वच्छता, उज्ज्वला योजना, जल जीवन मिशन, जनधन, मुद्रा और पोषण जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर को सुधारने, उनकी सुविधाएं बढ़ाने और उन्हें अधिक आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
तकनीकी बहानों से रोका गया विधेयक
उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ लाया गया, जो महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम था। इसके क्रियान्वयन में तकनीकी प्रक्रियाओं, जैसे परिसीमन आदि के कारण समय लगने की संभावना को देखते हुए, सरकार ने इसे शीघ्र लागू करने के उद्देश्य से आवश्यक संशोधनों का प्रस्ताव रखा। लेकिन विपक्षी दलों ने इस दिशा में भी आपत्तियां उठाकर और तकनीकी मुद्दों को आधार बनाकर इस विधेयक को पारित होने से रोकने का प्रयास किया। यह स्पष्ट रूप से महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित रखने का प्रयास है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह विषय केवल एक विधेयक का नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के अधिकार और सम्मान का है। किसी भी पुरुष प्रतिनिधि के लिए अपनी सीट छोड़कर महिला को स्थान देना सहज निर्णय नहीं होता। इसी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुए ऐसा प्रारूप प्रस्तावित किया गया, जिसमें सीटों की संख्या बढ़ाकर महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जा सके। इस व्यवस्था से क्षेत्रीय दलों को भी लाभ होता और दक्षिण भारत के राज्यों की सीटों पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ता।
विपक्ष के तर्कों पर सवाल
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझ से परे है कि इस प्रस्ताव में विपक्ष को आपत्ति किस बात पर थी, जबकि इसमें सभी पक्षों के हितों का ध्यान रखा गया था। विपक्षी दलों ने महिलाओं के हितों की उपेक्षा की, जबकि वही महिलाएं उनके लिए मतदान करती हैं और उन्हें सत्ता तक पहुंचाती हैं। कुछ विपक्षी दलों ने मुस्लिम महिलाओं के हितों का मुद्दा उठाया, लेकिन इतिहास इस बात का साक्षी है कि शाह बानो प्रकरण में, जब न्यायालय ने महिला के पक्ष में निर्णय दिया, तब तत्कालीन राजीव गांधी जी की सरकार ने कानून बनाकर उस निर्णय को निरस्त कर दिया, जिससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकार प्रभावित हुए। यही नहीं, जब तीन तलाक समाप्त करने की बात आई, तब भी विपक्ष ने उसका समर्थन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि ओबीसी महिलाओं के संदर्भ में ‘कोटे में कोटा’ की मांग भी केवल बहाने के रूप में प्रस्तुत की गई, जबकि पूर्व में इस दिशा में कोई ठोस पहल नहीं की गई। विभिन्न तकनीकी और राजनीतिक मुद्दों को आधार बनाकर इस विधेयक को टालने का प्रयास किया गया, जबकि मूल उद्देश्य केवल महिलाओं को उनका अधिकार दिलाना था। आज महिलाओं के नाम पर केवल मुद्दों को उलझाने का प्रयास किया जा रहा है। कभी 543 सीटों की बात, कभी 850 सीटों की, कभी परिसीमन की, कभी क्षेत्रीय संतुलन की। इस विधेयक के पारित न होने के बाद जिस प्रकार कुछ दलों द्वारा उत्सव मनाया गया, वह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पूरे घटनाक्रम ने यह भी दर्शाया कि कुछ नेताओं और दलों की सोच महिलाओं के प्रति कितनी असंवेदनशील रही है।
महिलाओं के प्रति असंवेदनशील सोच पर प्रहार
उन्होंने कहा कि समय-समय पर कई नेताओं द्वारा महिलाओं के प्रति असम्मानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई हैं, जो उनके दृष्टिकोण को उजागर करती हैं। उन्होंने दिग्विजय सिंह, मुलायम सिंह यादव, आजम खान द्वारा की गई टिप्पणियों का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन नेताओं द्वारा महिलाओं पर की गई टिप्पणियां उनकी विकृत सोच को दर्शाती हैं। केवल पुरुष की नहीं, विपक्ष की महिला नेता ममता बनर्जी और प्रियंका गांधी द्वारा महिलाओं के बारे में की गई आपत्तिजनक टिप्पणियों का भी जिक्र करते हुए निराशा जताई। उन्होंने कहा कि महिला नेताओं द्वारा की गई इस तरह की बातें उनके विरोधाभास को उजागर करती हैं। समाज और विशेष रूप से देश की महिलाएं ऐसे व्यवहार और सोच को कभी नहीं भूल सकतीं।




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