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मुझे तो महाभ्रष्ट कह दिया था…; केजरीवाल ने जब अदालत में जज को ही सुना डाला, बताया क्यों उन पर शक

दिल्ली हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपनी दलीलें खुद रखते हुए जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा को बताया कि क्यों उन्हें उन पर पूरा भरोसा नहीं है। केजरीवाल की मांग है कि जस्टिस शर्मा इस केस से खुद को अलग कर लें।

Mon, 13 April 2026 03:28 PMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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मुझे तो महाभ्रष्ट कह दिया था…;  केजरीवाल ने जब अदालत में जज को ही सुना डाला, बताया क्यों उन पर शक

दिल्ली हाई कोर्ट में सोमवार को एक बार फिर पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल एक तेज तर्रार वकील की तरह अपनी दलीलें रखते नजर आए। जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा से कथित शराब घोटाले से जुड़े केस से अलग हो जाने की मांग करते हुए आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया ने कई दलीलें पेश कीं। अदालत में सुनवाई 'धन्यवाद, सेवा, इज्जत' जैसे शब्दों और भावों के साथ हुई, लेकिन जल्द ही केजरीवाल बेहद तीखे नजर आए और उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उन्हें जज को लेकर मन में आशंकाएं हैं।

अदालत ने केजरीवाल को बहस की इजाजत देते हुए कहा कि वह (केजरीवाल) खुद अपनी दलीलें देंगे। उन्होंने किसी वकील को ऑथराइज नहीं किया है। इस पर अरविंद केजरीवाल ने कहा- मैं आपका धन्यवाद करना चाहता हूं।' बेंच ने कहा, ‘हम तो आपकी सेवा के लिए ही हैं।’ केजरीवाल ने कहा, 'मैं निजी तौर पर आपकी बहुत इज्जत करता हूं। न्यायालय की इजजत करता हूं।' बेंच ने कहा, 'सम्मान म्यूचुअल है। हम सिर्फ इस आवेदन पर केंद्रित रहेंगे। कुछ व्यक्तिगत नहीं। मैं आपका सहयोग करने के लिए हूं। आप अपनी दलीलें शुरू कर सकते हैं।'

पूर्व सीएम ने कहा, 'मैं आज एक आरोपी की तरह नहीं खड़ा हूं। मुझे आरोपमुक्त किया जा चुका है।' अदालत ने कहा कि आप रिक्यूसल पर बहस करिए। उस पर केंद्रित रहिए। बेंच ने पाया कि एक वकील केजरीवाल की मदद कर रहे हैं। इस पर जस्टिस शर्मा ने कहा, 'उन्होंने किसी को ऑथराइज्ड नहीं किया है। प्रॉक्सी नहीं करेंगे आप। देखिए मिस्टर केजरीवाल आज हम रेक्यूसल सुन रहे हैं। आप सीधा उस पर आइए।' केजरीवाल ने कहा, 'मैडम मुझे 2 मिनट सुन लीजिए।' जज ने कहा- सुनाइए।

केजरीवाल ने कहा, '9 मार्च को जब इस केस की सुनवाई हुई तो सीबीआई के अलावा कोई मौजूद नहीं था। दूसरे पक्ष को सुने बिना, किसी का जवाब लिए बिना इस अदालत ने ऑर्ड पास किया कि प्रथम दृष्टया आदेश त्रुटिपूर्ण है। जो आदेश ट्रायल कोर्ट ने पूरा-पूरा दिन सुनवाई करके ऑर्डर साप सकिया था, 40 हजार पन्नों के दस्तावेजों को पढ़कर उस आदेश को इस अदालत ने 5 मिनट की सुनवाई के बाद त्रुटिपूर्ण करार दे दिया।'

पूर्व सीएम ने कहा, '9 मार्च का जब आदेश आया तो मेरा दिल बैठ गया। मुझे इस पर गंभीर आपत्ति है।इसलिए मैंने चीफ जस्टिस को लेटर लिखा।चीफ जस्टिस ने रिजेक्ट कर दिया। चीफ जस्टिस का लेटर मिलने के बाद मैंने यह आवेदन दायर किया।'

केजरीवाल ने रिक्यूजल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया। केजरीवाल ने कहा, 'रजनीकांत ठाकुर बनाम यूनियन ऑफ इंडिया में उन्होंने साफ-साफ कहा है कि जज को ये नहीं देखना है कि वह पक्षपाती नहीं लेकिन अगर पार्टी के मन में शंका है तो रिक्यूजल का मामला है। इसलिए मैं यहां आपके सामने व्यक्तिगत तौर पर है। एक मेरी छोटी सी बात है कि मेरे मन में जो आशंका है वह मेरे और अदालत के बीच है। सीबीआई को इस में पार्टी नहीं बनाना चाहिए।'

केजरीवाल ने सत्येंद्र जैन बनाम ईडी के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि इस केस में बेल की सुनवाई चल रही थी। 6 दिन की सुनवाई हो चुकी थी। आखिरी तारीख थी। अचानक ईडी को आशंका हुई। जिजा जज ने इसे स्वीकार किया। मामला इस अदालत में आया और हाई कोर्ट ने अनुमति दी। उस केस और मेरे केस में काफी समानता है। मैं बस यह चाहता हूं कि ईडी की तरह मेरी बात मानी चाहिए। खासकर तब जब आशंका मजबूत आधार पर है।

आशंकाओं की 10 वजहें गिना सकता हूं: केजरीवाल

अदालत ने केजरीवाल की बातों को रिकॉर्ड करते हुए कहा, 'मैं आपकी दलीलों को साथ साथ लिखा देती हूं।' केजरीवाल ने कहा, 'इसलिए कानून स्पष्ट है। मुद्दा यह नहीं कि जज पक्षपाती है या नहीं, बल्कि यह कि वादी के मन में आशंका है। मैं आपके सामने 10 कारण बताऊंगा कि मुझे क्यों आशंका है।'

आप के मुखिया ने कहा, ‘इस अदालत के सामने पहले 5 केस आ चुके हैं। मेरा केस आया था गिरफ्तारी का। संजय सिंह, के कविता और अमन ढल की जमानत याचिकाएं आईं। उनमें इस कोर्ट ने जो टिप्पणियां कीं, वे फैसले की तरह थे। अदालत को वजहों पर फाइनल आदेश देने की जरूरत नहीं थी। ऐसा लगता है कि अदालत ने सिर्फ दो सुनवाई में कई मुद्दों पर आखिरी फैसला ही दे दिया।’

मुझे तो महाभ्रष्ट बता दिया गया, सजा सुनानी ही बाकी थी: केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि एक मुद्दा था सरकारी गवाह का। इसके ऊपर आपकी कई फाइंडिंग है। इसे अभी अंतिम बता दिया गया था। मुझे लगभग भ्रष्ट घोषित कर दिया गया था। मुझे लगभग दोषी करार दे दिया गया था। बस सजा सुनानी रह गई थी। अदालत ने कहा, 'मैं कॉमेंट नहीं करुंगी। यह आपकी सोच है।'अदालत ने केजरीवाल की बातों को नोट किया। इसके बाद केजरीवाल ने अपनी बात को जारी रखते हुए कहा, 'ट्रायल कोर्ट ने कहा है कि कोई भ्रष्टाचार, रिश्वतघोरी और किकबैक नहीं हुआ। कोई गोवा में पैसा नहीं ले जाया गया। जो रिकवरी पर आपकी फाइंडिंग है उस पर कोर्ट ने लिखा है।'

मनीष सिसोदिया के केस का जिक्र

केजरीवाल ने कहा, 'ट्रायल कोर्ट ने बोला जिस तरह सीबीआई ने सरकारी वकील बनाए उनका व्यवाहर पूर्व नियोजित लगता है। अंतिम में ट्रायल कोर्ट ने मुझे पूरी तरह आरोप मुक्त किया, इस अदालत की फाइंडिंग के बावजूद, इसलिए मन में शंका है।' अरविंद केजरीवाल ने सिसोदिया के केस का जिक्र करते हुए कहा, ‘सिसोदिया को दोषी करार दिया गया, जोकि जरूरी नहीं था। एक पैराग्राफ था जहां कहा गया कि ये सारे लोग करप्ट हैं। ऐसा लगा कि हमें सिर्फ भ्रष्ट नहीं महा भ्रष्ट घोषित किया गया।’

बेंच ने कहा, 'मिस्टर जैन आप उनको (केजरीवाल) की मदद कर रहे हो। आप सीधा मेरी ही मदद कर दो ना। वो बिना आपके बहुत अच्छी बहस कर रहे हैं।'केजरीवाल ने कहा कि इस केस में सिर्फ 3 सुनवाई हुई थी और निष्कर्ष निकाल दिया गया कि सिसोदिया बहुत भ्रष्ट आदी हं। इस केस को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। सॉलिसिटर जनरल ने इस बात का खंडन किया। केजरीवाल ने कहा, ‘ट्रायल कोर्ट ने मनीष सिसोदिया को पूरी तरह निर्दोष पाया। यह दिखाता है कि अदालत सिर्फ तथ्यों के प्रति प्रतिबद्ध है। तो अब सवाल ये है कि क्या इस स्टेज पर आके ये कोर्ट बदल पाएगा?’

आपने ट्रायल कोर्ट के आदेश को खारिज किया: केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा कि सीबीआई का पूरा केस सिर्फ सरकारी गवाहों पर है। 9 मार्च के आदेश में आपने अगर उन बयानों पर सवाल खड़े कर दिए तो व्यवहारिक रूप में आपने ट्रायल कोर्ट के पूरे आदेश को खारिज कर दिया। 5-10 मिनट की सुनवाई में ट्रायल कोर्ट का आदेश जो 3 महीने की सुनवाई के बाद आया था। आपकी जो राय सरकारी गवाहों को लेकर है, जब मेरा केस आपके सामने आया था, आपने बोला था कि अप्रूवर के बयान स्वीकार्य हैं। यहां 5 मिनट की सुनवाई के बाद आपने बोला कि ट्रायल कोर्ट की कोर्ट के अप्रूवर पर फाइडिंग त्रिटुपूर्ण है। यह मेरे लिए सबसे अधिक चिंता की बात है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का उल्लंघन हुआ: केजरीवाल

केजरीवाल ने कहा, 'उस दिन 9 मार्च को आपके सामने ट्रायल कोर्ट का रिकॉर्ड भी नहीं था। ऐसी जल्दबाजी की क्या जरूरत थ? उसकी वजह से एक शंका पैदा हुई। 9 मार्च को ईडी के पक्ष में आदेश पारित कर दिया। कोर्ट ईडी के प्रति बहुत दयालु था। नैसर्गिक न्याय के सिद्धांतों के बिना आदेश पारित किया गया। इसके बहुत गंभीर दुष्परिणाम हैं। आज भी मैं ईडी केस में आरोपी हूं। एक मैसेज गया जनता में कि सुनवाई को पेंडिंग रखो कि हम इस डिस्चार्ज ऑर्डर को खारिज करके वापस बेज रहे हैं। ये मैसेज गया लोगों में।'केजरीवाल ने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट का एक आदेश है कि अपवाद के मामलों को छोड़कर डिस्चार्ज के आदेशों पर स्टे नहीं लगाना चाहिए। हमें सुने बिना आंशिक रूप से स्टे लगा दिया गया। मेरी नजर में यह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन है।

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