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केजरीवाल से लेकर रवीश कुमार तक फंसे! कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी पाए जाने पर कितनी होती है सजा

अरविंद केजरीवाल, आम आदमी पार्टी के नेताओं और पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्रवाई की मांग को लेकर याचिका दायर की गई है। अदालत ने सभी को नोटिस जारी करके जवाब मांगा है।

Sat, 25 April 2026 06:43 AMSudhir Jha लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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केजरीवाल से लेकर रवीश कुमार तक फंसे! कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का दोषी पाए जाने पर कितनी होती है सजा

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी (आप) के मुखिया अरविंद केजरीवाल की कानूनी मुश्किलें कम नहीं हो रही हैं। एक तरफ जहां कथित शराब घोटाले से जुड़े केस में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की अदालत ने रिक्यूजल याचिका खारिज कर दी तो अब इस अदालत में जिरह करते हुए वीडियो शेयर करने पर केजरीवाल पर कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट का आरोप लग गया है।

दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए अरविंद केजरीवाल, आप के कई नेताओं, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार को नोटिस जारी करके उनसे जवाब मांगा है। अदालत ने सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स को वीडियो डिलीट करने को भी कहा है। आइए यहां समझते हैं कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट क्या होता है और यदि कोई व्यक्ति इसका दोषी पाया जाए तो कितनी सजा हो सकती है।

क्या है कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट

अदालत के आदेश की जानबूझकर अवहेलना करना या अदालत की गरिमा और न्यायिक प्रक्रिया में बाधा डालने को कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट या अदालत की अवमानना कहा जाता है। सुप्रीम कोर्ट के वकील रुद्र विक्रम सिंह बताते हैं कि कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट दो प्रकार के होते हैं सिविल और क्रिमिनल कंटेम्प्ट। यह कंटेम्प्ट ऑफ कोर्ट ऐक्ट 1971 से गवर्न होता है साथ ही हाई कोर्ट को अनुच्छेद 215 और सुप्रीम कोर्ट को अनुच्छेद 129 के तहत कोर्ट के अवमानना होने पर केस चलाने और सजा देने का अधिकार प्राप्त है।

दोषी को कितनी सजा हो सकती है?

रुद्र विक्रम सिंह बताते हैं कि कोर्ट के ऑर्डर ना मानने या विलंब करने में सिविल कंटेम्प्ट का केस बनता है जबकि कोर्ट को नीचा दिखाने, कोर्ट की कार्यवाही में दखलंदाजी जैसे मामलो में क्रिमिनल कंटेम्प्ट का मामला बनता है। इस ऐक्ट के तहत 6 महीने की सजा या जुर्माने का प्रावधान है। हालांकि ऐसे राजनीतिक मामलों में अक्सर कोर्ट माफी मांगने पर अभियुक्त को कोई सजा नहीं देता। हालांकि, यह अदालत पर निर्भर करता है कि वह किसी की माफी से संतुष्ट होती है या नहीं।

केजरीवाल-रवीश कुमार पर क्यों यह आरोप?

दरअसल, अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि कथित शराब घोटाले से जुड़े केस से जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा खुद को अलग कर लें। इसके लिए दायर याचिका पर उन्होंने खुद पैरवी की थी। 13 अप्रैल को अदालत में केजरीवाल ने एक घंटे से अधिक समय तक जिरह की थी। बाद में इसका वीडियो सोशल मीडिया पर आ गया। अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेताओं समेत कई लोगों ने इसे शेयर किया।

इसी के बाद अधिवक्ता वैभव सिंह ने दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर करते हुए अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया,संजय सिंह समेत आम आदमी पार्टी के कई नेताओं, कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह और वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई और वीडियो डिलीट कराने की मांग की। अदालत ने मेटा, गूगल और एक्स को वीडियो डिलीट करने का आदेश दिया है तो केजरीवाल समेत अन्य सभी को नोटिस जारी करते हुए जवाब दाखिल करने को कहा है।

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