डॉ. उमर के अल-फलाह के रूम में मिले अमोनियम नाइट्रेट के निशान, दिल्ली ब्लास्ट केस में नया सुराग
दिल्ली में लाल किले के पास हुए आतंकी हमले के सबूत भी अब आतंकियों का अड्डा बनी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मिलने लगे हैं। जांचकर्ताओं को यूनिवर्सिटी के हॉस्टल रूम में बेड, फर्श, खिड़की और यहां तक कि बरामद किए गए बालों पर से अमोनियम नाइट्रेट की निशान मिले हैं।

दिल्ली में लाल किले के बाहर हुए आतंकवादी हमले की साजिश के सारे सबूत भी अब डॉक्टर मॉड्यूल के आतंकियों का अड्डा बनी अल-फलाह यूनिवर्सिटी से मिलने लगे हैं। अधिकारियों ने बताया कि जांचकर्ताओं को यूनिवर्सिटी के हॉस्टल रूम में बेड, फर्श, खिड़की और यहां तक कि बरामद किए गए बालों पर से अमोनियम नाइट्रेट की निशान मिले हैं। कथित फिदायीन हमलावर डॉ. उमर उन-नबी इसी रूम में रहता और काम करता था। एक जांचकर्ता ने कहा कि कमरे में मिले निशान और विस्फोट स्थल से बरामद सामग्री से मेल खाते हैं।
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने बताया कि हॉस्टल के रूम नंबर 13 की फोरेंसिक जांच के आधार पर यह माना जा रहा है कि उमर ने कमरे में विस्फोटक सामग्री जमा की होगी। यह विस्फोटक या तो स्टॉक के तौर पर रखने या टेस्ट अथवा 10 नवंबर को लाल किला ब्लास्ट में इस्तेमाल किए गए बम के पुर्जे जोड़ते समय यहां लाया गया हो सकता है। उमर की भी उस धमाके में मौत हो गई जब उसने कथित तौर पर हुंडई i20 के अंदर एक विस्फोट किया, जिसमें कम से कम 11 अन्य लोग मारे गए।
पुलिस का मानना है कि अलग-अलग जगहों से बरामद सामग्री की मात्रा के आधार पर, मॉड्यूल ने ‘सीरियल ब्लास्ट’ करने की तैयारी की थी। अधिकारियों ने बताया कि जिस बम से i20 को उड़ाया गया, उसमें 30-40 किलोग्राम अमोनियम नाइट्रेट और ट्राइएसीटोन ट्राइपेरोक्साइड (TATP) का मिश्रण था।
पुलिस ने बताया कि उमर की करीबी सहयोगी और साथी डॉक्टर शाहीन शाहिद ने ग्रुप की संचालन के बारे में अहम खुलासे किए हैं। कथित तौर पर करीब तीन बार पाकिस्तान जा चुकी डॉ. शाहीन ने जांचकर्ताओं को बताया कि उमर इस मॉड्यूल का ‘मुख्य प्लानर’ था। उमर और उसके ग्रुप ने विस्फोटक यौगिकों की स्टडी करने के लिए यूनिवर्सिटी के स्थान का इस्तेमाल किया, जिसमें लैबोरेट्री के कुछ हिस्से भी शामिल थे।
कैंपस लैब से शाहीन के नाम के डॉक्यूमेंट्स और एकेडमिक रिसर्च पेपर बरामद किए गए। पुलिस ने बताया कि उसके पास से अलग-अलग पतों वाले तीन पासपोर्ट मिले हैं, जो एक्सपायर हो चुके थे। उसने हाल ही में लखनऊ में नए पासपोर्ट के लिए आवेदन किया था। अधिकारियों ने उससे जुड़े सात बैंक खातों का भी पता चला है।
जांचकर्ताओं ने बताया कि डॉ. शाहीन, उमर और डॉ. मुजम्मिल शकील गनई तीनों तुर्की और पाकिस्तान गए थे, जहां उन्होंने कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद के अपने हैंडलर डॉ. उकाशा से मुलाकात की थी। स्पेशल सेल के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमने उनकी विदेश यात्रा की पुष्टि कर ली है और तुर्की में उनके हैंडलर से मुलाकात के सबूत भी हमारे पास हैं।




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