तो युवा 'कॉकरोच' को फॉलो करेंगे, CJP को लेकर उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने क्यों कसा मीडिया पर तंज?
उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि अगर मीडिया सकारात्मक गतिविधियों और उपलब्धियों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं करेगा तो युवा पीढ़ी नकारात्मक और व्यंग्यात्मक तत्वों की ओर आकर्षित हो जाएगी।

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने रविवार को कहा कि अगर मीडिया सकारात्मक गतिविधियों और उपलब्धियों की पर्याप्त रिपोर्टिंग नहीं करेगा तो युवा पीढ़ी नकारात्मक और व्यंग्यात्मक तत्वों की ओर आकर्षित हो जाएगी। मलयालम दैनिक 'दीपिका' की 140वीं वर्षगांठ समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने जोर दिया कि समाज को सही दिशा दिखाने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए रचनात्मक एवं जिम्मेदार पत्रकारिता अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि अगर सकारात्मक विकास को मीडिया में पर्याप्त जगह नहीं मिलेगी तो युवा रुचि खो देंगे और 'कॉकरोच' को फॉलो करने लगेंगे।
'एक दिन की हलचल स्थायी नहीं'
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ विषय एक दिन में बहुत अधिक ध्यान आकर्षित कर लेते हैं, लेकिन उनका प्रभाव स्थायी नहीं होता। उन्होंने कहा कि अगर कोई बात वास्तव में अच्छी है तो लोग एक सप्ताह, दस दिन या एक महीने बाद भी उसका महत्व समझते रहेंगे। जो अचानक हर जगह फैल जाते हैं, उनका असर लंबे समय तक नहीं टिकता।
यह टिप्पणी हाल ही में सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत द्वारा वकीलों के 'वरिष्ठ' पदनाम मामले में 'कॉकरोच' और 'परजीवी' शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद के संदर्भ में आई है। बाद में CJI ने स्पष्ट किया था कि उनकी टिप्पणियां फर्जी डिग्रियों के आधार पर कानून व्यवसाय में घुसपैठ करने वालों के खिलाफ थीं।
2047 के विकसित भारत लक्ष्य में मीडिया की भूमिका अहम
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की बढ़ती आत्मविश्वास और आकांक्षाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि 2047 तक विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए समाज के हर वर्ग का योगदान जरूरी है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र का विकास किसी एक व्यक्ति, एक पार्टी या एक सरकार का अकेला दायित्व नहीं है। यह हर नागरिक की प्राथमिक जिम्मेदारी है। हमें हर चीज में राजनीति नहीं, विकास देखना चाहिए। राधाकृष्णन ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का समर्थन करते हुए कहा कि वे इसके खिलाफ नहीं हैं, लेकिन उन मुद्दों पर अत्यधिक फोकस करने की प्रवृत्ति पर सवाल उठाया जो समय की कसौटी पर खरे नहीं उतरते।
रचनात्मक पत्रकारिता पर बल
उपराष्ट्रपति ने कहा कि पत्रकारिता का सच्चा धर्म अच्छे कार्यों की सराहना करना और गलत कार्यों की निडरता से आलोचना करना है। समाचार रिपोर्टिंग वस्तुनिष्ठ और तथ्यपरक होनी चाहिए, जबकि संपादकीय पृष्ठ राय व्यक्त करने का उचित स्थान है। उन्होंने मीडिया में बढ़ती 'संपादकीय टिप्पणी वाली रिपोर्टिंग', गलत सूचनाओं, घटते जनविश्वास, व्यावसायिक दबाव और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के प्रभाव पर चिंता जताई। लोगों को चेताते हुए उन्होंने कहा कि अब कैप्शन और हेडलाइन से अधिक प्रभावित हो रहे हैं, बिना मुद्दे की गहराई समझे।
दीपिका की सराहना
उपराष्ट्रपति ने 'दीपिका' की सराहना करते हुए कहा कि अखबार करुणा, वैज्ञानिक प्रगति, सामुदायिक सेवा, पर्यावरण संरक्षण और मानवीय उपलब्धियों को उजागर कर सामाजिक परिवर्तन का शक्तिशाली माध्यम बन सकता है। उन्होंने सामाजिक सद्भाव, शिक्षा प्रसार, सांस्कृतिक जड़ों के संरक्षण और रचनात्मक संवाद को बढ़ावा देने में दीपिका की भूमिका की प्रशंसा की।




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