सिद्धारमैया को CM पद से हटाना क्यों था जरूरी? कांग्रेस ने सही समय पर लिया बड़ा फैसला
कांग्रेस पार्टी को चुनाव में भी नुकसान उठाना पड़ा था। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सिद्धारमैया अपनी बात के पक्के निकले। वह यह कहते रहे है कि पार्टी आलाकमान जब निर्देश देगा वह पद छोड़ देंगे।

कांग्रेस कर्नाटक में बेहद आसानी से नेतृत्व परिवर्तन करने में सफल रही। मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व की हिदायत पर अमल करते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही नए मुख्यमंत्री के लिए डीके शिव कुमार के लिए रास्ता साफ हो गया है। मुख्यमंत्री पद से सिद्धारमैया ने जिस अंदाज में इस्तीफा दिया है, उससे पार्टी में उनका कद बढ़ा है। हालांकि, पार्टी नेतृत्व के दिल की धड़कने बढ़ी हुई थी, क्योंकि राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी इस तरह की स्थिति पैदा हुई थी पर पार्टी वहां नेतृत्व परिवर्तन में विफल रही थी।
कांग्रेस पार्टी को चुनाव में भी नुकसान उठाना पड़ा था। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि सिद्धारमैया अपनी बात के पक्के निकले। वह यह कहते रहे है कि पार्टी आलाकमान जब निर्देश देगा वह पद छोड़ देंगे। वरिष्ठ नेता सिद्धारमैया ने ठीक ऐसा ही किया। इसके साथ संगठन के अंदर पार्टी आलाकमान का रुतबा भी बढ़ा है। पार्टी आलाकमान कर्नाटक के जरिए कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को यह संदेश देने में सफल रहा है कि वह अब वह हर मुद्दे पर निर्णायक फैसला लेगा।
तमिलनाडु में डीएमके से दशकों पुराना गठबंधन तोड़कर एकदम नई पार्टी टीवीके के साथ गठबंधन कर सरकार में शामिल होना इसकी मिसाल है। कांग्रेस ने यह बदलाव सिर्फ कर्नाटक को ध्यान में रखकर नहीं किया है। इसके जरिए पार्टी ने दक्षिण के सभी पांच राज्यों को साधने की कोशिश की है। वहीं, कर्नाटक के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देने के कुछ ही देर बाद सिद्धरमैया गुरुवार को नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए।
वकील से मुख्यमंत्री तक सिद्धरमैया का सफर
सिद्धरमैया का जन्म 12 अगस्त, 1948 को मैसूर जिले के सिद्दरामनहुंडी गांव के एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने मैसूर विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने वकालत की। साल 1978 में सिद्धारमैया ने राजनीति में कदम रखा। इसके बाद वह तमाम पदों पर रहे। 1980 के दशक की शुरुआत से 2005 तक सिद्धरमैया कांग्रेस के कट्टर विरोधी थे नतीजतन, 2006 में उन्होंने कांग्रेस का दामन थामा। एक कार्यकर्ता से लेकर विधायक और उपमुख्यमंत्री बनने के बाद वर्ष 2013 में सिद्धरमैया को कर्नाटक का मुख्यमंत्री बनाया गया। वर्ष 2023 में हुए चुनाव में कांग्रेस को जीत मिलने पर दोबारा इन्हें सीएम बनाया गया।




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