Why Judges split over jailed MP Engineer Rashid plea on travel expenses Now Chief Justice will hear the case जेल में बंद सांसद की अर्जी पर आपस में ही क्यों बंट गए मीलॉर्ड, अब चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई; मामला क्या?, India News in Hindi - Hindustan
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जेल में बंद सांसद की अर्जी पर आपस में ही क्यों बंट गए मीलॉर्ड, अब चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई; मामला क्या?

जस्टिस भंभानी ने मामले में फैसला सुनाते हुए कहा कि हम दोनों जज इस बात पर सहमत नहीं हो पाए हैं कि आवेदन का निपटारा किस तरह किया जाए। इस पर अलग-अलग और असंगत विचार हैं। इसलिए, मामला अब चीफ जस्टिस के समक्ष रखा जाएगा।

Fri, 7 Nov 2025 04:59 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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जेल में बंद सांसद की अर्जी पर आपस में ही क्यों बंट गए मीलॉर्ड, अब चीफ जस्टिस करेंगे सुनवाई; मामला क्या?

दिल्ली हाई कोर्ट के दो जजों की पीठ शुक्रवार को तब आपस में बंट गई, जब जेल में बंद जम्मू-कश्मीर के सांसद अब्दुल राशिद शेख की एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस कारण पीठ ने उस मामले में खंडित फैसला सुनाया। दरअसल, सांसद ने अपनी याचिका में उस आदेश में संशोधन का अनुरोध किया था, जिसमें उन्हें हिरासत में रहते हुए संसद सत्र में शामिल होने के लिए जेल अधिकारियों के पास लगभग चार लाख रुपये जमा करने को कहा गया था।

मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस विवेक चौधरी ने जहां सांसद राशिद की याचिका खारिज कर दी, वहीं जस्टिस अनूप जयराम भंभानी ने इसे स्वीकार कर लिया। बारामूला के सांसद इंजीनियर राशिद ने संसद सत्र में भाग लेने के लिए केंद्र सरकार को उनकी यात्रा का खर्च वहन करने का निर्देश देने की मांग की थी। इस पर जस्टिस भंभानी का कहना है कि सरकार को सांसद राशिद की यात्रा का खर्च वहन करना चाहिए, जबकि जस्टिस चौधरी का कहना है कि सरकार को ऐसा नहीं करना चाहिए।

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हम एक-दूसरे से सहमत नहीं हो पाए

अब यह मामला हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस डीके उपाध्याय के समक्ष रखा जाएगा। दोनों न्यायाधीशों ने फैसला सुनाते हुए कहा, ‘‘हम एक-दूसरे से सहमत नहीं हो पाए हैं। हमने दो अलग-अलग फैसले दिए हैं। उचित आदेश के लिए इसे मुख्य न्यायाधीश के समक्ष रखा जायेगा।’’जस्टिस चौधरी ने कहा, ‘‘मेरे भाई (जे भंभानी) ने आवेदन स्वीकार कर लिया है। मैंने इसे अस्वीकार कर दिया।’’

टेरर फंडिंग में फंसे हैं सांसद राशिद

बारामूला के सांसद राशिद आतंकी वित्त पोषण के मामले में मुकमदे का सामना कर रहे हैं, जिसमें आरोप है कि उन्होंने जम्मू-कश्मीर में अलगाववादियों और आतंकी समूहों को वित्त पोषण किया है। वर्ष 2017 के आतंकी वित्त पोषण मामले में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद से वह 2019 से दिल्ली की तिहाड़ जेल में बंद हैं। पिछले साल सितंबर में उन्हें जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में प्रचार के लिए एक महीने की अंतरिम ज़मानत दी गई थी।

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पिछले साल उमर अब्दुल्ला को हराया था

NIA की प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि राशिद का नाम व्यवसायी और सह-आरोपी जहूर वटाली से पूछताछ के दौरान सामने आया था। अक्टूबर, 2019 में आरोप-पत्र दाखिल होने के बाद, एक विशेष एनआईए अदालत ने मार्च 2022 में राशिद और अन्य के खिलाफ आईपीसी की धाराओं 120बी (आपराधिक साजिश), 121 (सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ना) और 124ए (राजद्रोह) के तहत और यूएपीए के तहत आतंकवादी कृत्यों और आतंकी वित्तपोषण से संबंधित अपराधों के लिए आरोप तय किये थे। फिलहाल वह तिहाड़ जेल में बंद हैं। उन्होंने 2024 का लोकसभा चुनाव उमर अब्दुल्ला को करीब दो लाख मतों के अंतर से हराकर जीता था। (भाषा इनपुट्स के साथ)