भारत विरोधी बयान क्यों देते हैं बालेन शाह? दिल्ली में आज नेपाल को समझाएंगे जयशंकर
India-Nepal: भारत महसूस करता है नई सरकार में अनुभव, परिपक्वता की कमी है, पर नेपाल की रणनीतिक स्थिति, भारत के साथ खुली सीमा व वहां चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए नेपाल से रिश्ते जरूरी हैं।
नेपाल में जेन जी सरकार की टिप्पणियों से भारत असहज जरूर है, लेकिन उसे लगता है कि इस मामले को धैर्य एवं कूटनीतिक सूझबूझ से सुलझाने की जरूरत है। इसलिए शनिवार को जब नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात करेंगे तो उन्हें यह समझाया जाएगा कि नेपाल की प्रगति में भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है और आगे भी निभा सकता है। जहां तक सीमा विवादों का प्रश्न है उन्हें सुलझाने के लिए द्विपक्षीय तंत्र बना हुआ है। भारत की कोशिश यह समझाने की होगी कि फिजूल कि टिप्पणियों से कुछ हल नहीं निकलेगा, बल्कि संबंध और खराब होंगे।
सूत्रों के अनुसार नेपाल के विदेश मंत्री खनाल की भारत यात्रा उनके अनुरोध पर अचानक तय हुई है तथा वह शुक्रवार को भारत पहुंच चुके हैं। हाल में सत्ताधारी दल राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के अध्यक्ष रबी लामिछाने ने भारत की यात्रा की थी और भाजपा अध्यक्ष के साथ-साथ उन्होंने विदेश मंत्री जयशंकर और प्रधानमंत्री से भी मुलाकात की थी।
सूत्रों का दावा है कि इस दौरान उन्हें भारत-नेपाल रिश्तों का महत्व समझाया गया। माना जा रहा है उनके वापस लौटने के बाद ही रिश्तों में संतुलन बनाने के लिए विदेश मंत्री को दिल्ली भेजा गया है। दरअसल, नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र (बालेन) शाह की टिप्पणियों ने भारत को असहज किया, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि नेपाल ने भी भारत की जमीन पर कब्जा कर रखा है। सीमा विवाद सुलझाने में तीसरे पक्ष के हस्तक्षेप और लिपुलेख से कैलाश मान सरोवर यात्रा पर आपत्ति किए जाने से भी भारत आहत हुआ है।
कूटनीतिक जानकारों के अनुसार नेपाल की जेन जी सरकार के साथ रिश्ते मजबूत करने के लिए भारत को धैर्य से आगे बढ़ने की जरूरत है और वह ऐसा कर भी रहा है। दरअसल, भारत महसूस करता है नई सरकार में अनुभव, परिपक्वता की कमी है, पर नेपाल की रणनीतिक स्थिति, भारत के साथ खुली सीमा व वहां चीन के बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए नेपाल से रिश्ते जरूरी हैं।
टिप्पणियों से हल नहीं होंगे सीमा विवाद
विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि जब विदेश मंत्री जयशंकर नेपाली विदेश मंत्री से हैदराबाद हाउस में द्विपक्षीय वार्ता करेंगे तो उनका रुख नेपाल को समझाने का होगा। पुराने बयानों पर नाराजगी जताने की बजाय उन्हें यह समझाया जाएगा कि दोनों देशों के बीच एक-दो स्थानों पर पर जो सीमा विवाद हैं, वे बयानबाजी से हल नहीं होंगे, बल्कि दोनों देशों के बीच स्थापित तंत्र से सुलझाएं जाएंगे। इसी प्रकार जो जमीन कब्जाने वाली बात है, वह गंडक नदी के बहाव में बदलाव से पैदा हुई। उस पर भी दस्तावज देखे जा रहे हैं।




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