लोकसभा में अधिक वोट मिलने के बाद भी क्यों फेल हो गया महिला आरक्षण बिल, अब आगे क्या रास्ता?
सरकार इस विधेयक के जरिए लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना चाहती थी, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। सरकार का तर्क था कि इसके लिए परिसीमन जरूरी है।

संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में लाया गया 131वां संवैधानिक संशोधन विधेयक लोकसभा में गिर गया है। हैरानी की बात यह रही कि विधेयक को विपक्ष के मुकाबले ज्यादा वोट मिले, लेकिन फिर भी यह तकनीकी और संवैधानिक कारणों से पारित नहीं हो सका। ऐसा इसलिए क्योंकि संवैधानिक संशोधन के लिए संसद के विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है।
इसके लिए दो मुख्य नियम हैं। सदन के कुल सदस्यों का साधारण बहुमत 50% से अधिक। सदन में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों का दो तिहाई बहुमत।
मतदान के दौरान 528 सदस्य उपस्थित थे। बिल के पक्ष में 298 और विरोध में 230 वोट पड़े। बिल ने साधारण बहुमत का आंकड़ा तो पार कर लिया, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के लिए उसे 352 वोटों की जरूरत थी। महज 54 वोटों की कमी के कारण ऐतिहासिक माना जाने वाला यह विधेयक गिर गया।
क्यों हुआ विवाद?
सरकार इस विधेयक के जरिए लोकसभा की सीटों को वर्तमान 543 से बढ़ाकर अधिकतम 850 करना चाहती थी, ताकि 2029 के चुनावों से पहले महिला आरक्षण को लागू किया जा सके। सरकार का तर्क था कि इसके लिए परिसीमन जरूरी है। हालांकि, विपक्षी दलों ने इसका कड़ा विरोध किया। विपक्षी नेताओं, विशेषकर राहुल गांधी ने कहा कि आरक्षण को मौजूदा सीटों पर ही तुरंत लागू किया जाना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि परिसीमन के बहाने सरकार भारत के चुनावी मानचित्र को बदलने की कोशिश कर रही है, जिसका महिला सशक्तिकरण से कोई लेना-देना नहीं है।
अमित शाह का पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने चर्चा का जवाब देते हुए विपक्ष के रुख की आलोचना की। उन्होंने कहा कि विपक्ष महिला आरक्षण के क्रियान्वयन में बाधा डाल रहा है और आने वाले चुनावों में उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा। वहीं, कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे महिलाओं को सशक्त करने के बजाय एक राजनीतिक चाल करार दिया।
आगे क्या होगा?
विधेयक के गिरने के बाद संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार अब परिसीमन और सीटों की वृद्धि से जुड़े अन्य दो संबंधित बिलों को आगे नहीं बढ़ाएगी, क्योंकि वे महिला आरक्षण विधेयक से ही जुड़े हुए थे। इस घटनाक्रम के बाद अब 2029 के चुनावों में महिला आरक्षण लागू होने की संभावनाओं पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं। जहां सरकार इसे विपक्ष की नकारात्मकता बता रही है, वहीं विपक्ष इसे सरकार की दोषपूर्ण प्रक्रिया का नतीजा मान रहा है।




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