Why did CJI BR Gavai get angry at the government chief justice of India retirement date 24 नवंबर के बाद करना हो तो बता दो, अपनी रिटायरमेंट की डेट बता सरकार पर क्यों भड़के CJI गवई, India News in Hindi - Hindustan
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24 नवंबर के बाद करना हो तो बता दो, अपनी रिटायरमेंट की डेट बता सरकार पर क्यों भड़के CJI गवई

Supreme Court News: अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने मामले में स्थगन की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी की तरफ से यह अनुरोध पेश किया गया था। इस पर सीजेआई गवई ने सवाल उठा दिया कि क्या सरकार 24 नवंबर के गुजरने का इंतजार कर रही है।

Thu, 6 Nov 2025 12:39 PMNisarg Dixit लाइव हिन्दुस्तान
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24 नवंबर के बाद करना हो तो बता दो, अपनी रिटायरमेंट की डेट बता सरकार पर क्यों भड़के CJI गवई

CJI BR Gavai: ट्रिब्यूनल रिफॉर्म्स एक्ट मामले में सुनवाई कर रहे सुप्रीम कोर्ट से एक बार फिर केंद्र सरकार को फटकार पड़ी है। CJI यानी भारत के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने स्थगन की मांग पर आपत्ति जताई है। इससे पहले भी उन्होंने मामले को बड़ी बेंच के पास भेजे जाने के अनुरोध को लेकर केंद्र पर सवाल उठाए थे और कहा था कि लगता है सरकार मौजूदा पीठ से बचना चाह रही है।

बार एंड बेंच के अनुसार, अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणी ने मामले में स्थगन की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने एएसजी ऐश्वर्या भाटी की तरफ से यह अनुरोध पेश किया गया था। इस पर सीजेआई गवई ने सवाल उठा दिया कि क्या सरकार उनके रिटायरमेंट होने का इंतजार कर रही है।

उन्होंने कहा, 'हम दो बार पहले ही आपकी बात मान चुके हैं। कितनी बार और? अगर आप यह 24 नवंबर के बाद चाहते हैं, तो हमें बता दें। यह कोर्ट के साथ बहुत अन्याय है। हर बार आप मध्यस्थता के लिए सुविधा मांगते हैं। आपके कई वकील हैं और आप बड़ी बेंच की मांग को लेकर आधी रात में आवेदन दाखिल करते हैं।'

उन्होंने कहा, 'जब हम हाईकोर्ट में थे, तो जो भी ब्रीफ हमें छोड़ने पड़ते थे, उसके लिए हम यहां आते थे। हम शीर्ष संवैधानिक अदालत का बहुत सम्मान करते हैं। हम कल और कोई केस नहीं लिया। हमने सोचा था कि हम कल सुनवाई करेंगे और वीकेंड पर फैसला लिख देंगे।'

पहले भी भड़का था कोर्ट

सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने उस अर्जी पर कड़ा रुख अपनाया, जिसमें अधिकरण सुधार (सुव्यवस्थीकरण एवं सेवा शर्तें) अधिनियम, 2021 प्रावधानों को चुनौती देने वाली याचिकाओं को वृहद पीठ के पास भेजने का निर्देश देने का अनुरोध किया गया था। शीर्ष अदालत ने कहा कि अंतिम सुनवाई के आखिरी चरण में सरकार से ऐसी उम्मीद नहीं थी।

सीजेआई गवई और जस्टिस विनोद चंद्रन की बेंच ने इस बात को लेकर नाराजगी जताई कि केंद्र अब इस मामले को पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ के पास भेजना चाहता है। पीठ ने इस मामले में मुख्य याचिकाकर्ता मद्रास बार एसोसिएशन सहित विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से अंतिम दलीलें पहले ही सुन ली हैं।

पीठ ने कहा, 'पिछली तारीख (सुनवाई की) पर, आपने (अटॉर्नी जनरल) ये आपत्तियां नहीं उठाईं और आपने निजी कारणों से सुनवाई टालने का अनुरोध किया। आप पूरी सुनवाई के बाद ये आपत्तियां नहीं उठा सकते... हम केंद्र सरकार से ऐसी तरकीब अपनाने की उम्मीद नहीं करते हैं।'

नाराज नजर आ रहे प्रधान न्यायाधीश ने कहा, 'यह ऐसे समय हुआ है जब हमने एक पक्ष की पूरी बात सुन ली है और अटॉर्नी जनरल को निजी कारणों से छूट दी है।' सीजेआई ने कहा था कि ऐसा लगता है कि केंद्र सरकार मौजूदा पीठ से बचना चाहती है। सीजेआई गवई 23 नवंबर को सेवानिवृत्त हो रहे हैं।