Why Asaduddin Owaisi in new tension amid new stake of Humayun Kabir in west bengal will AIMIM split babri masjid row हुमायूं कबीर के दांव पर AIMIM ही दो फाड़? बंगाल की सियासी खिचड़ी से हैदराबाद के ओवैसी को क्यों टेंशन, India News in Hindi - Hindustan
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हुमायूं कबीर के दांव पर AIMIM ही दो फाड़? बंगाल की सियासी खिचड़ी से हैदराबाद के ओवैसी को क्यों टेंशन

बंगाल यूनिट के AIMIM चीफ इमरान सोलंकी ने कहा कि उन्होंने हुमायूं कबीर से पहले ही बात कर ली है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अगले साल होना वाले विधानसभा चुनाव में ‘कुछ सीटों’ पर तालमेल की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

Fri, 12 Dec 2025 10:53 PMPramod Praveen लाइव हिन्दुस्तान, कोलकाता
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हुमायूं कबीर के दांव पर AIMIM ही दो फाड़? बंगाल की सियासी खिचड़ी से हैदराबाद के ओवैसी को क्यों टेंशन

Humayun Kabir and Asaduddin Owaisi AIMIM: पश्चिम बंगाल के मुर्शीदाबाद में बाबरी मस्जिद जैसी मस्जिद की नींव रखने वाले तृणमूल से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है। खासकर मुस्लिमों के बीच उनकी लोकप्रियता को लेकर कई दावे किए जा रहे हैं। यही वजह है कि असदुद्दीन ओवैसी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल की AIMIM यूनिट हुमायूं कबीर से दोस्ती करना चाह रही है, जबकि AIMIM का केंद्रीय नेतृत्व हुमायूं कबीर को ‘राजनीतिक रूप से असंगत’ बता रहा है।

केंद्रीय नेतृत्व की दलीलों से इतर AIMIM की बंगाल यूनिट ने शुक्रवार को आगामी विधानसभा चुनाव में तृणमूल के इस निलंबित विधायक के साथ गठबंधन करने की इच्छा व्यक्त की है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष इमरान सोलंकी ने कहा कि कबीर के साथ बातचीत चल रही है, जो छह दिसंबर को मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद की नींव रखकर राजनीतिक बवाल खड़ा करने के बाद अल्पसंख्यकों की आवाज मुखरता से उठाने वाले एक बड़े नेता के रूप में उभरे हैं।

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कबीर से पहले ही बात कर ली है

सोलंकी ने कहा कि उन्होंने कबीर से पहले ही बात कर ली है। उन्होंने कहा कि दोनों पक्ष अगले साल के विधानसभा चुनाव में ‘कुछ सीट’ पर तालमेल की संभावना तलाश रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘राष्ट्रीय स्तर पर असदुद्दीन ओवैसी की मजबूत पकड़ के कारण हुमायूं कबीर एआईएमआईएम के साथ गठबंधन करने के इच्छुक हैं। हमारी भी कुछ चुनिंदा सीट पर गठबंधन की संभावना तलाशने में रुचि है।’’ हालांकि, उन्होंने कहा कि अंतिम निर्णय हैदराबाद के सांसद का होगा।

AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार का इनकार

दूसरी तरफ, कबीर के साथ किसी भी गठजोड़ से एआईएमआईएम के राष्ट्रीय प्रवक्ता सैयद असीम वकार द्वारा इनकार किये जाने के चार दिन के बाद आये सोलंकी के इस बयान से पहले से अस्थिर पश्चिम बंगाल के चुनावी परिदृश्य में और उलझन पैदा हो गई है और चर्चा हो रही है कि क्या AIMIM दो फाड़ हो चुकी है। बता दें कि वकार ने आठ दिसंबर को एक बयान में कबीर से पार्टी की स्पष्ट दूरी को उजागर किया था और नजदीकी बनाने के उनके प्रयासों को ‘राजनीतिक रूप से संदिग्ध और वैचारिक रूप से असंगत’ बताया था।

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परोक्ष रूप से कबीर का भाजपा से कनेक्शन?

उन्होंने तर्क दिया था कि कबीर को व्यापक रूप से भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी और परोक्ष रूप से पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व के साथ जुड़ा हुआ माना जाता है। इस स्पष्ट विरोधाभास के बारे में पूछे जाने पर सोलंकी ने कहा, ‘‘हां, हम जानते हैं कि वकार ने क्या कहा था, लेकिन फिलहाल यह पार्टी का आधिकारिक रुख नहीं है।’’

ओवैसी की टेंशन बढ़ गई

शुक्रवार को संपर्क किए जाने पर वकार ने फोन का जवाब नहीं दिया। लिहाजा, पश्चिम बंगाल इकाई का अधिक लचीला रुख यह दर्शाता है कि जमीनी स्तर पर चुनावी समीकरण अलग तरह से सामने आ रहे हैं, खासकर मुर्शिदाबाद और मालदा के अल्पसंख्यक बहुल जिलों में, जहां कबीर और एआईएमआईएम दोनों का मानना ​​है कि वे सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आधार में सेंध लगा सकते हैं। राज्य में 27 फीसदी अल्पसंख्यक वोट हैं, जिस पर ओवैसी और कबीर की नजर है लेकिन फिलहाल बंगाल यूनिट के दावे से ओवैसी की टेंशन बढ़ गई है। (भाषा इनपुट्स के साथ)