Who was Bharat Ratn Gopinath Bordoloi Amit Shah remembered in Assam know him कौन थे भारत रत्न गोपीनाथ, गृहमंत्री अमित शाह ने असम में किया याद; क्यों कहलाते हैं लोकप्रिय, India News in Hindi - Hindustan
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कौन थे भारत रत्न गोपीनाथ, गृहमंत्री अमित शाह ने असम में किया याद; क्यों कहलाते हैं लोकप्रिय

असम में एक कार्यक्रम में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने भारत रत्न गोपीनाथ को याद किया। आइए जानते हैं आखिर कौन थे गोपीनाथ जिनका जिक्र अमित शाह ने किया।

Mon, 29 Dec 2025 03:08 PMDeepak Mishra लाइव हिन्दुस्तान, नई दिल्ली
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कौन थे भारत रत्न गोपीनाथ, गृहमंत्री अमित शाह ने असम में किया याद; क्यों कहलाते हैं लोकप्रिय

असम में एक कार्यक्रम में बोलते हुए गृहमंत्री अमित शाह ने भारत रत्न गोपीनाथ को याद किया। अमित शाह ने कहा कि अगर गोपीनाथ नहीं होते तो आज असम तो क्या पूरा नॉर्थईस्ट ही भारत का हिस्सा नहीं होता। उन्होंने आगे कहा कि गोपीनाथ ने ही जवाहरलाल नेहरू को बाध्य किया कि आसाम को भारत का हिस्सा बनाया जाए। आइए जानते हैं आखिर कौन थे गोपीनाथ जिनका जिक्र अमित शाह ने किया।

कौन थे गोपीनाथ बोरदोलोई
गोपीनाथ का पूरा नाम था, गोपीनाथ बोरदोलोई। उनकी एक पहचान असम के पहले मुख्यमंत्री के रूप में भी है। लेकिन इससे भी कहीं बढ़कर वह एक विजनरी थे, जिन्होंने असम की आधुनिक पहचान की नींव रखी। उनका जन्म असम के राहा में हुआ था। मात्र 12 साल की उम्र में उन्होंने अपनी मां को खो दिया। गोपीनाथ ने कानून की पढ़ाई की थी। हालांकि बाद में उनका रुख राजनीति की तरफ हो गया। वह महात्मा गांधी के आदर्शों और अहिंसावादी सिद्धांतों को मानने वाले थे।

असम के लिए समर्पित
गोपीनाथ बोरदोलोई का पूरा जीवन असम को समर्पित रहा। कांग्रेस के असम में पहचान बनाने के पहले से ही वह यहां पर पूरी तरह से सक्रिय थे। उन्होंने लोगों के अधिकारों और उनके भले के लिए लगातार लड़ाइयां लड़ीं। गोपीनाथ का सबसे बड़ा योगदान कैबिनेट मिशन प्लान का विरोध था। कैबिनेट मिशन प्लान के तहत मुस्लिम लीग नॉर्थईस्ट को भारत से अलग करना चाहता था। हालात को देखते हुए गोपीनाथ बोरदोलोई ने महात्मा गांधी का सहयोग मांगा। इसके बाद उन्होंने अहिंसक आंदोलन की शुरुआत की। वह लगातार इस कोशिश में जुटे रहे कि असम भारत का हिस्सा रहे। उनके इस आंदोलन में महात्मा गांधी, जवाहरलाल नेहरू और सरदार पटेल ने भी भरपूर समर्थन दिया।

आजादी के बाद भी असम की लड़ाई
आजादी के बाद भी असम के सामने कई चुनौतियां थीं। इसमें बुनियादी सुविधाओं का अभाव और आर्थिक-सामाजिक विषमता शामिल थीं। असम के पहले मुख्यमंत्री के रूप में गोपीनाथ बोरदोलोई ने खुद आगे रहते हुए इनके लिए लड़ाई लड़ी। उनके नेतृत्व में ही असम ने बुनियादी सुविधाएं हासिल की। मेडिकल कॉलेज से लेकर इंजीनियरिंग कॉलेज और एग्रीकल्चर की पढ़ाई के मामले में भी असम ने अहम मुकाम हासिल किया।

किसने दी लोकप्रिय की उपाधि
गोपीनाथ को मरणोपरांत भारत रत्न की उपाधि से सम्मानित किया गया। भले ही उन्हें यह सम्मान मिलने में देरी हुई, लेकिन सच यह है कि असम को लेकर उनका योगदान अतुलनीय है। असम को भारत का हिस्सा बनाए रखने के लिए उन्होंने जो योगदान दिया, उसे भुलाए नहीं भूला जा सकता। असम और वहां के लोगों के प्रति निस्वार्थ प्यार को देखते हुए असम के राज्यपाल रह चुके जयराम दास ने उन्हें लोकप्रिय की उपाधि दी थी।