कौन हैं TMC की विधायक, जिन्हें शुभेंदु अधिकारी ने बैठक के लिए बुला लिया? बंगाल में चर्चा तेज
एक तरफ जहां सरकार ने विपक्षी विधायकों को बुलाकर समावेशी राजनीति की शुरुआत की है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने अन्य दलों के सांसदों को इन प्रशासनिक बैठकों में बुलाने पर कुछ आपत्तियां जताई हैं।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद पहली बार उत्तर बंगाल के दौरे पर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को सिलीगुड़ी के में एक अहम प्रशासनिक समीक्षा बैठक की। इस बैठक में मुख्यमंत्री ने एक ऐसा कदम उठाया जिसकी बंगाल के राजनीतिक गलियारों में खूब चर्चा हो रही है। भाजपा सरकार ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) की एकमात्र स्थानीय विधायक को भी इस प्रशासनिक बैठक में शामिल होने के लिए बुला लिया।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने उत्तर बंगाल के पांच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण जिलों की समीक्षा की। उनमें कूचबिहार, अलीपुरद्वार, जलपाईगुड़ी, दार्जिलिंग और कालिम्पोंग शामिल है। इन पांचों जिलों में कुल मिलाकर 27 विधानसभा सीटें हैं। हाल ही में संपन्न हुए 2026 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने एकतरफा प्रदर्शन करते हुए 26 सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जबकि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के खाते में सिर्फ सिटाई सीट आई है।
हम सर्वदलीय भागीदारी में विश्वास रखते हैं- मुख्यमंत्री
सिटाई विधानसभा सीट से नवनिर्वाचित टीएमसी विधायक संगीता रॉय को इस प्रशासनिक बैठक के लिए विशेष रूप से आमंत्रित किया गया था। बैठक के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इस फैसले को स्पष्ट करते हुए कहा, "हमने यह तय किया है कि हम प्रशासनिक समीक्षा बैठकों में सभी राजनीतिक दलों के विधायकों को आमंत्रित करेंगे। इसी नीति के तहत, हमने आज इन पांच जिलों से तृणमूल कांग्रेस की एकमात्र विधायक संगीता रॉय को भी आमंत्रित किया था।"
दिल्ली में होने के कारण शामिल नहीं हो सकीं TMC विधायक
टीएमसी विधायक संगीता रॉय ने सरकार से न्योता मिलने की पुष्टि की है। हालांकि, वे इस बैठक में निजी कारणों से शामिल नहीं हो सकीं क्योंकि वे फिलहाल अपने परिवार के एक सदस्य के इलाज के सिलसिले में दिल्ली में हैं। फोन पर बात करते हुए संगीता रॉय ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए कहा, "मुझे बैठक का आमंत्रण मिला था। लेकिन परिवार में मेडिकल इमरजेंसी के कारण मैं दिल्ली में हूं, इसलिए पहुंच नहीं सकी। अगर मैं कूचबिहार में होती तो इस प्रशासनिक बैठक में निश्चित रूप से शामिल होती और अपने क्षेत्र की बात रखती।"
आपको बता दें कि संगीता रॉय ने सिटाई सीट पर भाजपा उम्मीदवार को 2,721 वोटों के कड़े मुकाबले में शिकस्त दी थी।
एक तरफ जहां सरकार ने विपक्षी विधायकों को बुलाकर समावेशी राजनीति की शुरुआत की है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री ने अन्य दलों के सांसदों को इन प्रशासनिक बैठकों में बुलाने पर कुछ आपत्तियां जताई हैं। यही वजह रही कि विधायक संगीता रॉय के पति और कूचबिहार से टीएमसी सांसद जगदीश चंद्र बर्मा बसुनिया को इस बैठक के लिए कोई आमंत्रण नहीं भेजा गया था।
उत्तर बंगाल के राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता में आते ही शुभेंदु अधिकारी और भाजपा यह संदेश देना चाहते हैं कि उनकी सरकार पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस सरकार के मुकाबले काम करने के तौर-तरीकों में पूरी तरह अलग है।
उन्होंने कहा, "प्रशासनिक बैठकों में विपक्षी विधायकों को शामिल करना वाकई एक दुर्लभ और सकारात्मक कदम है। तृणमूल कांग्रेस के 15 साल (2011-2026) के लंबे शासनकाल में कभी भी विपक्ष के किसी विधायक को ऐसी सरकारी बैठकों में शामिल होने का मौका नहीं दिया जाता था। भाजपा अब इस कदम से अपनी एक अलग लोकतांत्रिक छवि गढ़ने की कोशिश कर रही है।"




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