कौन हैं कपिल साहू? जिन्होंने तमिलनाडु में थलापति विजय की जीत की बांधी भूमिका
तमिलनाडु विधानसभा में थलापति विजय की जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले कपिल साहू का नाम चर्चा का विषय बना हुआ है। कपिल ने रैली में हुई भगदड़ और विजय की निजी जिंदगी पर हो रही चर्चा को बखूबी ढंग से संभाला। उन्होंने जमीनी स्तर पर टीवीके को मजबूत करने का काम किया।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में थलापति विजय की नई नवेली पार्टी की ऐतिहासिक जीत पूरे देश में चर्चा का केंद्र बनी हुई है। 234 विधानसभा सीट वाली तमिलनाडु विधानसभा में पहली ही बार में 108 सीट हासिल कर लेना किसी सपने से कम नहीं है। अब विजय की इस ऐतिहासिक जीत के रणनीतिकार रहे कपिल साहू का नाम भी सामने आ रहा है, जिन्होंने विजय की जीत के पीछे की पूरी रणनीति तैयार की थी।
तमिलनाडु विधानसभा में विजय की इस जीत का श्रेय खुद उनके करिश्मे और स्टारडम को जाता है। लेकिन इसके दूसरे तरफ टीवीके के प्रभाव को बढ़ाने के लिए कपिल साहू की भूमिका को नकारा नहीं जा सकता। कपिल साहू के पहले मशहूर रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने विजय की मदद की थी, लेकिन उनके बिहार चुनाव में व्यस्त होने के बाद कपिल साहू ने कमान संभाल ली थी।
कौन हैं कपिल साहू?
कपिल साहू पहले मशहूर राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की इंडियन पॉलिटिल ऐक्शन कमेटी (आई-पैक) में काम करते थे। यहां पर उन्होंने प्रशांत किशोर के साथ राजनीतिक अभियानों, डेटा, नैरेटिव निर्माण और राजनीतिक एडवाइसर का काम किया। इसके बाद साहू ने अपने 12 साथियों के साथ प्रशांत किशोर से अपने रास्ते अलग करते हुए एक नई पॉलिटिकल एडवाइजरी फर्म बनाई। इस फर्म के जरिए उन्होंने आम आदमी पार्टी, सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट जैसी पार्टियों को सलाह दी। इसे बाद वह टीवीके के साथ जुड़ गए।
कपिल साहू की सबसे बड़ी परीक्षा उस वक्त शुरू हुई जब टीवीके की एक रैली के दौरान 41 लोगों की मौत हो गई। पार्टी और विजय को उस दौर से निकालना साहू की सबसे बड़ी चुनौती थी। इसके अलावा विजय के कथित एक्सट्रा मैरिटल अफेयर की चर्चा से गर्म बाजारों को भी शांत करना साहू की ही जिम्मेदारी थी। कपिल साहू और उनकी टीम ने इन दोनों ही मुद्दों को बखूबी से संभाला और टीवीके के ऐतिहासिक जीत की दहलीज तक पहुंचा दिया।
तमिलनाडु विधानसभा में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के बाद विजय फिलहाल बहुमत के लिए गठबंधन की तलाश में है। ऐसी संभावना है कि वह कांग्रेस समेत अन्य छोटी पार्टियों से गठबंधन कर सकते हैं।




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