कौन हैं IPS दमयंती सेन? ममता सरकार में हुईं साइडलाइन; अब शुभेंदु अधिकारी ने दी बड़ी जिम्मेदारी
राज्य में महिलाओं की सुरक्षा के लिए शुभेंदु सरकार ने एक कमिटी बनाई है। यह कमिटी आगामी 1 जून से राज्य के अलग अलग थानों में जाकर जनसुनवाई की तर्ज पर सीधे महिलाओं से शिकायतें दर्ज करेगी।

पश्चिम बंगाल में नई सरकार बनने के बाद अनुभवी आईपीएस अधिकारी दमयंती सेन एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने ‘सुपरकॉप’ के नाम से मशहूर दमयंती सेन को महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले अपराधों की जांच के लिए बनी एक हाई-लेवल कमिटी का 'मेम्बर सेक्रेटरी' नियुक्त किया है। बता दें कि दमयंती सेन वही अफसर हैं जिन्हें 2012 के ऐतिहासिक 'पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस' की सच्चाई सामने लाने की सजा भुगतनी पड़ी थी और तत्कालीन ममता सरकार पर उन्हें मुख्यधारा से हटाने के आरोप लगे थे।
दरअसल राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए शुभेंदु सरकार ने रिटायर्ड जस्टिस समाप्ति चटर्जी की अध्यक्षता में एक विशेष समिति बनाई है। यह कमेटी आगामी 1 जून से राज्य के अलग अलग थानों में जाकर 'जनसुनवाई' की तर्ज पर सीधे महिलाओं की शिकायतें दर्ज करेगी। 1 जून से पहले दमयंती सेन की देखरेख में अधिकारियों की टीम राज्य में महिलाओं के खिलाफ हुए अपराधों का पूरा पुराना डाटा इकट्ठा करेगी।
कौन हैं दमयंती सेन?
दमयंती सेन 1996 बैच की IPS अधिकारी हैं और कोलकाता पुलिस में जॉइंट कमिश्नर (क्राइम) बनने वाली पहली महिला अधिकारी रही हैं। अपने करियर में उन्होंने कई अहम मामलों की जांच की। हालांकि उन्हें सबसे बड़ी पहचान 2012 के चर्चित पार्क स्ट्रीट गैंगरेप केस की जांच से मिली। इस मामले में उन्होंने अपनी टीम के साथ तेजी से कार्रवाई करते हुए आरोपियों को कुछ ही दिनों में पकड़ लिया था।
ममता बनर्जी ने बताया था फर्जी केस
गौरतलब है कि 6 फरवरी 2012 को कोलकाता के पार्क स्ट्रीट में देर रात नाइट क्लब से लौट रही एक महिला के साथ एक चलती गाड़ी में सामूहिक दुष्कर्म हुआ था। तृणमूल कांग्रेस सरकार के सत्ता में आने के ठीक बाद हुए इस कांड से हड़कंप मच गया था। तब मुख्यमंत्री रहीं ममता बनर्जी ने इस घटना को सरकार की छवि खराब करने के लिए एक मनगढ़ंत कहानी बता दिया था।
सच सामने लाने पर हुईं ‘साइडलाइन’
हालांकि तत्कालीन ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) दमयंती सेन ने मुख्यमंत्री के राजनीतिक बयान की परवाह ना करते हुए जांच की और सबूतों के दम पर यह साबित किया था कि गैंगरेप की वारदात सच थी। उन्होंने चंद दिनों के भीतर आरोपियों को भी पकड़ लिया था। मामला सामने लाने के तुरंत बाद उन्हें कोलकाता पुलिस मुख्यालय लालबाजार से हटाकर बैरकपुर कमिश्नरेट में तुलनात्मक रूप से कम महत्वपूर्ण पद पर ट्रांसफर कर दिया गया। इसके बाद लंबे समय तक उन्हें किसी बड़े केस की जिम्मेदारी नहीं दी गई और उन्हें ‘साइडलाइन’ माना जाने लगा। अब करीब 14 साल बाद अब दमयंती सेन की वापसी हुई है।
भ्रष्टाचार के मामलों की भी होगी जांच
इस बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को कई बड़ी घोषणाएं की हैं। उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल कैबिनेट ने TMC सरकार के कार्यकाल के दौरान संस्थागत भ्रष्टाचार और महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अत्याचार की घटनाओं की जांच के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट के दो रिटायर्ड जजों की अध्यक्षता में दो अलग-अलग समितियों के गठन को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री ने बताया कि भ्रष्टाचार की जांच करने वाली समिति की अध्यक्षता कलकत्ता हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस विश्वजीत बसु करेंगे, वहीं एडीजी रैंक के वरिष्ठ अधिकारी जयरमन इस समिति के सदस्य-सचिव होंगे। अधिकारी ने कहा है कि यह कमिटी भ्रष्टाचार, 'कट मनी', रिश्वतखोरी जैसे मामलों की जांच करेगी।




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