कौन हैं पूर्व सेना प्रमुख जनरल नरवणे? जिनका हवाला देकर राहुल गांधी ने सरकार को घेरा
भारतीय सेना के पूर्व प्रमुख जनरल नरवणे ने जनरल विपिन रावत के बाद सेना प्रमुख का पद संभाला था। वह लगभग 2 साल तक इस पद पर रहे थे। इसके बाद उन्होंने अपनी एक किताब लिखी, जिसे फिलहाल अभी तक प्रकाशित करने के लिए केंद्र की अनुमति नहीं मिली है।

लोकसभा की कार्यवाही सोमवार को विपक्ष और सत्ता पक्ष के जोरदार हंगामे की भेंट चढ़ गई। पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम एम नरवणे की अप्रकाशित आत्मकथा का हवाला देते हुए नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया, जिस पर सत्ता पक्ष के सांसदों समेत रक्षा मंत्री और गृहमंत्री ने इसका जबरदस्त विरोध किया और कहा कि जब कोई किताब प्रकाशित ही नहीं है, तो उसका कोई अंश सदन के पटल पर नहीं रखा जा सकता। इसके अलावा स्पीकर ने भी राहुल गांधी को राष्ट्रपति के धन्यवाद प्रस्ताव पर ही बोलने के लिए कहा। लेकिन राहुल नहीं मानें और आखिरकार सदन की कार्यवाही को कल तक के लिए स्थगित कर दिया गया।
यह पूरा मामला उस वक्त शुरू हुआ जब भाजपा की तरफ से कांग्रेस पर देशभक्त न होने का आरोप लगाया गया। इस पर राहुल गांधी ने जनरल नरवणे के एक संस्मरण 'डोकलाम में चीनी टैंक' का हवाला देकर बोलना शुरू किया। इस पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी सीट से खड़े होकर हस्तक्षेप किया और राहुल को सदन की मर्यादा का ख्याल रखने को कहा। हालांकि, राहुल नहीं रुके और प्रधानमंत्री मोदी की मौजूदगी में सदन में भारी हंगामा जारी रहा। इसके बाद सदन की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। हालांकि, जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की यह किताब तब तक चर्चा में आ गई, तो आइए जानते हैं, आखिर कौन हैं भारतीय सेना के पूर्व चीफ जनरल एम एम नरवणे।
कौन हैं जनरल नरवणे?
जनरल एम एम नरवणे एक फौजी परिवार से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भारतीय वायुसेना के अधिकारी रह चुके हैं। नेशनल डिफेंस एकेडमी और पुणे में इंडियन मिलिट्री एकेडमी से पढ़ाई करने वाले जनरल के पास डिफेंस स्टडीज में एमफिल की डिग्री भी है। जून 1980 में उन्हें सिख लाइट इन्फैंट्री की 7वीं बटालियन में कमीशन मिला। बाद में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रीय राइफल्स की दूसरी बटालियन (सिख लाइट इन्फैंट्री) की कमान संभाली और 106 इन्फैंट्री ब्रिगेड का नेतृत्व किया। उन्होंने असम राइफल्स की कमान भी संभाली और कश्मीर तथा पूर्वोत्तर भारत में आतंकवाद-रोधी अभियानों में सेवा दी। 16 दिसंबर 2019 को उन्होंने पूर्व आर्मी चीफ और देश के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत के बाद आर्मी चीफ का पद संभाला था। वह 31 दिसंबर 2019 से लेकर 30 अप्रैल 2022 तक 27वें सेना प्रमुख रहे।
किताब को लेकर क्या विवाद?
पूर्व सेना प्रमुख नरवणे ने रिटायर होने के बाद अपनी आत्मकथा 'फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी' लिखी। इस किताब के कुछ अंश दिसंबर 2023 में बाहर आए। प्रकाशक की तरफ से बताया गया कि यह किताब 2024 में प्रकाशित होने वाली है। इस किताब के नाम पर कई जगह पर ऑनलाइन प्री ऑर्डर भी हेने लगे। लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक रक्षा मंत्रालय की अनुमति न मिलने की वजह से यह किताब अभी तक प्रकाशित नहीं हो पाई है। सरकार द्वारा प्रकाशन की अनुमति न मिलने का सवाल जब जनरल नरवणे से किया गया तो उन्होंने कहा कि उनका काम किताब को लिखना था, सरकार की अनुमति लेना प्रकाशक का काम है। इसी किताब के कुछ वाक्यों का प्रयोग करके आज राहुल गांधी ने सरकार पर निशाना साधा।




साइन इन