कौन हैं TMC के वे 8 विधायक, जो आज भी ममता बनर्जी का दे रहे साथ; कई सांसदों ने भी बनाई दूरी
ममता बनर्जी के खेमे में जो नेता अभी भी डटे हुए हैं उनमें से मदन मित्रा, फिरहाद हकीम, शोभनदेव और अशोक देब जैसे चेहरे 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के समय से ही उनके साथ हैं।

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भारतीय जनता पार्टी के हाथों मिली करारी हार के महज एक महीने के भीतर ही तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदरूनी मतभेद खुलकर सामने आ गए हैं। इस सार्वजनिक कलह ने न केवल पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को हिलाकर रख दिया है, बल्कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी राजनीतिक रूप से अलग-थलग कर दिया है। अब उनके साथ केवल कुछ गिने-चुने पुराने और वफादार नेता ही खड़े नजर आ रहे हैं।
सत्ता से बाहर होने के बाद मंगलवार को जब ममता बनर्जी पहली बार सड़कों पर उतरीं तो उनके साथ केवल आठ विधायक दिखाई दिए। इनमें नैना बंद्योपाध्याय, फिरहाद हकीम, कुणाल घोष, बिमान बंद्योपाध्याय, शोभनदेव चट्टोपाध्याय, मदन मित्रा, अशोक देब और आशिमा पात्रा शामिल थे। इनके अलावा डेरेक ओ'ब्रायन, कल्याण बनर्जी, डोला सेन, समीरुल इस्लाम, मेनका गुरुस्वामी और नदीमुल हक जैसे कुछ सांसद भी साथ दिखे। कल्याण बनर्जी को छोड़कर बाकी सभी राज्यसभा सदस्य हैं।
ममता के साथ खड़े हैं पुराने सिपाही
ममता बनर्जी के खेमे में जो नेता अभी भी डटे हुए हैं उनमें से मदन मित्रा, फिरहाद हकीम, शोभनदेव और अशोक देब जैसे चेहरे 1998 में तृणमूल कांग्रेस की स्थापना के समय से ही उनके साथ हैं।
मदन मित्रा: कमरहटी से विधायक मदन मित्रा टीएमसी सरकारों में कई महत्वपूर्ण मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। पार्टी में दरकिनार किए जाने के बावजूद वह ममता के प्रति वफादार रहे।
फिरहाद हकीम: कोलकाता पोर्ट से दोबारा विधायक चुने गए फिरहाद हकीम को बुधवार को कोलकाता के मेयर पद से इस्तीफा देने की अनुमति मिल गई है। वह ममता कैबिनेट में शहरी विकास, आवास और परिवहन जैसे बड़े पोर्टफोलियो संभाल चुके हैं। पार्टी ने उन्हें विधानसभा में मुख्य सचेतक भी नियुक्त किया था, जिसे अब बागी विधायकों ने चुनौती दी है।
शोभनदेव चट्टोपाध्याय: शोभनदेव बंगाल के इकलौते ऐसे विधायक हैं जिन्होंने लगातार 10 बार विधानसभा चुनाव जीता है। 1998 के उपचुनाव में वह टीएमसी के सिंबल पर जीतने वाले पहले उम्मीदवार थे। उन्होंने कृषि, संसदीय कार्य और ऊर्जा जैसे कई विभागों का जिम्मा संभाला है।
अशोक देब: वह सात बार के विधायक हैं और 1996 से लगातार बज बज सीट पर काबिज हैं।
नेता प्रतिपक्ष के चुनाव को लेकर बगावत
TMC के भीतर की यह दरार उस समय पूरी तरह सार्वजनिक हो गई जब बुधवार को पार्टी के कुल 80 विधायकों में से 60 विधायकों ने ममता बनर्जी के फैसले के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ममता बनर्जी ने शोभनदेव चट्टोपाध्याय को नेता प्रतिपक्ष के रूप में चुना था। लेकिन बागी विधायकों ने इस फैसले को खारिज करते हुए स्पीकर रथींद्र बोस को पत्र सौंपकर निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी को नेता प्रतिपक्ष बनाने की मांग की। हालांकि, बागियों ने यह भी स्पष्ट किया कि ममता बनर्जी अब भी उनकी सर्वोच्च नेता हैं।
बढ़ सकती है बागियों की संख्या
पार्टी सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में बागी विधायकों की संख्या और बढ़ सकती है। इसके साथ ही पार्टी के सांसदों में भी इसी तरह की फूट की आशंका तेज हो गई है। बारसात से सांसद काकोली घोष दस्तीदार ने पहले ही टीएमसी नेतृत्व पर उंगली उठाते हुए पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है, जिससे साफ है कि पार्टी के भीतर अंदरूनी संकट अभी और गहराने वाला है।




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