क्या है ममता बनर्जी की 'एपांग ओपांग झपांग'? जिस पर शुभेंदु सरकार ने चला दी कैंची, लाइब्रेरी से होगी विदाई
Apang Opang Jhapang: ममता बनर्जी सरकार ने पिछले साल जून 2025 में, राज्य के स्कूलों की लाइब्रेरी में अपनी किताबें रखने का आदेश दिया था। 515 किताबों की लिस्ट में 90 किताबें ममता की लिखी हुई थीं।

Apang Opang Jhapang: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को झटके लगने का सिलसिला थम ही नहीं रहा है। पार्टी के अंदर विधायकों से लेकर सांसदों तक की बगावत झेल रहीं तृणमूल कांग्रेस चीफ को अब नई शुभेंदु सरकार ने एक और झटका दिया है। राज्य के पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष ने घोषणा की है कि सरकारी सहायता प्राप्त पुस्तकालयों से 'एपांग ओपांग झपांग' हटाई जाएगी। उनके इस बयान से पश्चिम बंगाल में पुस्तकालयों में रखी जाने वाली किताबों को लेकर एक नया विवाद शुरू हो गया है। दरअसल घोष की 'एपांग ओपांग झपांग' से मतलब पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की किताबों से है, जिसे राज्यभर के पुस्तकालयों में रखा गया है।
पुस्तकालय मंत्री गौरीशंकर घोष का कहना है कि पुस्तकालय ज्ञान पाने की जगह हैं, इसलिए वहां ऐसी ही किताबें होनी चाहिए जो बच्चों के बौद्धिक विकास और राष्ट्रीय चेतना में सहायक हों। उन्होंने तर्क दिया कि 'एपांग ओपांग झपांग' जैसी 'अर्थहीन कविताओं' (नॉनसेंस पोएम) से पुस्तकालयों में जगह बर्बाद नहीं की जाएगी, क्योंकि इनसे पाठकों के व्यक्तित्व विकास में कोई विशेष योगदान नहीं मिलता।
पुस्तकालयों में क्या होगा बदलाव?
आजतक बांग्ला को दिए एक इंटरव्यू में घोष ने कहा कि पुसितकालय में लोग ज्ञान प्राप्ति के लिए जाते हैं। इसलिए वहां सिर्फ वही किताबें मिलेंगी जिन्हें पढ़कर लोगों का ज्ञानवर्द्धन हो सके। उन्होंने साफ लहजे में कहा, "राज्य की सभी लाइब्रेरी से एपांग ओपांग झपांग हटा दी जाएंगी।" जब उनसे पूछा गया कि क्या पूर्व मुख्यमंत्री क्या ममता बनर्जी की लिखी किताबें भी लाइब्रेरी में नहीं होंगी? तो मंत्री ने कहा, "मैं उन सभी टेक्स्टबुक को रखकर जगह बर्बाद नहीं करूंगा, जिन्हें पढ़ने से बच्चे का दिमाग विकसित नहीं होता। उनकी जगह पुस्तकालयों में रवींद्रनाथ, नज़रुल इस्लाम और विवेकानंद की किताबें होंगी। शिवाजी और राणा प्रताप की जीवनियां होंगी।"
515 में 90 किताबें ममता की
बता दें कि जून 2025 में तत्कालीन ममता सरकार ने स्कूलों के पुस्तकालयों में अपनी लिखी लगभग 90 पुस्तकों को शामिल करने का निर्देश दिया था और इसके लिए स्कूलों को वित्तीय सहायता भी दी गई थी। 515 किताबों की लिस्ट में से करीब 90 किताबें ममता की लिखी हुई थीं। इसके लिए सेकेंडरी और हायर सेकेंडरी स्कूलों को फंड दिया गया था। हर स्कूल के लिए 1 लाख रुपये आवंटित किए गए थे लेकिन अब नई भाजपा सरकार उन फैसलों को पलटते हुए केवल 'ज्ञानवर्धक' साहित्य पर जोर दे रही है।
क्या है 'एपांग ओपांग झपांग' और उसका विवाद?
'एपांग ओपांग झपांग' मूल रूप से बच्चों के एक एनर्जी ड्रिंक के विज्ञापन का जिंगल था, जिसका बंगाली भाषा में कोई स्पष्ट अर्थ नहीं है। ममता बनर्जी द्वारा अपनी कविता में इन शब्दों का इस्तेमाल करने के बाद से ही विपक्षी दल (विशेषकर बीजेपी) उन पर तंज कसते रहे हैं। साल 2022 में ममता बनर्जी को उनके काव्य संग्रह 'कविता बितान' के लिए बांग्ला एकेडमी अवॉर्ड भी मिला था। उस वक्त भी इस कविता को लेकर साहित्यिक और राजनीतिक बहस छिड़ी थी। साहित्यिक भाषा में इस तरह की कविता को 'बकवास कविता' या 'बिना मतलब की कविता' कहा जाता है।




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